भारत की बिकी हुई मीडिया (Media) से बाइडन को जलन क्यों ? अमेरिकी पत्रकारों ने लंका लगा दी…

PRAGYA KA PANNA
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बाइडन ने मोदी से कहा था कि भारत की मीडिया (Media) अमेरिका से अच्छी है..उसके बाद अमेरिकी मीडिया ने बाइडेन की दाढ़ी पकड़ ली है..बाइडन ने भारतीय मीडिया (Media) को अच्छा कहकर भारत की मीडिया की तारीफ की है या गाली दी है..आज इसी पर बात करेंगे..चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो तुरंत करिए.फेसबुक पर देख रहे हैं तो अभी तुरंत बिना आलस के फॉलो बटन को दबा दीजिए बिल्कुल फ्री है…दोस्तोंअमेरिकी मीडिया का जिगरा देख लीजिए..अमेरिकी मीडिया की बुराई करने पर व्हाइट हाउस से सवाल पूछ लिया कि बताओ हमारी बेईज्जती क्यों की है..

अच्छा अमेरिकी पत्रकारों ने ये तक पूछ लिया कि ये बताओ जब बाइडन मोदी के साथ बैठे तो पत्रकारों के सवाल क्यों नहीं लिए..समझ रहे हैं आप 8 साल में एक बार भी पत्रकारों के सवालों के जवाब ना देने वाले प्रधानमंत्री के साथ बैठकर बाइडन ने जब पत्रकारों के सवाल नहीं लिए तो वहां की मीडिया (Media) ने सवाल खड़े कर दिए की सवाल क्यों नहीं लिए..और हमारे देश की मीडिया (Media)..एक से बढ़कर एक चापलूस…

मां बाप ने पत्राकारिता पढ़ाई करवाई कि लल्ला पत्रकार बनेंगे लोगों की समस्याएं उठाएंगे..लल्ला ने लंबी जुबान निकालकर खुद ही समाज की समस्या बन गए…मैं आम आदमी से सवाल नहीं कर रही हूं..अगर कोई पत्रकार मेरा ये वीडियो देख रहा है तो कसम खाकर बताए कि पत्रकारिता के कॉलेज में ये चाटुकारिता सिखाई गई थी क्या..माखनलाल ने ये बताया था क्या..कि पत्रकार बनकर सत्ता की जूतियां उठाना..कॉलेज में ये पढ़ाया गया था कि हमेशा कमजोरों की आवाज उठाना..जो भी सरकार में हो..उससे सवाल पूछना..

वो गलत करे तो टोकना..हमेशा कमजोर की तरफ खड़े होना..लेकिन यहां की पत्रकारिता में जातिवादिता है..पार्टी वादिता है..पत्रकार को आगे पार्टी ज्वाइन करनी है..पत्रकार को राज्यसभा जाना है..पत्रकार को अपने खनन का काम चलाना है..पत्रकार को अपनी जाति वाले नेता का सपोर्ट करना है..बाइडन जी भारत की मीडिया आपकी नजर में सिर्फ इसलिए अमेरिका से अच्छी है क्योंकि भारतीय मीडिया के मुंह में अपने राष्ट्रअध्यक्ष से सवाल पूछने की हिम्मत नहीं है..

बाइडेन जी आपको भीतरी बात बताती हूं..अपने यहां के पत्रकारों को खनन के ठेके…दारू के ठेके..किसी फैक्ट्री का ठेका.. किसी पर्किंग का ठेका..किसी एनजीओ का ठेका..भांग की दुकानों का ठेका..देसी शराब की दुकानों का ठेका..किसी पत्रकार को ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा दिलाना शुरू कर दीजिए आपके पत्रकार भी मुंह नहीं खोलेंगे..लेकिन आपके यहां ये सब चलता नहीं होगा..

इसलिए अगर भारत जैसी मीडिया (Media) चाहिए तो पहले भारत जैसा बनना पड़ेगा..अपने यहां से वो नियम हटाईये कि कोई उद्योगपति मीडिया हाउस नहीं चला सकता..आप भी अपने चेलों के नाम से अपने पाले हुए उद्योगपतियों के नाम से 10-12 चैनल खुलवा दीजिये फिर कुछ पत्रकारों के मुंह में बोटी डालकर उनको ईमानदार अमेरिकी पत्रकारों को गाली दिलवाईये..फूट डालिए राज करिए..मौज करिए..गारंटी देती हूं..अगर एक पत्रकार आपसे सवाल पूछने की हिम्मत भी करेगा तो दूसरा उसको भौंक भौंककर भगा देगा..

भारत जैसी मीडिया (Media) वहां बनाईये..लेकिन आप ऐसा कर नहीं पाएंगे..क्योंकि आपको अपने वहां अपने जमीर को अपने ईमान को बेचने वाले पत्रकार नहीं मिलेंगे..यहां से ले जाईये..सब फॉर सेल हैं कुछ को छोड़कर…बहुत सारे तो रीसेल के लिए भी 24 घंटे तैयार हैं..रिटायर्ड आईएएस सूर्य प्रताप कहते हैं कि प्रेजिडेंट बाइडेन ने अपने 9 महीने के कार्यकाल में 140 बार प्रेस के सवालों का उत्तर दिया..और 7 वर्षों में भारत में PM मोदी ने कितने बार,आपको पता है?
यहां तक कि अमेरिका के प्रेसिडेंट को प्रेस से सवाल न लेने की सलाह भी दे डाली..ये है,अमेरिका और आज भारत में प्रेस की आज़ादी का अंतर…दोस्तों इस वीडियो में इतना ही..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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