रोहतांग में ‘अटल टनल’ का उद्घाटन, PM मोदी ने जवानों, मजदूरों और इंजीनियरों को किया प्रणाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोहतांग में करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी अटल टनल का उद्घाटन किया. ये दुनिया की सबसे लंबी टनल है. इसकी लंबाई 9.2 किमी है और इसे बनाने में 10 साल का वक्त लगा है.

pm modi inaugurates worlds longest high altitude atal tunnel
pm modi inaugurates worlds longest high altitude atal tunnel

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है. ये अटल का सपना ही नहीं, हिमाचल और देश के लोगों के दशकों का इंतजार खत्म हुआ है. इसका लोकार्पण मेरा सौभाग्य का काम है. जब संगठन का काम देखता था तो अटल जी यहां आते थे. एक दिन मैं और धूमल जी इस बात को लेकर उनके पास गए थे. तभी हमारा सुझाव अटल जी का सपना बन गया. हम इसे समृद्धि के रूप में देख रहे हैं.

लोकार्पण की चकाचौंध में वे लोग पीछे रह जाते हैं जिनकी मेहनत से ये पूरा होता है. उनकी मेहनत से इस संकल्प को आज पूरा किया गया है. इस महायज्ञ में पसीना बहाने वाले, जान जोखिम में डालने वाले मेहनतकश जवानों, मजदूर भाई-बहनों और इंजीनियरों को मैं प्रणाम करता हूं. ये टनल भारत के बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी नई ताकत देने वाली है. हिमालय का ये हिस्सा हो, पश्चिम भारत में रेगिस्तान का विस्तार हो या फिर दक्षिण और पूर्वी भारत का तटीय इलाका, हमेशा से यहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की मांग उठती रही है.

लेकिन लंबे समय से बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट या तो प्लानिंग के लेवल से ही नहीं निकल पाए या फिर अटक गए, लटक गए या भटक गए. ये सुरंग लाहुल के लोगों सहित सेना को भी बल देगी. सेना की लेह लद्दाख में सीमा तक पहुंच आसान होगी. पीएम मोदी ने लाहुल स्‍पीति जिला में टनल के दूसरे छोर नार्थ पोर्टल पर पहुंच कर बस को हरी झंडी दी. इस बस में लाहुल के बुजुर्गों ने सफर किया.

पीएम मोदी ने बीआरओ को सुझाव दिया 1500 ऐसे लोग चिह्नित करें, जाे अपना अनुभव लिखें. इसमें मजदूरों व इंजीनियरों को शामिल करें. शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया कि तकनीकी शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों से केस स्टडी करवाएं. दुनिया को हमारी इस ताकत का ज्ञान होना चाहिए. यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अटल की सरकार जाने के बाद इस काम को भुला दिया गया. जिस रफ्तार से सुरंग का काम उस समय हो रहा था, उस हिसाब से ये 2040 में पूरी होती.

इस सुरंग से क्या होंगे फायदे-

ये टनल इस पूरे क्षेत्र के युवाओं को रोज़गार के अनेक अवसरों से जोड़ने वाली है. कोई होम स्टे चलाएगा, कोई गेस्ट हाउस, कोई ढाबा, कोई दुकान करेगा तो वहीं अनेक साथियों को गाइड के रूप में भी रोज़गार उपलब्ध होगा. टनल से मनाली और लाहौल-स्पीति घाटी 12 महीने जुड़े रहेंगे. भारी बर्फबारी की वजह से इस घाटी का छह महीने तक संपर्क टूट जाता है. टनल का साउथ पोर्टल मनाली से 25 किमी है. वहीं, नॉर्थ पोर्टल लाहौल घाटी में सिसु के तेलिंग गांव के नजदीक है. टनल से गुजरते वक्त ऐसा लगेगा कि सीधी-सपाट सड़क पर चले जा रहे हैं, लेकिन टनल के एक हिस्से और दूसरे में 60 मीटर ऊंचाई का फर्क है. साउथ पोर्टल समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जबकि नॉर्थ पोर्टल 3060 मीटर ऊंचा है.

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