मैं मदरसे में आतंक का अड्डा खोजने निकली..देखिए मुझे क्या मिला

नमस्कार आज मैं बात करूंगी मदरसे की..जीवन में मैं पहली बार किसी मदरसे के भीतर दाखिल हो रही थी..मैंने देखा कि मदरसे में मस्जिद है..मदरसे में हॉस्टल है..मदरसे में क्लास रूम हैं..जिनके नाम उर्दू में लिखे थे..मैंने देखा मदरसे में प्रधानाचार्य (Madarsa Survey By Pragya Mishra) का कक्ष है..वहां एक कम्प्यूटर है..जिस पर एक व्यक्ति काम कर रहा था..मदरसे में मैदान भी था..मैंने मदरसे में एक कैंटीन भी देखी..लेकिन मुझे तलाश आतंक के अड्डे की थी..मदरसे में कहीं वो आतंक का अड्डा दिखाई नहीं दे रहा था..जो अक्सर न्यूज चैनलों पर दिखाई देता है…

मदरसे के किसी मौलाना की दीढ़ी में मुझे आतंकी नहीं दिखाई दे रहा था..मैंने देखा टीचर जिनको बच्चे उस्ताद या दूसरे दूसरे नामों से बुला रहे थे..उनमें प्रिंसिपल के सामने खुद को अच्छा शिक्षक दिखाने (Madarsa Survey By Pragya Mishra) की होड़ चल रही थी..खुद को बेस्ट क्लॉस टीचर दिखाने की कोशिशें चल रही थीं..मैंने देखा कहीं उर्दू की क्लास चल रही थी..मैंने देखा कहीं हिंदी की क्लास चल रही थी..मैंने देखा कहीं अरबी पढाई जा रही थी..कहीं विज्ञान..मैंने बच्चों की आखों में डॉक्टर बनने का सपाना देखा..

कोई बच्चा कहता मैं डॉक्टर बनूंगा कोई कहता मौलवी बनूंगा…कोई कहता मैं इंजीनियर बनूंगा..कोई बोला साइंटिस्ट बनूंगा..लेकिन मैं गोदी मीडिया देखकर गई थी..मुझे तलाश थी (Madarsa Survey By Pragya Mishra) उन बच्चों की जो कहते मैं आतंकवाद बनूंगा..मैं फिदाइन बनूंगा..लखनऊ के जिस माहद मदरसे में मैं गई थी..वहां पूरे देश से बच्चे पढ़ने आए थे..यहां तक कि विदेशों के बच्चे भी थे..

मैंने सारे बच्चों के बस्ते चेक करवाए..एक एक किताब (Madarsa Survey By Pragya Mishra) खंगलवाई..लेकिन किसी के पास बम बनाने की बुकलेट नहीं मिली..किसी के बस्ते से बम बनाने का सामान नहीं निकला..ना कोई डेटोनेटर..ना जेलेटिन की छड़ें..ना माचिस का बारूद..आश्चर्य था सब के सब पढ़ने आए थे..सबके बस्तों में पेन कॉपी किताबें ही थीं..

फिर मदरसे में आतंक का वो अड्डा कहां था जो मेन स्ट्रीम मीडिया के टीवी चैनलों पर दिखाता है..अगर टीवी वाला मदरसे में आतंक का अड्डा नहीं भी खोज पाता है..तो भी मदरसे को आतंक का अड्डा बताता है..इसी नाम से प्रोग्राम का शीर्शक रखा जाता है..

https://www.youtube.com/watch?v=VgJ2nr23ojA

टीवी ने बहुत जहर बोया है..जहरीली (Madarsa Survey By Pragya Mishra) टीवी ने बंटवारे और नफरत का जहर बोया है…दोस्तों मैं जैसे प्रथमिक विद्यालय जाती हूं..वैसे ही मदरसे के बच्चों के बीच पहुंची थी..कॉपी किताबें चेक की..उनका जर्नलनॉलेज चेक किया..क्लस देखे कैंटीन देखी..हॉस्टल देखे..मस्जिद देखी लेकिन माफ करिएगा आपकी ये पत्रकार मदरसे में आतंक का अड्डा खोजने में नाकाम रही..

मुझे जो दिखा..मैंने वो दिखाया..वो बताया..मुसलमानों (Madarsa Survey By Pragya Mishra) के बच्चे भी पढ़ना चाहते हैं आगे बढ़ना चाहते हैं..मौलवी बनना उनको आसान लगता है..इसलिए ज्यादातर बच्चे उर्दू और अरबी पढ़कर मौलाना बनने की बात कहते मिले..डॉक्टर इंजीनियर बनने का ख्वाब देखने वाले भी मिले..लेकिन मैं भारत की जनता से माफी चाहती हूं कि मुझे सुविधाएं असुविधाएं..तो देखने को मिलीं लेकिन आतंक का अड्डा नही मिला..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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