राजभर (Rajbhar) सपा के साथ आए..ओवैसी का क्या होगा ?: संपादकीय व्यंग्य.

PRAGYA KA PANNA
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नमस्कार दोस्तों यूपी में विधानसभा चुनावों से पहले फाइनल खबर आ गई है कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी मतलब ओम प्रकाश राजभर (Rajbhar) की पार्टी का और समाजवादी पार्टी का गठबंधन हो गया है…तो अब ये तय हो गया कि ओम प्रकाश राजभर सपा के साथ 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे..राजभर अखिलेश यादव के साथ मीटिंग करने गए थे..वैसे तो सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव से कोई मिलने जाता है तो मोबाइल वोबाइल ले जाने की परमीशन नहीं रहती है..लेकिन ओम प्रकाश राजभर और अखिलेश के बीच मीटिंग का वीडियो भी शूट हुआ..उसमें म्यूजिक व्यूजिक लगाया गया और राजभर जी के ट्वविटर अकाउंट से रिलीज किया गया..ठीक ही है कि सबूतों और गवाहों के साथ गठबंधन हों..क्योंकि अखिलेश संजय निषाद से एक बार धोखा खा चुके हैं..सपा और सुभाषपा दोनों पार्टियां गठबंधन का शक्तिप्रदर्शन बहुत जल्दी चाहती हैं..इसीलिए खबर आई है कि 27 तारीख को मऊ के हलधर मैदान में रैली भी होने जा रही है..
अब बहुत लोग सवाल कर रहे हैं कि राजभर के भागीदारी संकल्प मोर्चा का क्या होगा?
ओवैसी का क्या होगा ?

दोस्तों ओवैसी और अखिलेश कभी भी चुनावी छतरी के नीचे एक साथ नहीं आ सकते..क्योंकि ओवैसी की पार्टी अभी यूपी में इतनी बड़ी है नहीं कि अखिलेश उनसे गठबंधन की बारगेनिंग करें..दूसरा सपा और ओवैसी का वोटबैंक भी एक ही है..तीसरा जिन ओवैसी पर बीजेपी की बी टीम होने का आरोप लगता है उनको सपा अपने साथ कैसे रखे..तो कुल मिलाकर बात ये है कि ओवैसी को छोड़कर संकल्प भागीदारी मोर्चा के भीतर जितनी भी छोटी छोटी जातियों वाली पार्टियां हैं वो सब राजभर (Rajbhar) के साथ सपा के गठबंधन में आएंग समाजवादी पार्टी इस बार किसी बड़े दल से गठबंधन नहीं करेगी..लेकिन कुछ तो करना पड़ेगा इसलिए गठबंधन का पर्यायवाची एडजस्मेंट खोजा गया है..2022 के चुनाव में आपको बहुत से एडजस्टमेंट देखने को मिलेंगे..प्रियंका गांधी ने इस बार 40 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देने की घोषणा कर दी है..ये भी दूर की कौड़ी है इसको आगे कभी आराम से समझाऊंगी..

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2022 कौन जीतेगा इससे भी बड़ा सवाल ये था कि राजभर (Rajbhar) किधर जाएंगे..अब राजभर तो फाइनली सपा के साथ गठबंधन में चले गए हैं..लेकिन राजनीति में आना जाना..बनना बनना सब नफा नुकसान के तराजू पर तोलकर ही होता है..तो सीधा सवाल ये है कि राजभर को सपा के साथ गठबंधन करके क्या मिलेगा..तो उसका जवाब है..सम्मान और पूर्वांचल में मर्जी के मुताबिक सीटें..सरकार बनने पर ढंग का विभाग..और जातिगत जनगड़ना समेत दूसरी मांगे मानी जाएंगी..अब दूसरा सवाल ये है कि सपा को क्या मिलेगा..तो दूसरे सवाल का जवाब है पूर्वांचल की सीटों पर गैर यादव पिछड़ों का साथ मिलेगा.. पूर्वांचल में 18-22% राजभर वोट हैं..जिनका प्रभाव 150 से ज्यादा सीटों पर है..जिनमें..वाराणसी मंडल, देवीपाटन मंडल, गोरखपुर मंडल, आजमगढ़ मंडल की विधानसभाएं हैं..राजभर के अलावा सुभाषपा के साथ बंसी, आरख, अर्कवंशी, खरवार, कश्यप, पाल, प्रजापति, बिन्द, बंजारा, बारी, बियार, विश्वकर्मा, नाई और पासवान जैसी जातियों का समर्थन है..

सवाल भी है कि क्या राजभर (Rajbhar) बीजेपी को नुकसान पहुंचाएंगे..तो इसका जवाब है..राजभर बीजेपी को जितना नुकसान पहुंचा सकते हैं उससे ज्यादा पहुंचाएंगे…क्योंकि राजभर की दुश्मनी बीजेपी से नहीं है..राजभर की दुश्मनी योगी से है..राजभर योगी की सरकार में मंत्री थे..और बेइज्जती का घूंट पीने के बाद मंत्री पद छोड़ दिया था..समझ सकते हैं..आप यहां लोगों को पद मिलता नहीं हैं..लोग एमएलसी बनने के लिए मरे जाते हैं..राजभर ने मंत्री पद छोड़ दिया..सोचिए उनकी अपने मुख्यमंत्री से किस तरह की मित्रता होगी..तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि राजभर बीजेपी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे..कितना पहुंचाएंगे ये 2022 का रिजल्ट बताएगा..चलते हैं ..राजनीतिक एनालिसेस का सेगमेंट ऐसे ही चलता रहेगा..इधर उधर की बतोलेबाजी चलती रहेगी..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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