छापा (Raid) मारना था इधर पड़ गया उधर गलती से इतिहासिक गलती हो गई : संपादकीय व्यंग्य

PRAGYA KA PANNA
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गलतफहमी में देश का सबसे बड़ा छापा (Raid) पड़ गया..गलती से देश की सबसे बड़ी बरामदगी हो गयी है..और बाद में पता चला..अरे भईया..गलती से गलती हो गई..ये तो पीयूष है..चलो इसका काला धन हटाओ..ये इसका टर्न ओवर है..दुनिया को ये बताओ..सॉरी पीयूष जैन..तुम्हारे 52 करोड़ मूर्खों की मूर्खता की वजह से बर्बाद हो गए..कलम फंस जाएगी..इसलिए हमें 52 करोड़ की वसूली दिखानी पड़ेगी..चलो अब पम्मी जैन के यहां छापा मारो..

छापा (Raid) मारना था समाजवादी पार्टी के एमएलसी पुष्प राज जैन के घर पर..और छापा मार दिया है..शिखर पान मसाला वाले बीजेपी के सपोर्टर पीयूष जैन पर..इतिहास की सबसे बड़ी गलती हो चुकी थी..देश की सबसे बड़ी बरामदगी हो चुकी थी..मीडिया इसे काला धन बता रहा था..3 दिन तक टीवियों पर रंगीन कहानियां परोसी गईं..पीयूष जैन को समाजवादी पार्टी का इत्र बनाने वाला बताया गया..देश का मीडिया बिकाऊ तो कहा ही जा रहा था..पहली बार ही पता चला कि दिल्ली मुंबई तक बैठे संपादक और रिपोर्ट अंधे भी हैं..

जब जैन जैन और पी पी में कन्फ्यूज होकर एजेंसियां गलत आदमी के घर छापा (Raid) मार सकती हैं..तो संपादक टाइप के लोग तो..खैर..क्या कहें..खैर जो गलती नाम में कन्फ्यूजन की वजह से हुई थी..वो गलती समय रहते सुधार ली गई है..समाजवादी पार्टी के एमएलसी पम्मी जैन यानी पुष्पराज जैन के घर छापा पड़ गया है..अब इतनी नाटक बाजी के बाद भी..पम्मी जैन यानी पुष्पराज जैन के घर से काला धन ढूंढक एजेंसियों के हाथ लग जाए तो एजेंसियों की किस्मत और पुष्पराज जैन की बदनसीबी ही कही जाएगी..वर्ना हमारे यूपी में बिजली कर्मचारियों के आते ही..पूरे मोहल्ले की कटिया हट जाया करती हैं..पीयूष जैन का घर तो कन्नौज में पम्मी जैन के घर से 100 मीटर की दूरी पर था..और पुषपराज टीवी वगैरह तो देखते ही होंगे..

खैर इतिहास में ये ना लिखा जाए कि गलत फहमी में काला धन खोजने वाली एजेंसियों के हाथ गलती से बहुत बड़ा खजाना (Raid) लग गया था..अपने ही हाथों से अपने ही चंदा देवक को पकड़ लिया था..इसलिए..पीयूष जैन के घर से जो 177 करोड़ रुपए मिले..5-6 किलो सोना मिला..और भी जो फलाना ढिमकाना मिला उसे पीयूष जैन का टर्नओवर बता दिया गया..वैसे तो काला धन पकड़क एजेंसियां कई महीनों तक केस की जांच करती हैं..इतने धन का कागज पत्तुर जांचने में समय लग ही जाता है..

बाकी लोगों के केस में यही होता है..महीनों पूछताछ के लिए बुलाया जाता है कि पैसों की ये रसीद कटी है..ये पैसा कहां से आया फालाना ढिमकाना..लेकिन जब ये पता चल गया कि शिखर पान मासाला वाला अपना ही भाई है..इसने मोदी जी के प्रचार के लिए पोस्टर वोस्टर सब लगवाए थे..तो तुरंत फौरस से पहले काला धन पकड़क एजेंसियों ने बताया कि भईया..ये जो धन है ये काला नहीं है..दरअसल इस छापा (Raid) के बाद हमारा ही मुंह काला हो गया है..इसलिए ये सारा धन टर्न ओवर है..टर्न ओवर मतलब पीयूष भईया ने जो मसाला बेचा है..ये सब उसी बिक्री का पैसा है..

