राजभर (RAJBHAR) बीजेपा में जाएंगे या सपा में ? एक फूल दो माली

Pragya Ka Panna Editorial
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देखो भईया हिंदुस्तान की नेतागिरी (RAJBHAR) की खासियत ही यही है कि अपने हिसाब से धोखा दे सकते हो..अपने हिसाब से पैर पकड़ सकते हो..अपने हिसाब से आ सकते हो अपने हिसाब जा सकते हो..अपने हिसाब से लाए जा सकते हो..और अपने हिसाब से भगाए जा सकते हो..लोकतंत्र का भरपूर इस्तेमाल अगर किसी पेशे में होता है तो वो नेतागीरी ही है..बाकी जगह बंधन होते हैं..लेकिन नेतागीरी में आपके ना आगे नाथ होती है ना पीछे पगहा होता है मतल आपको छुट्टा सांड होने का भरपूर मौका इसी पेशे में मिल सकता है..

             ओम प्रकाश राजभर (RAJBHAR) को तो आप जानते ही होंगे..वही जिनको कल तक कोई नहीं जानता था..बुरा मानने की बात नहीं हैं..2017 के पहले वाकई कोई नहीं जानता था..4 साल विद्रोह करने के बाद उनको बीजेपी की चाय फिर से अच्छी लगने लगी है..चुनाव आने वाले हैं..इसीलिए बीजेपी ने चाय में चीनी और दूधबढ़ाकर डालना शुरू कर दिया है..चाय कब चैलेंजिग बनानी है और कब चुस्की वाली ये बीजेपी से अच्छा कोई नहीं जानता..पिछले 4 साल से ओम प्रकाश राजभर के लिए बीजेपी की चाय चैलेंजिंग थी..अब 2022 के उबाल से पहले..चुस्की वाली होने लगी है..

चाय ठीक बनते ही ओम प्रकाश राजभर (RAJBHAR) जी बीजेपी केअध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के घर जाकर चाय पी..बोले स्वतंत्र देव सिंह पिछड़ों के नेता हैं..इसीलिए आया हूं..कहा जाने लगा कि ओम प्रकाश राजभर एनडीए में फिर से वापस आ सकते हैं..बंद कमरे में 1 घंटे बात चली..मेरे सूत्र ये कहते हैं कि ओम प्रकाश राजभर (RAJBHAR) स्वतंत्र देव सिंह से मिलकर एक तीर से तीन निशाने लगाने में कामयाब हो गए..पहला मंत्री स्वाति सिंह के पति दयाशंकर के एमएलसी टिकट की पैरवी..दूसरा एनडीए में अपनी जरूरत और वापसी की चर्चा गर्म करना..तीसरा सपा को बारगेनिंग संदेश देना..

ओम प्रकाश राजभर (RAJBHAR) कहते हैं 45 प्रतिशत ओबीसी वोट उनके साथ हैं..2022 के चुनाव में बीजेपी राजभर को अपने से अलग नहीं होने देना चाहती क्योंकि क्योंकि यूपी में 4 प्रतिशत राजभर वोट यूपी की लगभग 70 सीटों का भविष्य तय करता है..15 से 20 सीटें ऐसी हैं..जहां राजभर ही सीट हराते और जिताते हैं..पिछले 2017 के विधानसभा के चुनाव में बीजेपी ने ओम प्रकाश राजभर (RAJBHAR) की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 8 सीटें लड़ने के लिए दी थीं..ओम प्रकाश राजभर 4 सीटें जीते थे..3 पर नंबर दो पर रहे थे..

ओम प्रकाश राजभर (RAJBHAR) को स्वतंत्र देव सिंह के घर पर लेकर बलिया से आने वाले दयाशंकर लेकर गए थे..वही दयाशंकर जो यूपी की मंत्री स्वाति सिंह के पति हैं..कहते हैं दयाशंकर जी को एमएलसी का टिकट चाहिए..खैर…

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                              ओम प्रकाश राजभर कहते हैं कि उनकी मांगें अगर बीजेपी ने मान लीं तो वो बीजेपी के साथ जा सकते हैं..क्योंकि राजनीति में कोई दोस्त और दुश्मन नहीं होता है..राजभर की सबसे मेन मांग है..कि बीजेपी किसी पिछड़े को मुख्यमंत्री बनाए..नड्डा और शाह से भी राजभर मुलाकात करेंगे..दिल्ली से डील डन हो गई तो..ओम प्रकाश राजभर 3 साल के भूले चौथे साल घर वापस आ जाएंगे..

ओम प्रकाश राजभर ने एक मोर्चा बनाया है जिसमें ओवैसी शामिल हुए हैं..ओम प्रकाश राजभर तो बीजेपी के सहयोगी खुले तौर पर रहे हैं..लेकिन बीजेपी की बी टीम के आरोपों के साथ यूपी में चुनाव लड़ने आई ओवैसी की AIMIM का क्या होगा..सवाल ये भी है..क्योंकि राजभर का कहना है कि उनका ओवैसी के साथ आधिकारिक तौर पर अभी कुछ करार नहीं हुआ है…बीजेपी के साथ सरकार में रहने के बाद भी ओम प्रकाश राजभर ने बीजेपी की जितनी मुखालफत की है उतनी विपक्ष भी नहीं कर पाया है..

लेकिन धीरे धीरे नफरत मोहब्बत में बदल रही है..इस समय राजभर की पांचों उंगलियां घी में आर सिर कढ़ाई में है..एक फूल दो माली की तरह..ओम प्रकाश राजभर सपा की भी तारीफ भी करते हैं..सपा में जाने से भी राजभर को कोई परहेज नहीं है..क्योंकि वहां तो राजभर को पिछड़ा मुख्यमंत्री ऑटेमैटिक मिलेगा..बीजेपी के साथ राजभर की मुलाकात सपा पर दबाव जरूर बनाएगी..2022 के चुनावों में चर्चा के लिए आप मेरे साथ जरूर जुड़ें..ऐसी बातें और सत्य के करीब वाले राजनीतिक विश्लेषण जारी रहेंगे..चलते हैं राम राम दुआ सलाम जय हिंद..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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