मोदी (PM Modi) की माफी क्या जख्म पर काफी, जवाब देंगे किसान ?

तीन किसान कानून पर पीएम मोदी (PM Modi) ने माफी मांग ली है हा भई माफी नहीं सरकार ने घुटने टेक दिए कह रहे की किसान को समझा नहीं पाए और अब कानून वापस हा हा वहीं तीन कानून जिसे चीख चीख कर दुनिया में अपनी काबलियत साबित कर रहे थे वो वापस ले लेंगे..अभी कल तक आंदोलनजीवी , खालिस्तानी , मवाली जाने क्या क्या ठहराए रहे थे अब कह रहे की तपस्या में कमी रह गई ..जो सरकार बड़े बड़े फैसले लेती है 56 इंच का सीना रखती है कभी कदम पीछे नहीं हटाती उसे इतने लंबे समय बाद अब पता चला की गलती हो गई माफी मांगकर कानून वापस ले लाना चाहिए ….

वैसे तो पीएम मोदी (PM Modi) को जब बड़ा एलान करना होता है देशवासियों से प्राइम टाइम में गोदी मीडिया की टीआरपी के हिसाब से रात 8 बजे आते है लेकिन माफी के लिए शाम तक का इंतजार मोदी जी कहा कर पाए खुद प्रधानमंत्री को देश के सामने आए हाथ जोड़कर विनम्र माफी मांगी..17 सितंबर 2020 को पास हुए इस कानून का शुरु से देशभर के किसान विरोध कर रहे थे लेकिन कमल छाप सरकार खुद को किसान हितैषी होने का दावा करते हुए इन तीन कानूनों को गेम चेंजर बताने पर तुली रही किसान राज्यों में प्रदर्शन करते रहे दिल्ली में आकर ठंडी गर्मी बरसात सहते रहे लेकिन सरकार ना तो सुन रही थी ना ही समझने को तैयार थी .,,

खास बात ये भी है कि गोदी मीडिया भी किसानों के इस संघर्ष के कनाडा लिंक , खालिस्तान से संबंध तलाशती रही ढूंढ ढूंढ के बयानों के वीडियो स्टिंग ऑपरेशन सामने लाकर किसानों को कमजोर करने की कवायत होती रही लेकिन सब फेल हो गई और 18 मिनट के अपने देश के नाम संबोधन में 19 नवंबर को कानून वापस लेने का वो एलान किया जो चुनावी है मजबूरी है या खीरी कांड के बाद बिगड़ी हवा का असर ये गोदी मीडिया और सरकार के मुलाजिम समझे लेकिन किसानों को बदनाम करने वाले गोदी मीडिया उनके तीस मार खां अब मुंह छिपाए फिर रहे ..पीएम मोदी (PM Modi) कह रहे कि सरकार ये कानून किसानों के हित में नेक नीयत से लाई थी लेकिन कुछ किसानों को समझाने में नाकाम रहे ..

अब उनके लिए कुछ किसानो का मतलब क्या है किस कितना समझाया गया किस तरह से समझाया गया कितनी बार बात करने की कोशिश की गई ये तो सबको पता और पता ये भी है कि पार्टी के बड़े नेताओं से लेकर छुटभैया नेताओं ने किसानों के लिए क्या क्या नहीं कहा..लेकिन बारी 5 राज्यों में चुनाव की है नाव फंसती नजर आई अन्नदाता आंदोलन से हटता नजर नहीं आया तो प्रकाश पर्व पर परम सम्मानित पीएम मोदी (PM Modi) देश से माफी मांगने लगे ..माफी गोदी मीडिया कब मांगेगी खीरी में जिन किसानों ने जान गंवाई उसकी भरपाई कैसे होगी ये भी पीएम बताते तो बेहतर होता..

56 इंच का सीना रखने वाले (PM Modi) अगर 56 सेंकेंड भी किसानों से बात कर लेते तो देश में ये महाभारत ना होती लेकिन एंठन ऐसी थी कि किसान कहते रहे कि मंडीं में कीमत का.. खेती में गुलामी का.. सवाल होगा ..छोटे किसान क्या करेंगे …पर सरकार तो महारथियों अर्थशास्त्रियों से बनवाया हुआ अलादीन के चिराग से निकला कानून साबित करती रही जिसका जिन्न ना तो एमएसपी की गुत्थी सुलझा पाया ना किसानों को सुनहरे सपने का दीदार ..तो जब सारी कोशिश हो गई टायं टायं फिस्स तीन कानून फुस्स पटाखा लगने लगे 5 राज्यों के चुनाव के नतीजे कठिन और बहुत कठिन लगने लगे तो फार्मूला वापसी वाला ही सूझा और सुकुन की बात बस इतनी सी है कि खेतों में काम करने वाला पिछले कई महीनों से आंदोलन में खट रहा किसान अब कानून वापसी के बाद घर लौटेगा..खेतों में लौटेगा ..

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