गम में डूबा देश पॉजिटिव बातें कैसे करे ? : संपादकीय

  किसानों को दो हजार की चेक देने टीवी पर आए प्रधानमंत्री जी ने बिल्कुल सही कहा भारत हिम्मत हारने वाला देश नहीं हैं..अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं थी आप रैलियां करके हार गए थे..देश अपने सिलेंडर लेकर लाइन में खड़ा रहा कभी हिम्मत हारी..एंबुलेंस नहीं थीं..देश ने ईरिक्शा और कार की छत पर लाशें लाद ली कभी हिम्मत हारी..लाशें जलाने के लिए लाइन में खड़ा रहा कभी हिम्मत हारी..जिनकी लाशें नहीं जल पाईं….उन्होंने गंगा कि किनारे रेत में दबा दीं..क्या कभी हिम्मत हारी..जिनकी लाशें गंगा की रेत में भी नहीं दब पाईं उन्होंन अपनी लाशें गंगा में बहा दीं..कभी हिम्मत हारी..आप भरोसा रखिए गलियों में डेडबॉडी फेकी जाने लगेंगीं तब भी कोई हिम्मत नहीं हारेंगे..देश सब कुछ हार चुका है..अब बस हिम्मत ही बची है..  

 पत्रकारिता से स्कूल में मुझे पढ़ाया गया था कि खबर बताते समय खुद को हमेशा उससे अलग रखना..अपने ऊपर इमोशन हावी नहीं होने देना..आदमी मरा पड़ा हो तो दुखी मत होना.. सिर्फ ये बताना वो क्यों मरा कहां मरा कैसे मरा..5w 1h का पालन करना लेकिन दोस्तों मैं आपकी पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा..पत्रकारिता के इस नियम में फिट नहीं बैठ पाई..देश के दुख में दुखी हो जाती हूं..लाशें देखकर द्रवित हो जाती हूं….पत्रकारिता की रूल बुक से हिसाब से मैं निष्ठुर नहीं हूं..इसलिए कभी लोगों की परेशानियां देखकर गुस्सा चेहरे पर दिख जाए तो माफ कीजिएगा..

किसानों को दो हजार की चेक देने टीवी पर आए प्रधानमंत्री जी ने बिल्कुल सही कहा भारत हिम्मत हारने वाला देश नहीं हैं..अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं थी आप रैलियां करके हार गए थे..देश अपने सिलेंडर लेकर लाइन में खड़ा रहा कभी हिम्मत हारी..एंबुलेंस नहीं थीं..देश ने ईरिक्शा और कार की छत पर लाशें लाद ली कभी हिम्मत हारी..लाशें जलाने के लिए लाइन में खड़ा रहा कभी हिम्मत हारी..जिनकी लाशें नहीं जल पाईं….

उन्होंने गंगा कि किनारे रेत में दबा दीं..क्या कभी हिम्मत हारी..जिनकी लाशें गंगा की रेत में भी नहीं दब पाईं उन्होंन अपनी लाशें गंगा में बहा दीं..कभी हिम्मत हारी..आप भरोसा रखिए गलियों में डेडबॉडी फेकी जाने लगेंगीं तब भी कोई हिम्मत नहीं हारेंगे..देश सब कुछ हार चुका है..अब बस हिम्मत ही बची है..

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   दोस्तों चलिए आज की खबर बताने का काम शुरू करते हैं.. कोरोना के भयानक अंधेरे के बीच मोदी जी किसानों को दो-दो हजार रूपए बांटने आए थे..लोग उम्मीद लगाए हुए बैठे थे कि देश के प्रधानमंत्री आएंगे तो बताएंगे कि सबको वैक्सीन क्यों नहीं लग पा रही है..कब तक टीके आ जाएंगे..गंगा की लाशों पर कुछ बोलेंगें..बालू में दबी लाशों पर भी बोलेंगे..गांवों में मातम पसरा है उस पर बोलेंगे..अस्पतालों में ऑक्सीजन दवाई इलाज पर भी कुछ बोलेंगे..कोरोना महामारी के बीच सेंट्रल विस्टा में उनका अपना घर बन रहा है पर भी कुछ देश को कुछ बताएंगे..

लेकिन मोदी जी जब आए तो लौकी तरोई पालक कैसे उगाई जा रही है..और कैसे उगाई जानी चाहिए..इस पर चौपाल लगाई और कोरोना पर नैतिक शिक्षा का थोड़ा ज्ञान देकर चले गए..प्रधानमंत्री जी की खासियत है कि वो समस्याओं पर बात नहीं करते..किसानों से भी किसी समस्या पर बात नहीं की..उनकी सक्सेज स्टोरी सुनी..कोरोना को छोड़कर पॉजिटिव शब्द में कोई बुराई नहीं है..पॉजिटिविटी सबको अच्छी लगती है..मोदी जी भी निगेटिव हो चुके देश में पॉजिटिविटी से सराबोर रहे..जितने किसान कैमरों पर थे सब के सब खुशहाल थे..तो फिर देश के वो रोते हुए कौन से किसान हैं.. जो आत्महत्या कर लेते हैं..

बबूल के आम के नीम के पेड़ से लटक जाते हैं..कैमरों के सामने तो लोन लेने वाले किसान भी खुश हैं और आलू उगाने वाले भी..सरकार को चाहिए की आत्महत्या करने वाले कैटिगरी के किसानों को भी ऑनलाइन बैठाएं..कभी उनसे भी संवाद करे..खैर समय निगेटिव हो जाने का है..निगेटिव बातें कहने का नहीं है…आपको निगेटिव रहना चाहिए और पॉजिटिव सोचना चाहिए..तो रो तो पूरा देश रहा है…चलते हैं राम राम दुआ सलाम..

DISCLAMER- लेख में प्रस्तुत तथ्य/विचार लेखक के अपने हैं. किसी तथ्य के लिए ULTA CHASMA UC उत्तरदायी नहीं है. लेखक एक रिपोर्टर हैं. लेख में अपने समाजिक अनुभव से सीखे गए व्यहवार और लोक भाषा का इस्तेमाल किया है. लेखक का मक्सद किसी व्यक्ति समाज धर्म या सरकार की धवि को धूमिल करना नहीं है. लेख के माध्यम से समाज में सुधार और पारदर्शिता लाना है.

https://www.youtube.com/watch?v=LMFIXKdcBuE

2 thoughts on “गम में डूबा देश पॉजिटिव बातें कैसे करे ? : संपादकीय

  • May 30, 2021 at 2:10 pm
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    देश का दुर्भाग्य कहूँ या लोगो की बुरी किस्मत,,,,, पॉजिटिव होने की बात वो कर रहे है जिनकी खुद की मानसिकता नेगेटिव है,,,,

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    • May 30, 2021 at 3:57 pm
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      आपकी बेशकीमती राय के लिए शुक्रिया..हम चाहते हैं आप हमारे नियमित पाठक बनें..

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