कोरोना पर देश का हाल बताती प्रज्ञा जी द्वारा लिखित कविता ‘मैं प्रधान हूं सर्वशक्तिमान हूं’.. पढ़िए..

कोरोना से चीखपुकार है..
ऑक्सीजन से हाहाकार है..
एजेंसियों के सामने लंबी कतार है..
श्मसान घाटों पर लाशों की भरमार है..
सरकारें कहती हैं कि खबरदार
अगर किसी ने हम पर उंगली उठाई..
दे तो रहे हैं अस्पताल और दवाई..
क्या करें अगर मर गया है तुम्हारा भाई..
कोरोना से जान चली गई तो क्या..
बनने से पहले मिट गई
बिटिया की पहचान तो क्या..
लाश को मुक्ति मिल जाएगी..
अगर सरकार चली गई
तो दोबारा कैसे आएगी..
इसलिए हमको शक्तिशाली राजा बताओ..
कोरोना हमसे भय खाता है..
ऐसे मंगल गीत गाओ..
कोरोना आज नहीं तो कल मारा जाएगा..
पत्रकार बाबू तुमको यहीं रहना है..
समझ लेना बाद में सुधारा जाएगा..
जो भी हमारे खिलाफ लिखता है..
हमको सब कुछ दिखता है..
ट्विटर पर दवाई मांगते हो..
ऑक्सीजन के मुद्दे उछालते हो..
हम अपना खुद का इतिहास बनाएंगे
उसमें शक्तिशाली राजा कहलाएंगे..
हम तुम्हारा लिखा मिटा देंगे..
सारे गद्दारों को हटा देंगे..
मैं प्रधान हूं..सर्वशक्तिमान हूं..
इस देश का मैं ही संविधान हूं..
तुम सच कहोगे तो फेक बता देंगे..
तुम्हारे पीछे सारे भक्तगण लगा देंगे..
वो तुमको गरियाएंगे..
हर हाल में राजा की इज्जत बचाएंगे..

तुमको सिस्टम के अधीन रहना पड़ेगा..
विश्व का गुरू बनने के लिए घंटालों को सहना पड़ेगा..
राष्ट्र प्रगति के रास्ते पर है..
इसलिए परिवर्तन हो रहा है..
दिया जलाने वाला भक्त..
लाशें जला रहा है..
ताली बजाने वाला मातम मना रहा है..
मैं तो साक्षात हूं..
मेरे टुकड़ों पर पलने वालों मुझे आंख मत दिखाओ..
तुम्हारा अपना मर गया है
तो सिस्टम नाम का एक प्रतीकात्मक राजा बनाओ..
सब मिलकर उसको गरियाओ..
संसार को लगेगा सिस्टम नाम का राजा
सब गुड़ गोबर कर रहा है…
सिस्टम का देश तड़प तड़प तड़पकर मर रहा है..
जब सिस्टम सारी गाली खा जाएगा..
प्रज्ञा के पन्नों में अपनी नाक कटा जाएगा..
तब मेरा नाम वीरों की सूची में लिख देना..
मुझको भारत का शक्तिशाली शासक गढ़ देना..
तुमको दिखते होंगे..किसान..
तुमको दिखते होंगे कोरोना वाले श्मशान..
मैं कर्म से प्रचारक हूं
मुझे दिखता है सिर्फ चुनाव निशान…

डिस्क्लेमर- संपादकीय व्यंग्य लेख/कविता में लेखक के अपने निजी विचार हैं..इस लेख का मक्सद किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं है..लेख में बातें सरल भाषा में बताई गई हैं..जो सत्य के करीब हैं..

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