हैदराबाद की महिला डॉक्टर के बाद दूसरी महिला की लाश बरामद, तीसरी ने तोड़ा दम, देश भर में प्रदर्शन

हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ दुष्कृत्य और फिर जलाकर मार देने की घटना से देश भर के जनमानस की भावनाओं में उबाल आ गया है. सोशल मीडिया पर लोगों ने सरकार-प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है.

protest against hyderabad woman doctor burnt
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दिल्ली-यूपी, बिहार और महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्य जो महिला सुरक्षा को लेकर लाख दावे करते हैं. लेकिन ये दावे हकीकत से कोसों दूर हैं. दुष्कर्म और बलात्कार की घटनाएं रुकने का नाम ही नई ले रही हैं. इस बीच दिल्ली में शनिवार को पार्लियामेंट भवन के बाहर प्रदर्शन कर रही एक लड़की ने सवाल किया है- ‘आखिर क्यों मैं भारत में सुरक्षित महसूस नहीं करती?

मामला हैदराबाद का है जहाँ कुछ लोगों ने एक युवा महिला पशुचिकित्सक (27) के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसे जिंदा ही जला दिया था. इसके बाद उसकी अधजली लाश को पुल से नीचे फेंक दिया गया था. जिस तरह निर्भया को मदद का भरोसा देकर बस में बैठा लिया गया था, उसी तरह मदद का झांसा यहां भी देकर इंसानियत को शर्मसार कर दिया गया.

घटना के सामने आने के बाद शुक्रवार को पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी पेशे से ट्रक ड्राइवर और उसके सहायक हैं. वहीं बड़ी खबर ये आई है की जहां महिला डॉक्टर की जली हुई लाश मिली थी उसी क्षेत्र में ही एक और महिला का शव बरामद हुआ है. अभी तक महिला की पहचान नहीं हो पाई है. सहायक पुलिस आयुक्त अशोक कुमार गौड़ ने बताया कि कुछ राहगीरों ने जले हुए शरीर को देखा और उन्हें सूचित किया. पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और महिला को अस्पताल पहुंचाया है.

हैदराबाद में शादनगर पुलिस स्टेशन के बाहर महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के विरोध में जमकर प्रदर्शन हुआ. शनिवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम भी वेटररनरी डॉक्टर के घर पहुंची. तेलंगाना की राज्यपाल डॉ. तमिलिसई सुंदरराजन भी आज डॉक्टर के परिवारवालों से मिलेंगी.

वहीं उत्तर प्रदेश के संभल जिले की एक निर्भया ने भी हैवानों के हमले से जूझते हुए आज दम तोड़ दिया. बीते 21 नवंबर को संभल के नखासा थाना क्षेत्र के कस्बे में एक किशोरी के साथ कुछ दरिंदों ने दुष्कर्म कर उसे जिंदा जला दिया था। पिछले कई दिनों से गंभीर हालत में किशोरी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती थी.

आज एक सवाल हर मां-बाप के मन में है कि इस वहशी समय में वे अपनी बहनों-बेटियों को कैसे बचाएं ? उन्हें घर में बंद रखना तो समस्या का समाधान नहीं है. अपनी ज़िंदगी जीने का उन्हें भी पूरा हक़ है. लेकिन ऐसी वारदाते कब रुकेंगी ?

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