मोदी के लिए प्रियंका चोपड़ा की शादी जरूरी थी या  ‘गाय’ के लिए ‘बैल’ बनकर ‘भेड़ियों’ के बीच कूद जाने वाला इंस्पेक्टर

मोदी फिल्म स्टार प्रियंका चोपड़ा (priyanka chopra nik reception)की शादी में पहुंच गए. लेकिन बुलंदशहर (bulandsahar में गाय की रक्षा के लिए जान गंवाने वाले इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह (subodh kumar singh)  के घर वालों के दुख में शरीक नहीं हुए. जबकि मोदी जी के एजेंडे में प्रियंका चोपड़ा और निक जोन कभी थे ही नहीं. मोदी जी के एजेंडे में गाय थी. लेकिन गाय के लिए मारे गए माफ कीजिएगा शहीद हुए ऑफीसर के घर नहीं गए.

आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जल्दी ही सुहागिन हुईं आदरणीय प्रियंका चोपड़ा की शादी वाले कार्यक्रम में नहीं जाते तो ये
सवाल नहीं उठता. कि यहां क्यों गए वहां नहीं गए. क्योंकि देश के प्रधानमंत्री के पास शादियां अटेंड करने का समय है लेकन शहीद
के घर जाने का समय नहीं है. दिल्ली से बुलंदशहर की दूरी सड़क से दो घंटे की है. किमी में जोड़िए तो 105 किमी की है. और कौन
सा मोदी जी को सड़क-सड़क जाना था या 444 नंबर की बस पकड़कर जाना था. मोदी जी के पास उड़नखटोला है. कभी भी कहीं
भी जा सकते हैं लेकिन नहीं गए. शादी जरूरी थी.

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गाय मोदी जी के या यूं कहें कि उनकी पार्टी के एजेंडे में है लेकिन गाय के लिए मारा गया आदमी उनके एजेंड में नहीं है. चलो एक
बार अखलाक से ही तुलना हो जाए. जब अखलाक गाय के लिए मारा गया था. तो तमाम तथाकथित मुस्लिमों के हमदर्द दल उनके
घर गए थे. दादरी सियासत का पिकनिक स्पॉट बन गया था लेकिन गाय के लिए एक हिंदू के मारे जाने पर कोई हिंदू वादी संगठन
वहां नहीं गया. बल्कि उसकी मौत के 24 घंटे में ही फिल्मी शादियों में मेहमान बन रहे हैं.

 

modi in priyanka nik reception
modi in priyanka nik reception
मोदी जी के प्रियंका की शादी में ना जाने से ये भारी क्षति होती

प्रियंका की शादी या रिसेप्शन में मोदी जी नहीं जाते तो प्रियंका का रौला विराट और अनुष्का की शादी से कम हो जाता दुनिया प्रियंका चोपड़ा को हमेशा कोसती. प्रियंका चोपड़ा को हमेशा नीचा देखना पड़ता कि अनुष्का को प्रधानमंत्री मोदी ने गिफ्ट दिया था लेकिन प्रियंका का पउवा उतना नहीं था कि प्रधानमंत्री को बुला पातीं. बनारस से मोदी जी पास हुए हैं, प्रियंका बरेली की. अपने ही सूबे की लड़की बारात में मोदी जी ना जाते तो कैसा लगता. बेचारी विराट और अनुष्का के सामने कुंठित महसूस करती. इंस्पेक्टर का क्या है उसके जाने से नई भर्ती खुलेगी.

मोदी जी प्रियंका चोपड़ा की शादी में शरीक नहीं होते तो प्रियंका के ससुराल वाले शादी तोड़ नहीं देते. मोदी जी प्रियंका की शादी
(यहां शादी रिसेप्शन एक जैसे हैं क्योंकि फिल्मी लोग शादी कई बार करते हैं कई शहरों में करते हैं इसलिए समझ नहीं आता कौन
सी शादी थी कौन सा रिसेप्शन था) में नहीं जाते तो उनकी विदाई रुक नहीं जाती. पुलिस के जवान के घर चले जाते तो घर वालों
को लगता कि चलो कोई तो आया.

मोदी के लिए प्रियंका चोपड़ा की शादी जरूरी थी या बुलंदशहर में गाय बचाते हुए मारा गया पुलिस ऑफीसर. तो कहने वाले ये भी
कह सकते हैं प्रधानमंत्री हैं छोटी मोटी बातों पर रिएक्ट थोड़ी ना कर सकते हैं. तो जवाब देने वाले जवाब ये भी देते हैं कि मोदी जी
चुनावों में श्मसान-कब्रिस्तान-ईद-दीवाली-डिंपल यादव को मुद्दा बना सकते हैं तो पुलिस ऑफीसर की हत्या बहुत बड़ा बड़ा मामला
था.

मोदी जी क्यों बुलंदशहर नहीं गए

मोदी जी बुलंदशहर नहीं गए क्योंकि जिस पुलिसवाले की हत्या हुई है उसमें हिंदूवादी संगठन के ही लड़के पर आरोप है. बुलंद
शहर आता है उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश के सीएम हैं योगी आदित्यनाथ. आदित्यनाथ बड़े कट्टर हिंदूवादी नेता हैं. ओवैसी को तेलंगाना के हैदराबाद से भगाने की चुनौती देकर आए हैं. चक्रवती मुख्यमंत्री हैं. दलित हनुमान शात्र के रचयिता हैं. लेकिन पुलिस वाले के घर झांकने इस लाइन को लिखे जाने तक वो भी नहीं गए.

बीजेपी के लिए गाय मुद्दा है और पुलिसवाला बैल है जो खुद हीरो बनकर गाय के लिए भेड़ियों के झुंड में घुस गया. आरोप यहां तक लग रहे हैं कि जो पुलिस का अधिकारी गाय कांड में मारा गया है वो ही दादरी के अखलाक वाले मामले की जांच भी कर रहा था
मारे गए पुलिस वालों के घर वालों का कहना है कि पुलिस अधिकारी को जानबूझ कर हिंदूवादी संगठनों नें मरवा दिया है. क्योंकि वो अखलाक मामले की जांच कर रहा था.

जिन्हें नहीं पता कि मसला क्या था तो वो ये जान लें कि बुलंदशहर के स्याना थाना इलाके में एक खेत में कुछ मवेशियों के शव पाए
गए थे. इसके बाद गोकशी के शक में हिंसा भड़क गई जिसमें एक पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को किसी ने गोली मार दी
और एक स्थानीय युवक सुमित को भी गोली लगी. दोनों की जान चली गई. हिंसा में कई गाडि़यां और पुलिस कार्यालय भी आग के
हवाले कर दिया गया.

 

वैधानिक चेतावनी – व्यंग्य है व्यंग्य की तरह लें. दिल पर लेने की जरूरत नहीं है.

 

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