खैर इतिहास में ये ना लिखा जाए कि गलत फहमी में काला धन खोजने वाली एजेंसियों के हाथ गलती से बहुत बड़ा खजाना लग गया था..अपने ही हाथों से अपने ही चंदा देवक को पकड़ लिया था..इसलिए..पीयूष जैन के घर से जो 177 करोड़ रुपए मिले..5-6 किलो सोना मिला..और भी जो फलाना ढिमकाना मिला उसे पीयूष जैन का टर्नओवर बता दिया गया..वैसे तो काला धन पकड़क एजेंसियां कई महीनों तक केस की जांच करती हैं..इतने धन का कागज पत्तुर जांचने में समय लग ही जाता है..बाकी लोगों के केस में यही होता है..

महीनों पूछताछ के लिए बुलाया जाता है कि पैसों की ये रसीद कटी है..ये पैसा कहां से आया फालाना ढिमकाना..लेकिन जब ये पता चल गया कि शिखर पान मासाला वाला अपना ही भाई है..इसने मोदी जी के प्रचार के लिए पोस्टर वोस्टर सब लगवाए थे..तो तुरंत फौरस से पहले काला धन पकड़क एजेंसियों ने बताया कि भईया..ये जो धन है ये काला नहीं है..दरअसल इस छापा के बाद हमारा ही मुंह काला हो गया है..इसलिए ये सारा धन टर्न ओवर है..टर्न ओवर मतलब पीयूष भईया ने जो मसाला बेचा है..ये सब उसी बिक्री का पैसा है..

आम आदमी के मुंह में जुबान होती तो पूछता है कि बिक्री का पैसा इतनी मात्रा में कैश कैसे आया…आया था तो घर में क्यों रखा..डिजिटल इंडिया कानपुर या कन्नौज में नहीं चलता क्या..लेकिन जब भाई अपना ही निकाल तो कौन पूछे कौन बताए..सब टर्न ओवर है..52 कोरोड़ टैक्स दो..जिससे डिपार्टमेंट की भी लाज रह जाए..कन्फ्यूजन में किया गया कांड भी छिप जाए..दोस्तों इस गलत फहमी की वजह से बहुत कुछ बदलना पड़ा..संपादक टाइप लोग जानकर मक्खी कैसे निगल जाते इसलिए हेडलाइन बदलनी पड़ी..मोदी को अपने भाषण में गोलमोल करना पड़ा..प्रवक्ताओं को ट्विटर पर मुंह छिपाना (Raid) पड़ा..एक बात अपनी मीडिया से कहूंगी..इतने भी बड़े वाले गोदी मत हो जाओ कि पीयूष और पुष्पराज में अंतर ना कर पाओ..लोग मीडिया को गरियाते हैं..मीडिया के नाम पर थूकते हैं..तो बुरा लगता है..

दोस्तों जब किस्मत साथ नहीं देती है तो ऊंट पर बैठे आदमी को भी कुत्ता काट लेते है..कन्फ्यूजन में ही सही देश का सबसे बड़े काले धन कांड का खुलासा हो गया..इतिहास में कभी कन्फ्यूजन का जिक्र होगा..तो पम्मी और पीयूष के नामों का जिक्र जरूर होगा..गलतियां इंसान से ही होती हैं..जनता हो सरकार हो..नेता हो या तोता हो..जो सहर्ष अपनी गलतियों को पहचानकर उसे सुधारे वही श्रेष्ठ है..

बंगाल हो..बिहार हो या कोई और चुनावी राज्य हमेशा बीजेपी के विरोध में रहने वाली पार्टी के लोगों पर ही छापे (Raid) पड़ते हैं..यूपी में भी वही हो रहा है..दरअसल चुनाव के ठीक पहले..विपक्षी पार्टियों पर पड़ने वाले छापे सरकारी के डर को दिखाते हैं..हार के डर को दिखते हैं..तो सवाल ये है कि क्या सरकारें अखिलेश की रैलियों से डरी हुई हैं..जवाब आप कमेंट में दीजिए..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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