अबकी बार ट्रंप सरकार कहना भारी पड़ा है..अमरीका बड़ी मुश्किल से माना : व्यंग्य संपादकीय

ये अंतराष्ट्रीय संबंध..वो विदेशों में जयजयकारे..नमस्ते ट्रंप..हाउडी मोदी..सब धरा रह गया ना..दोगले अमरीका ने मुंह पर सामान देने मना कर दिया ..वो बाइडेन जानता है कोरोना के टीके की अहमियत..उनको मालूम है…भारत को कच्चा माल दे देगा तो वो क्या करेगा..कोविड वैकेसीन बनाने में 37 चीजें काम आती हैं..अमेरिका ने ये भारत को देने से मना कर दिया कहा हम नहीं दे सकते..

उसके बाद मोदी जी ने बाइडेन को फोन लगाया.उससे बात की..बात क्या की गुजारिश ही की होगी..जब अपनी गर्ज होती है तो आदमी गुजारिश ही करता है..डांटा तो नहीं होगा..संकट की घड़ी में बाइडन को मनाने के लिए पूरी कूटनीतिक ताकत झोंकी गई होगी..तब जाकर बाइडन माना है..और कहा ठीक है कच्चा माल देंगे..ये सब क्यों हुआ क्या आप जानते हैं..मैं जानती हूं..और मैं आपको बताती हूं..देखिए भारत गांठ बांध ले..कि दूसरे देशों में कभी किसी को चुनाव ना लड़ाए..जो जीत जाए उसको बधाई दे दे..इससे देशों के रिश्ते बने रहते हैं..वो पाकिस्तान नहीं है..अमेरिका है..ठीक है..भारत में आपका चुनावी स्कोर ठीक है तो इसका मतबल ये नहीं कि आप किसी भी देश के चुनाव में झंडा बैनर लेकर आगे आगे चलने लगेंगे..

भारत देश के प्रधानमंत्री ने अमेरिका में खुलेआम ट्रंप के लिए रैलियां की..अबकी बार ट्रंप सरकार के नारे लगाकर आए..उसका खामियाजा अब देश को भुगतना पड़ रहा है..अमेरिका में ईवीएम से तो वोटिंग होती नहीं है..वहां वोट पड़ते हैं बैलेट से..जिसको मोदी जी जिता रहे थे वो सनकी ट्रंप जमीन चांट गया..बाइडेन की सरकार बन गई..बाईडन भी जानता है कि ये वही भारत है जो ट्रंप को जिता रहा था..अब वैक्सीन वाले कच्चे माल के लिए हमारे सामने हाथ फैला रहा है..हम भारत को क्यों दें वैक्सीन का कच्चा माल..

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और ऐसा भी नहीं है कि जिसको जिताने के लिए मोदी जी ट्रंप कार्यकर्ता बनकार अबकी बार ट्रंप सरकार का नारा लगाकर आए थे..वो बहुत सज्जन पुरुष था..वो एक नंबर का बेईमान दगाबाज एहसान फरामोश था..याद करिए पिछले साल कोरोना के समय़ भारत को ही आंखे दिखा रहा था..पिछले साल अमेरिका की हालत भारत से ज्यादा खराब थी..ट्रंप को किसी ने बता दिया कि ट्रंप भाई भारत के पास ऑक्सीक्लोरोक्यून की बहुत गोलियां रखी हैं..उससे कोरोना खत्म हो जाता है..ट्रंप ने कहा अरे भाई भारत उ गोली हमका दे दो..भारत कुछ ठीक से जवाब दे पाता कि ट्रंप दोबारा बोल दिया कि नहीं दोगे तो अंजाम ठीक नहीं होगा..भारत ने ट्रंप को गोलियां जहाज में लदवाकर भिजवाईं लेकिन अब जब भारत ने अमेरिका से टीका बनाने वाला कच्चा माल मांगा तो बाइडने सब खेल जानाता था उसको लगा अच्छा ये दो ट्रंप के दोस्त हैं..ट्रंप को चुनाव लड़ा रहे थे..अब ऊंट पहाड़ के नीचे आया है अब मुर्गा बनाते हैं..

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इसीलिए कहते हैं आप चुनाव वाले चचा अपने देश में बनिए किसी दूसरे देश में कार्यकर्ता बनकर प्रचार करेंगे तो खामियाजा हमारे देश को उठना पड़ता है…आपने चुनाव के चक्कर में ही अमेरिका से रिश्ते खराब कराए..आपने चुनाव के चक्कर में भारत को मौत के मुंह में झोंक दिया..याद रखिए आप प्रधानमंत्री हैं..आप रैलियों में कुर्सिंयां लगाते थे..ठीक है संघर्ष हर आदमी के जीवन में आता है..अब आगे बढ़िए आपको देश ने बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी है..देश चलाईये..प्रधानमंत्री बनिए..शांत मन से जब आप सोचेंगे तो आप पाएंगे कि मैं सच कह रही हूं..और गुड्डू बबलू ..छोट्टन टाइप के नेताओं को बुरा लग रहा होगा..तो बुरा लगे..क्यों देश की बेटी अपने देश के प्रधानमंत्री से बात कर रही है..उसे हक है..चलते हैं राम राम दुआ सलाम जय हिंद..

DISCLAMER- लेख में प्रस्तुत तथ्य/विचार लेखक के अपने हैं. किसी तथ्य के लिए ULTA CHASMA UC उत्तरदायी नहीं है. लेखक एक रिपोर्टर हैं. लेख में अपने समाजिक अनुभव से सीखे गए व्यहवार और लोक भाषा का इस्तेमाल किया है. लेखक का मक्सद किसी व्यक्ति समाज धर्म या सरकार की धवि को धूमिल करना नहीं है. लेख के माध्यम से समाज में सुधार और पारदर्शिता लाना है.