लखनऊ में मरीज को बेड न मिलने पर एक दर्दनाक घटना..

लखनऊ में कोरोना दिन पर दिन और भयानक रूप लेता जा रहा है. प्रशासन भी कमियों को पूरा नहीं कर पा रहा है. मरीजों को भर्ती करने के लिए अस्पतालों में बेड नहीं हैं. मरीज अपने घर पर या रास्ते में ही दम तोड़े दे रहे हैं. ऐसी ही एक दर्द भरी घटना हम आपको बताने जा रहे हैं.

painful incident corona patient in Lucknow

भैया पापा नही है और मम्मी को खोना नही चाहते

पत्रकार निखिल शाहू के पास एक अनजान फोन आता है उधर से एक लड़की हेल्लो बोलने के बाद सीधे ये बोलती है… ” भैया पापा नही है और मम्मी को खोना नही चाहते” तो निखिल शाहू ने उनसे पूछा कि क्या हुआ ये तो बताओ ? सामने से लड़की बोलती है: भैया मम्मी को कोरोना हुआ है सांस लेने में दिक्कत हो रही है.. अस्पताल में भर्ती नहीं ले रहे हैं. तो निखिल शाहू ने कहा- बाबू बेड नही है फिर भी कोशिश करता हूँ.

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थोड़ी देर बाद उसी लड़की का फोन आता है और वो कहती है- भैया हम अनाथ हो गए. ये शब्द सुन कर किसी के भी आंख में आंसू आ जाए. निखिल शाहू ने उनसे कहा- दीदी कसम से खुद पर इतना रोना आ रहा है कि बता नही सकता, लाख कोशिश, सोर्स लगाने के बाद भी बेड नही दिलवा पा रहा हूँ. खुद से बहुत शर्मिंदा हूं. मुझे माफ करना बहन.

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सरकार ने सिर्फ बातें ही कि हैं

इससे आप समझ लीजिये की लखनऊ में क्या स्थिति है. कोरोना को फैले हुए 1 साल से ज्यादा हो चुका है और सरकार ने सिर्फ बातें ही कि हैं अस्पतालों में मरीज को भर्ती करने के लिए बेड नहीं हैं. ना ही कोई विशेष सुविधा दी गई है. न मरीजों के पास टाइम पर एम्बुलेंस पहुँच रही है. जब तक एम्बुलेंस पहुँचती है तबतक मरीज की मौत हो जाती है.

ऐसी बदहाल और भयानक स्थिति देख कर आप क्या कहेंगे. अस्पतालों में मरीजों के लिए सुविधाएं दी जाती तो ऐसे हालात न बनते. सरकार ने बजट में चिकित्सा के नाम पर कई सौ करोड़ रुपये खर्च किये वो पैसा कहां लगा. दुःख है लखनऊ की ऐसी हालत देख कर. लखनऊ में रविवार को कोरोना के 4444 केस मिले हैं. और 31 लोगों की मौत हुई है. आगे ये और भी बढ़ने वाले हैं.