क्या होती है क्यूरेटिव पिटीशन ? निर्भया के दोषी ने सुप्रीम कोर्ट में की है दायर, इसमें क्या होगा ?

निर्भया कांड के दोषियों के खिलाफ 7 जनवरी को ही डेथ वारंट जारी हुआ है और आज एक दोषी विनय कुमार शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर की है. अब सवाल ये उठ रहा है की क्या अब फांसी रुक जाएगी ? तो पहले आप जान लीजिये की क्यूरेटिव पिटीशन क्या है.

nirbhaya gangrape murder case culprit vinay sharma filed curative petition
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क्यूरेटिव पिटीशन क्या है

क्यूरेटिव पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में लगाई जाती है. इसमें कोर्ट ने जो सज़ा तय की है उसमें कमी के लिए रिक्वेस्ट की जाती है. यानी फांसी की सज़ा उम्रकैद में बदल सकती है. ये विकल्प इसलिये होता है ताकि न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग न हो सके. क्यूरेटिव पिटीशन दोषी के पास मौजूद अंतिम मौका होता है. क्यूरेटिव पिटीशन किसी भी मामले में कोर्ट में सुनवाई का अंतिम चरण होता है. इसमें फैसला आने के बाद दोषी किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता नहीं ले सकता है.

क्या हैं क्यूरेटिव पिटीशन के नियम

क्यूरेटिव पिटीशन दायर करते समय याचिकाकर्ता को ये बताना जरूरी होता है कि आखिर वो किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दे रहा है. क्यूरेटिव पिटीशन किसी वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा सर्टिफाइड होना जरूरी होता है. क्यूरेटिव पिटीशन को कोर्ट के तीन सबसे सीनियर जजों के पास भेजा जाता है, उनका फैसला अंतिम होता है. क्यूरेटिव पिटीशन पर फैसला आने के बाद अपील के सारे रास्ते खत्म हो जाते हैं.

अगर बेंच के अधिकतर जज इस बात से सहमति जताते हैं कि मामले की दोबारा सुनवाई होनी चाहिए तब क्यूरेटिव पिटीशन को दोबारा उन्हीं जजों के पास भेज दिया जाता है. बतादें कि दोषी विनय कुमार शर्मा द्वारा दायर क्यूरेटिव पिटीशन याचिका लंबित रहने तक डेथ वारंट पर रोक लगी रहेगी.

7 साल बाद 7 जनवरी को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया कांड के दोषियों का डेथ वारंट जारी कर दिया है. दुष्कर्मियों के पास सिर्फ 14 दिन का ही समय बचा है. दोषियों की गर्दन अब फांसी के फंदे से ज्यादा दूर नहीं है. 22 जनवरी की तारीख फांसी के लिए तय कर दी है. फांसी का समय सुबह सात बजे तय किया गया है. चारो दोषियों को फांसी दिल्‍ली के तिहाड़ जेल में दी जाएगी.

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में निर्भया के साथ दुष्कर्म हुआ था. 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा के साथ चलती बस में गैंगरेप हुआ था और आरोपियों ने उसके साथ बहुत ही दर्दनाक और शर्मनाक सुलूक किया था. छात्रा ने 29 दिसंबर 2012 को दम तोड़ दिया था. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मुकेश, पवन, विनय और अक्षय को फांसी की सजा सुनाई थी.

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