योगी राज में पुलिस (Police) थाने में डकैती सबका साथ..सबका विकास : संपादकीय व्यंग्य.

PRAGYA KA PANNA
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उत्तर प्रदेश के आगरा में एक थाना है नाम है जगदीशपुरा थाना..रात का समय था..थाने में तैनात पुलिस (Police) वाले भाईसाहब चाय पीने के लिए चले गए..थाना हो गया अकेला..बिल्कुल सुनसान बियाबान..वो थाना कम डाक बंगला ज्यादा बन गया..फिल्मों वाले डाक बंगले में फिर भी चौकीदार रहता है थाने में कोई नहीं था..बाकी के पुलिसवाले कहां गए थे..या फिर 25 लाख की डकैती का वही शुभ महूर्त निकाला गया था..ये बातें आगे बताएंगे..लेकिन कहानी आराम से सुनते चलिए..तो पुलिसवाले भाई साहब चाय पीने चले गये…थाने के मालखाने का दरवाजा तोड़कर डाकू लोग 25 लाख रूपए लूट ले गए..

हां उसी उत्तरप्रदेश में जहां के सारे गुंडे उत्तर प्रदेश छोड़कर जा चुके हैं..जब गुंडे जा चुके हैं तो अब पुलिस का जासूसी दिमाग चला..भाई लोगों ने कहा पता करो कौन कौन छोटा कर्मचारी है..कौन कौन आया है कौन कौन नहीं आया है..तो पता चला एक सफाई करने वाला दलित आदमी है अरुण..

वो दो दिन से नहीं आ रहा है..फिर क्या था अरुण के घर पर पुलिस (Police) ने छापा मार दिया..हां छापा मार दिया..नहीं वारंट वारंट का खेल बड़े लोगों के लिए होता है..वो माल्या टाइप आदमी जब पैसे लेकर भागता है तब होता है..एक तो छोटा आदमी और दूसरा दलित यहां छापा मारने के लिए वारंट की जरूरत नहीं होती ..बस आपके पास समय होना चाहिए..हां तो अरुण के घर छापा मार दिया..पुलिस कहती है कुछ कैश अरुण के घर से मिला है..

अब ये हुआ कि एक झाड़ू लगाने वाला आदमी जिसको समाज ने पहले ही दबाकर रखा है उसकी हिम्मत पुलिस के 25 लाख चुराने की कैसे हो गई..झाड़ू लगाने वाला इतना दिलेर तो नहीं हो सकता है..पुलिस थाने में चोरी बिना पुलिस की मदद के नहीं हो सकती..तो पुलिस (Police) वालों ने अरुण को पूछताछ के लिए अरुण को कानून के हवाले कर लिया..लेकिन कानून के हवाले में ही हट्टे कट्टे अरुण की मौत हो गई…हां मौत हो गई..आप समझे खेल..जिस अरुण के घर से कुछ कैश मिला..जिस अरुण को पुलिस चोर बता रही थी..वो मर गया..

अब कौन कौन पुलिसवाला 25 लाख रुपए डकारा है कोई नहीं जान पाएगा…थाने से 25 लाख चोरी करके अरुण स्वर्ग में पार्टी मनाएगा..और चोरी का मास्टर माइंड धरती लोक पर अपने तेज दिमाग की दाद देगा..आप देखिए झाडू लगाने वाला कितना तेज दिमाग है..कितना बड़ा खुफिया आदमी है..रॉ का सीक्रेट एंजेंट टाइप आदमी है कि पुलिस मालखाने में आज कितना माल रखी है..कब चुराना है उसको सब मालूम है..वो चोरी कर लेता है और मर जाता है..केस खतम पईसा हजम..

दोस्तों दलित सफाईकर्मी वरुण पुलिस कस्टडी में कैसे मर गया..ये सवाल है..थाने में चोरी कैसे हुई सवाल है..क्या चोरी बिना किसी पुलिसवाले की मदद के हो गई सवाल है..क्या अरुण का दिमाग पुलिस (Police) वालों से बहुत तेज चलता था सवाल है..अगर दलित सफाई वाला इतना तेज दिमाग था तो पैसे चुराकर अपने घर में ही क्यों रख लिया..और अगर इतना तेज दिमाग था कि अकेला थाना लूट सकता था तो पुलिस की नॉर्मल पूछताछा में ही कैसे मर गया..

है ना सवाल बहुत हैं…इन्हीं सवालों को और बड़ा करने पुलिस कस्टडी में मारे गए सफाई कर्मी अरुण के घर वालों से मिलने..प्रियंका गांधी आगरा जा रही थीं..लेकिन अभी रोका राकी का खेल चल रहा है..लेकिन वो प्रियंका हैं पहुंच जाएंगीं..तो दोस्तों ये है राम राज में पुलिस (Police) थानों की कहानी..ये एक अकेले थाने की कहानी नहीं है..यूपी में पुलिसवाले हत्या करके फरार हैं..फिरौती मांगकर फरार हैं..यूपी से सारे गुंडे तो भाग गए हैं..अब गुंडों की जगह खाली है..जब तक गुंडे लौटकर यूपी नहीं आते तब तक पुलिस को ही सब संभालना है..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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