खतरा: कोरोना से ज्यादा लॉकडाउन का डर, एक के ऊपर एक चढ़े यात्री, ट्रेनें बन सकती हैं सुपर स्प्रेडर

पिछले साल के लॉकडाउन में सबसे ज्यादा नुक्सान प्रवासी मजदूरों का हुआ था ये कोई भूल नहीं सकता की कैसे उन लोगों ने तकलीफें झेली थीं. वहीँ डर अब फिर सताने लगा है. एक बार फिर प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है.

migrant laborers traveling without mask and social distancing

देश में पिछले महीने मार्च से कोरोना के मरीज बड़ी तादात में बढ़ने लगे हैं. इस बार तो पिछला रिकॉर्ड भी टूट गया है. कोरोना के बचाव के लिए देश के लगभग सभी राज्यों ने नाइट कर्फ्यू लगा दिया है और लॉक डाउन की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में प्रवासी मजदूर अपने घर लौटने लगे हैं. लोगों को डर है कि पिछली बार की तरह इस बार भी कहीं न फंस जाए.

डर का आलम ये है कि मुंबई में लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन से यूपी जाने वाली ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं है. जनरल डिब्बों में तो लोग एक-दूसरे के ऊपर सवार होकर यात्रा कर रहे हैं. पुणे और नागपुर में भी यही हालात हैं. ये ट्रेनें सुपर स्प्रेडर बन सकती हैं और संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है. ट्रेनों के जनरल डिब्बों में क्षमता से दोगुने लोग नजर आए. लोग डिब्बों में सही ढंग से खड़े भी नहीं हो पा रहे हैं.

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ज्यादातर लोगों का चेहरा मास्क या कपड़े से ढंका हुआ था, पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना असंभव है. सीटों और फ्लोर पर जगह नहीं मिली तो लोग छतों पर चादर बांधकर बैठ गए. देश में ज्यादातर मजदूर यूपी और बिहार से ही जाते हैं इसलिए अचानक बढ़ती भीड़ की एक वजह यूपी का पंचायत चुनाव भी बताया जा रहा है. इसलिए यूपी बिहार की तरफ जाने वाली सभी ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट बढ़ गई है.

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इतनी बड़ी तादात में भीड़ कितनी हानि पहुंचा सकती है जिसका कोई अंदाज़ा भी नहीं है. इसमें अगर किसी एक को भी कोरोना हुआ होगा तो सोचिये स्थिति क्या हो सकती है ये भीड़ जहाँ भी जाएगी वहां क्या होगा. लेकिन इन लोगों का कहना है कि पिछली बार की तरह पैदल जाने से अच्छा है कि इस तरह खड़े हो कर अपने घर पहुँच जाएँ.