35 साल बाद राजा मान सिंह हत्याकांड के दोषी DSP समेत 11 पुलिस वालों को उम्रकैद, जानें पूरा मामला

35 साल से जारी बहुचर्चित भरतपुर के मानसिंह हत्याकाण्ड में दोषी पाए गए सभी 11 पुलिस कर्मचारियों को उम्रकैद व 12-12 हज़ार रुपए जुर्माने की सजा सुना दी गई है.

raja man singh assassination case punishment 11 policeman
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दोषी पुलिसकर्मियों में राजस्थान पुलिस के तत्कालीन एक डीएसपी, दो उपनिरीक्षकों सहित 11 पुलिस और आरएसीकर्मी शामिल हैं. मंगलवार को न्यायालय ने सभी को दोषी करार दिया था. बुधवार को सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को पुलिस सुरक्षा में अस्थाई जेल भेज दिया गया. बतादें कि 21 फरवरी 1985 को भरतपुर के राजा मानसिंह का राजस्थान के डीग में एनकाउंटर कर दिया गया था. 1990 में ये मामला राजस्थान से बाहर मथुरा में ट्रांसफर कर दिया गया था.

मामला 20 फरवरी 1985 का है. विधान सभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने डीग के किले पर लगा झंडा उतारकर कांग्रेस का झंडा लगा दिया था. इस हरकत से मानसिंह खफा हो गए. मान सिंह जी ने कांग्रेस की सभा न होने देने की ठान ली. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर की डीग में सभा थी. मान सिंह अपने कार्यकर्ताओ के साथ जीप में सवार होकर पहुँचे और मंच तोड़ दिया.

मंच तोड़ने के बाद माथुर जिस हेलिकॉप्टर से आए थे, मान सिंह ने उसे अपनी जीप से टक्कर मार दी. लेकिन इसमें कोई चोटिल नहीं हुआ. मुख्य मंत्री माथुर सड़क मार्ग से वापस जयपुर लौट गए. इस मामले में मान सिंह के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किया गया था. अगले ही दिन डीएसपी कान सिंह ने डीग के बाजार में राजा मान सिंह को रुकने का इशारा किया लेकिन, मान सिंह अपनी जीप बैक करने लगे. इसी दौरान पुलिसवालों ने फायरिंग कर दी. इस फायरिंग में राजा मानसिंह, उनके साथी सुमेर सिंह व हरि सिंह की मौत हो गई थी.

इस एनकाउंटर के बाद मान सिंह के दामाद विजय सिंह ने डीग थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. जीप में विजय सिंह साथ थे. लेकिन वे बच गए. 28 फरवरी 1985 को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने 14 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जयपुर कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी. 1990 में इस मामले को राजस्थान के बाहर मथुरा कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था.

उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री माथुर को पद से त्याग पत्र देने को कहा. माथुर ने 22 फरवरी 1985 की आधी रात को इस्तीफ़ा दे दिया. इससे लोगों का ग़ुस्सा कुछ शांत हुआ. माथुर की जगह वरिष्ठ कांग्रेस नेता हीरालाल देवपुरा को मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया.

मथुरा के जिला जज ने दोषी डीएसपी कान सिंह भाटी समेत 11 पुलिसवालों को उम्र कैद की सजा सुनाई है. इस मामले में 14 लोगों को आरोपी बनाया गया था. इनमें से 3 को बरी कर दिया गया है.

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