संसद(Parliament) में बीजेपी की चोरी रंगे हाथ पकड़ी गई: संपादकीय व्यंग्य

PRAGYA KA PANNA
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संसद (Parliament) में पक्षपात की ये तस्वीर हम नई पीढ़ी के पत्रकारों को हैरान भी करती है..और देश में कैसे पक्षपात होता होगा..ये भी बताती है..

जैसे हम लोग बचपन में करते थे..खेल कोई भी हो फैसला अपने हक में चाहते थे..वही लोकतंत्र के मंदिर राज्य सभा में हुआ.बच्चों से भी ज्यादा बचकाना..और शातिराना..हुआ ये कि राज्य सभा में संविधानस संशोधन बिल पेश किया गया..उपभापति ने कहा कितने लोग इस बिल के पक्ष में हैं मुंह से आवाज निकालकर बताएं..कम लोगों की आवाज आई..फिर पूछा कितने लोग इस बिल को लाने का विरोध करते हैं..चलिए मुंह से आवाज निकालिए..बहुत सारे लोगों ने कहा ये पेश नहीं किया जाना चाहिए..

इस बिल को जोरदार आवाज के साथ सदस्यों ने नकार दिया लेकिन फिर भी उपसभापति हरिवंश जी ने बिल पेश करने की इजाजत दे दी..बोले मेरे ख्याल से बिल के फेवर में ज्यादा लोगों ने आवाज उठाई है…दोस्तों पुराणों में इसी को पक्षपात कहा गया है..

बात इसकी नहीं है कि संविधान की प्रस्तवावना से सेक्युलर और समाजवादी शब्द हटाने के लिए ये बिल क्यों लाया जा रहा है..बीजेपी ऐसा करेगी ही उनकी पार्टी की लाइन ही यही है..सवाल ये है कि जब राज्यसभा में ज्यादा लोग इस बिल के खिलाफ थे तो उपसभापति महोदय ने कैसे बड़ी चालाकी से ना हो हां बता दिया..सरकार तो आध्यादेश के जरिए किसान कानून की तरह कोई भी कानून कभी भी थोप सकती है..बीजेपी के पास राज्यसभा लोकसभा दोनों जगह बहुमत है..सरकार को संसद का डर नहीं है..

सरकार सड़क से डरती है..किसानों ने सड़क पर डटकर सरकार को घुटनों पर लाकर इसका उदाहरण दिया है…किसी ने बहुत अच्छा कहा है कि जब सड़कें खामोश हो जाती हैं..तो संसद आवारा हो जाती है..किसानों ने सड़कों पर हुंकार भरी और संसद को लाइन पर लगा दिया..जिस संसद से तीन कानून लाए गए थे उसी संसद (Parliament) को तीन कानून वापस करने पड़े.. दोस्तों मैं कभी संसद नहीं गई..लेकिन संसद के इस वीडियो ने मन को दुखी कर दिया है..सवा सौ करोड़ आबादी के सामने कैमरों पर पक्षपात हो रहा है तो फिर उन जगहों पर क्या होता होगा..जहां कैमरे नहीं हैं..

खैर दोस्तों.. संविधान से सक्युलर और समाजवादी शब्द हटाने का बिल संविधान से जुड़ा प्राइवेट बिल था…सदन (Parliament) में पेश करने से पहले इस पर राष्ट्रपति के दस्तखत होने जरूरी होने होते हैं..जो कि थे नहीं..बिल पेश किया था बीजेपी के सांसद अल्फोंस ने..विपक्ष ने विरोध किया..उपसभापति महोदय को नियम कानून बताए..हंगामा किया..राजद नेता मनोज झा ने कहा ये संविधान की आत्मा पर चोट है..संसदीय परंपरा को कलंकित किया जा रहा है..बिल को रिजर्व रख लिया गया..

जिसकी लाठी उसकी भैंस..दोस्तों भारत की संसद का ये हाल है..जहां कानून बनते हैं..जरा सोचिए उस समाज का क्या होगा..जिस समाज पर यहां बने हुए..रेडीमेड कानून लागू होते हैं..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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