निर्भया केस: जारी होगा तीसरा डेथ वारंट, लेकिन मार्च तक खिंच सकता है मामला ?, अभी बचे हैं ये विकल्प-

फांसी की सजा होने के बाद भी निर्भया के दोषी बचते जा रहे हैं. दो बार फांसी की तारीखों का ऐलान हुआ और आखिर में फांसी टाल दी गई. अब सुप्रीम कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी करने के लिए हरी झंडी दे दी है.

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अब तीसरी बार डेथ वारंट जारी किया जायेगा. सबसे पहले 22 जनवरी को फांसी दी जानी थी. फिर 1 फ़रवरी को फांसी दी जानी थी. लेकिन दुष्कर्मियों के बचाव के लिए इतने नियम हैं कि 1 फ़रवरी को भी फांसी टाल दी गई. अब जल्द ही नई तारीख का ऐलान होगा. लेकिन लगता नहीं है कि इस महीने भी दोषियों को फांसी हो पायेगी. आइये समझते हैं गणित-

दरअसल निर्भया के चारों दोषियों को अलग-अलग फांसी देने के लिए केंद्र सरकार दिल्ली हाईकोर्ट गई थी लेकिन कोर्ट ने साफ इनकार कर दिया. कोर्ट ने दोषियों से कहा है कि वे सात दिन के अंदर अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करें. चारों दोषियों को एक साथ फांसी दी जाएगी. फिर केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए नया डेथ वारंट जारी करने के लिए हरी झंडी दे दी है. कोर्ट ने आदेश में कहा है कि तिहाड़ प्रशासन अब फांसी की नई तारीख जारी करवाने के लिए सत्र अदालत में याचिका डाल सकता है. साथ ही अदालत ने चारों दोषियों को नोटिस जारी करते हुए उनकी अलग-अलग फांसी का मामला अपने पास स्थगित रखा है. अब इस पर कल 13 फरवरी को अगली सुनवाई होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कहा है कि फांसी तब तक नहीं होगी, जब तक दुष्कर्मी अपने सभी विकल्प न आजमा लें. इस बारे में उन्हें किसी समय सीमा में नहीं बांधा गया है. फांसी ऐसी सजा है, जिसे देकर दोषी को वापस नहीं लाया जा सकता है. इसलिए इसमें इंतजार करना जरूरी है और जल्दबाजी से इसमें परहेज किया जाता है.

अब समझते हैं दोषियों के क़ानूनी विकल्पों के बारे में-

निर्भया के दोषी विनय शर्मा ने राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डाली है. उसने अपनी याचिका में दावा किया है कि उसे मानसिक और व्यावहारिक समस्याएं हैं. उसे डिप्रेशन और एडजस्टमेंट डिसऑर्डर की समस्या है. उसने शत्रुघ्न चौहान केस का हवाला देते हुए कहा कि इसमें भी दोषी को अगर मानसिक समस्या है तो उसे फांसी नहीं दी जा सकती है. उसने ये भी दावा किया कि उसके एकांत कारावास में भी रखा गया. अगर विनय की ये याचिका खारिज हो जाती है तो उसके सभी कानूनी विकल्प खत्म हो जाएंगे. इसके बाद विनय को फांसी होना तय है.

चारों दोषियों में से सिर्फ एक मुकेश ही है जो सभी क़ानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर चुका है. वहीं दूसरी तरफ पवन ने अभी तक न तो सुधारात्मक और न ही दया याचिका ही दी है. अब अगर पवन क्यूरेटिव याचिका दायर करता है तो उसपर फैसला आने में एक दो दिन लगेंगे और क्यूरेटिव याचिका ख़ारिज होने के बाद उसे सात दिन और मिलेंगे. फिर उसके पार राष्ट्रपति के पास जाने का विकल्प मौजूद होगा. इसमें भी दो दिन लग सकते हैं. दया याचिका खारिज होने के बाद उसे फिर सात दिन मिलेंगे.

इसके अलावा चौथे दुष्कर्मी अक्षय कुमार ठाकुर ने राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दायर की थी. राष्ट्रपति ने अक्षय की दया याचिका खारिज कर दी थी. अब सवाल ये है कि क्या नया डेथ वारंट जारी होने के बाद इस बार सभी को फांसी दे दी जाएगी या फिर इसपर रोक लग सकती है ?

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