अस्पताल की जगह श्मसान बनाया । सरकार की सोच देखिए..

मैडम ने मुर्दाघर बनवा दिया है..आपकी कोरोना जांच न हो..अब अस्पताल में बेड ना मिले..तो आप आराम से मर सकते हैं..मरने के बाद मरीजों को जलाने के लिए वेट नहीं करना पड़ेगा..मुर्दाघरों के बारह मुर्दों की लाइन लग रही थी सरकार की बदनामी हो रही थी..

Mortuary built in lucknow Replaced hospitals PRAGYA KA PANNA

यूपी सरकार ने चुना दूसरा ऑप्शन

नमस्कार मेरा नाम प्रज्ञा मिश्रा है..दोस्तों अस्पतालों में मरीजों के लिए जगह नहीं है..और श्मसान में मुर्दों के लिए..स्पेस दोनों जगह फुल है..हाहाकार मचा हुआ है..मुर्दा घाटों पर लाशें जलाने के लिए 12-12 घंटों की वेटिंग है..अब सरकार के सामने दो ऑप्शन थे..पहला ऑप्शन अस्पतालों में बेड बढ़ाए जाएं..दूसरा ऑप्शन मुर्दाघरों की संख्या बढ़ाई जाए..यूपी सरकार ने दूसरा ऑप्शन चुना है..लखनऊ की मेयर संयुक्ता भाटिया ने मुर्दाघर का लोकार्पण करना अपनी पहली जिम्मेदारी समझा है..ठीक ही है..जान ना बचा पाओ कोई बात नहीं..कोरोना का टेस्ट ना करा पाओ कोई बात नहीं..मुर्दे के जलने में देरी होगी.. तो कोरोना से मरी हुई आत्मा को तकलीफ हो सकती थी..

ये हताषा का विषय है

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जिस समय लखनऊ में कोरोना से हाहाकार मचा हुआ है उस समय अस्पताल की जगह मुर्दाघरों के लोकार्पण हो रहे हैं..आप एक बार सोचकर देखिए जिस समय लोग तड़प तड़प कर मर रहे हों उस समय मुर्दाघर के लोकार्पण की तस्वीरें डालकर मुर्दाघरों पर गर्व करना सरकार की किस मनोदशा को दर्शाता है..चलिए आपने बनाया है…ठीक है..बना तो दिया ही है..कोरोना महामारी से घबराकर शहर में मुर्दाघरों की संख्या बढ़ा देना..हर्ष का विषय नहीं है..ये हताषा का विषय है..मुर्दाघर बनाकर आपने वर्ड रिकॉर्ड नहीं बना दिया है. इतना डंका पीटने की जरूरत नहीं है..मोदी जी की करीबी मेयर मैडम संयुक्ता भाटिया ने कहा..भैसाकुंड स्थित बैकुंठधाम पर अन्त्येष्टि हेतु दो नए हरित शवदाहगृह का सदन के समक्ष लोकर्पण किया..

मैडम बेड नहीं है बेड के लिए मत बोलिएगा

दोस्तों दिनभर में मुझे पचासों फोन आते हैं..दीदी बेड दिलवा दीजिए दीदी टेस्ट करवा दीजिए..कुछ डॉक्टरों और कुछ मेरे मित्र और पत्रकार भाईयें से कहकर जितना करवा पाती हूं उतना करवाती हूं लेकिन अब डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं कि मैडम बेड नहीं है बेड के लिए मत बोलिएगा..बाकी हम आपके लिए कुछ भी कर देंगे..आप समझ रहे हैं ये हालत हो चुके हैं..एक दो दिन में मैं आपको उल्टा चश्मा यूसी पर ग्राउंड रिपोर्ट दिखाउंगी कि कैसे अस्पतालों के भीतर कोहराम मचा हुआ है.

मेरे घर और दफ्तर की तरफ से कोविड अस्पतालों में ना जाने की वार्निंग दी गई है..लेकिन मैं फिर भी जाऊंगी..और आपको दिखाऊंगी कैसे कोरोना जांच के नाम पर लूट मची हुई है..और सरकार की तरफ से मैडम मुर्दाघर बनाने को अपनी उपलब्धि बता रही हैं..एक साल पहले जब कोरोना आया था साहबों ने बताया था कि ऐसे अस्पताल बनाएंगे वैसे अस्पताल बनाएंगे लखनऊ में एक भी नया अस्पताल नहीं बना है..बना है तो मुर्दा घर.. यूपी और लखनऊ वालों को मुबारक हो.. अस्पतालों में मौत कष्टकारी हो सकती है..लेकिन अंतिम यात्रा नहीं..