6 रबी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा, जानें सबके नए रेट, किसानों को कितना फायदा ?

मोदी कैबिनेट ने रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इसका निर्णय लिया गया है.

modi cabinet increase msp rabi crops
modi cabinet increase msp rabi crops

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि गेहूं के मूल्य में 50 रूपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है जो 1975 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगा. रबी फसलों के एमएसपी की घोषणा आमतौर पर बोआई शुरू होने के साथ ही होती थी, लेकिन इस बार संसद में एमएसपी को लेकर मचे घमासान के चलते सरकार ने पहले ही इसकी घोषणा कर विपक्ष के आंदोलन को नाकाम करने की कोशिश की है.

तोमर ने कहा कि इस कदम से हम स्पष्ट संदेश भेजना चाहते हैं कि सरकार द्वारा एमएसपी को हटाया नहीं गया है. वहीं 6 रबी फसलों पर एमएसपी बढ़ाया गया है. इनमें गेंहू में 50 रुपये, चना में 225 रुपये, मसूर में 300 रुपये, सरसों में 225 रुपये, जौ में 75 रुपये और कुसुम में 112 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है. एमएसपी, एपीएमसी बनी रहेगी, सरकारी खरीद होती रहेगी और इसके साथ किसान जहां चाहें अपने उत्पाद बेच सकेंगे.

  • गेहूँ का समर्थन मूल्य 50 रूपए बढ़ाकर 1975 रूपए,
  • जौ का 75 रू बढ़ाकर 1600 रू,
  • चने का 225 रू बढ़ाकर 5100 रू,
  • मसूर का 300 रू बढ़ाकर 5100 रू,
  • सरसों का 225 रू बढ़ाकर 4650 रू,
  • कुसुम का 112 रू बढ़ाकर 5327 रू/ क्विण्टल कर दिया गया है.

सरकार के फैसले के बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने 6 रबी फसलों की एमएसपी में वृद्धि के निर्णय को मंजूरी प्रदान की है. केंद्र सरकार ने न केवल एमएसपी में वृद्धि की है बल्कि किसानों के पारिश्रमिक मूल्य को सुनिश्चित करने लिए एमएसपी पर खरीद भी बढ़ाई है. बिना तथ्यों के आधार पर किसानों को भ्रमित करने वाले लोगों का झूठा चेहरा आज बेनकाब हो गया है, उन्हें अब हमारे अन्नदाता भाइयों बहनों से माफी मांग लेनी चाहिए.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को भरोसा देते हुए कहा था कि ‘मैं देश के प्रत्येक किसान को इस बात का भरोसा देता हूं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था जैसे पहले चली आ रही थी, वैसे ही चलती रहेगी. इसी तरह हर सीजन में सरकारी खरीद के लिए जिस तरह अभियान चलाया जाता है, वो भी पहले की तरह चलते रहेंगे.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *