मायावती की आंखों पर एक आदमी ने पट्टी बांध दी है : संपादकीय व्यंग्य

Pragya Ka Panna Editorial
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मायावती के 19 विधायक थे..अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारते हुए मायावती ने 11 विधायक निकाल दिए..और सब समाजवादी पार्टी ज्वाइन करना चाहते हैं..दोस्तों आज बात इसी पर करेंगे कि सपा में यूपी के तमाम छोटे बड़े नेता शामिल हो रहे हैं इसका मतलब क्या है..सपा नेताओं पर इसका क्या असर पड़ेगा..तो चलिए दोस्तों आज की सबसे बड़ी घटना के साथ बात शुरू करते हैं..उत्तर प्रदेश चुनाव में सिर्फ 6 महीने का समय बचा है..6 महीने के बाद यूपी में चुनाव होने हैं..अगले चुनाव में हवा का रुख भांपते हुए मायावती की बहुजन समाज पार्टी के निकाले गए बागी नेता..अखिलेश यादव से मिलने उनके दफ्तर पहुंच गए..

आज नहीं तो कल बसपा के ये 9 विधायक सपा में शामिल हो जाएंगे..लेकिन मेरी पॉलिटिकल समझ ये कहती है कि यूपी के विधानपरिषद चुनाव से पहले बसपा के ये 9 विधायक सपा में शामिल नहीं होंगे..क्योंकि विधानपरिषद चुनाव में बसपा के ये 9 वोट सपा को मिल जाएंगें और सपा के तीन एमएलसी आसानी से बन जाएंगे..अगर ये 9 विधायक विधानपरिषद चुनाव से पहले ही सपा में शामिल होंगे..तो दल बदल कानून के मुताबिक इनकी सदस्यता जा सकती है..और फ्री फंड में सपा अपने 9 वोट बर्बाद बिल्कुल नहीं करेगी..

अखिलेश से मिलने के लिए गए 9 विधायकों का दर्द भी सामने आया है..उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी उनको बहुत सम्मान देती है..जहां सम्मान मिलेगा वो वहीं जाएंगे..बसपा सुप्रीमो मायावती बहुत क्रूर हैं..अरे फांसी लगाने वाला जज भी फांसी की सजा देने से पहले एक बार अंतिम इच्छा जरूर पूछता है लेकिन मायावती वो भी नहीं करतीं..सीधे पार्टी से बाहर कर देती हैं..अखिलेश से मिलने गए बसपा विधायक असलम राईनी ने आगे कहना है कि सतीष चंद्र मिश्रा मायावती की बसपा को बर्बाद करके ही चैन लेंगे..यानी निकाले गए विधायकों के मुताबिक बसपा में विलेन सतीष चंद्र मिश्रा हैं. जिनके कहने पर मायावती चलती हैं. मायावती की पार्टी के लिए क्या सही है क्या गलत वो बेहतर समझती होंगी. लेकिन जिस हिसाब से मायावती का संख्याबल खत्म हो रहा है कम हो रहा है वो बसपा के लिए ठीक संकेत नहीं हैं. बेशक मायावती किसी की भी राय पर चल सकती हैं. लेकिन पार्टी के बुरे भले की जिम्मेदारी उनकी ही है..क्योंकि बहुजन वर्ग सम्मान से जीने का सपना मायावती की ही आंखों से देखता है.

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दोस्तों जिन 9 विधायकों ने अखिलेश यादव से मुलाकात की है उनके नाम भी आपको जानने चाहिए..पहले हैं..भिनगा से विधायक असलम राइनी..दूसरे हैं ढोलना से असलम अली चौधरी..तीसरे हैं प्रतापपुर से विधायक मुजतबा सिद्दीकी ..चौथे हैं हंडिया से विधायक हाकिम लाल बिंद..पांचवे हैं..सिधौरी से हरगोविंद भार्गव..छठी हैं गुंगरा से विधायक सुषमा पटेल..सातवीं हैं..सगड़ी से विधायक वंदना सिंह…आठवे हैं सादाबाद से विधायक रामवीर उपाध्याय…और नौवें हैं उन्नाव से विधायक अनिल सिंह..ये 9 विधायक बसपा से विष्कासित हैं…ये सभी सपा में आएंगें..

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और सुनिये बसपा की दुर्गति की कहानी यहीं खत्म नहीं होती है..अभी पंचायत चुनाव में अंबेडकर नगर जिले से दो और विधायकों को मायावती निकाल चुकी हैं..जिसमें राम अचल राजभर..और लालजीवर्मा हैं..यानी अब बसपा के 19 विधायकों में 11 विधायक निकाले जा चुके हैं..मायावती के पास बचे हैं 8 विधायक..अगर 12 विधायक एक साथ हो जाएं तो दूसरा समीकरण बसपा तोड़कर नई पार्टी बनाने का भी बन सकता है..और सबकी सदस्यता भी बची रहेगी..खैर बसपा में तोड़ने जैसा अब कुछ बचा नहीं है..

8 विधायक 10 सांसद..और खुद किसी भी सदन की सदस्यता से महरूम मायावती..दोस्तों बसपा विधायक सपा में आने चाहते हैं..क्योंकि वो 2022 में हवा का रूख भांप रहे हैं..क्योंकि अगर कोरोना के कारण जनता की बीजेपी से नाराजगी बरकरार रही तो यूपी में ऑटोमैटिक सपा की सरकार बनेगी..और अखिलेश यादव को 2019 में बसपा कार्यकर्ताओं के साथ काम करने का फायदा इस बार के विधानसभा चुनावों में मिलेगा..क्योंकि सपा और बसपा कार्यकर्ताों की दूरियां 2019 लोकसभा चुनाव में काफी कम हुई हैं.

डिस्क्लेमर- लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. भाषा में व्यंग्य है. लेखक का मक्सद किसी पार्टी किसी व्यक्ति किसी सरकार किसी धर्म जाति किसी मानव किसी जीव या फिर किसी संवैधानिक पद का अपमान करना या उनके सम्मान को छति पहुंचाने का नहीं है.. इसलिए व्य्ग्य को व्यंग्य की तरह लें..लेख में सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. भाषा में स्थानीय या यूपी की रीजनल भाषा को सरल करके प्रस्तुत किया गया है. समझाने के लिए बात घुमाकर कही गई है.

9 thoughts on “मायावती की आंखों पर एक आदमी ने पट्टी बांध दी है : संपादकीय व्यंग्य

  • June 15, 2021 at 6:35 pm
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    इस बार चुनाव की जीत का सूत्र,दमदार भाषण पर नहीं दमदार भरोसे,पर होगा और जिस पार्टी की कथनी और करनी में अपेक्षाकृत अधिक समानता होगी वहीं भारी पड़ेगी,दूसरे शब्दों में कहें जिस पार्टी को किसानों का साथ मिलेगा वहीं जीत हासिल करेगी,

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    • June 16, 2021 at 5:27 pm
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      बनवारी जी आपने समय निकालकर अपने विचार रखे इसके लिए हम आपके आभारी हैं..

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  • June 15, 2021 at 10:02 pm
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    मैम डॉ हरगोविंद भार्गव सिधौरी नही सिधौली से है।

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    • June 16, 2021 at 5:25 pm
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      जी हम सुधार करेंगे

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  • June 16, 2021 at 7:54 pm
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    मैडम 2003 मे भी मुलायम सिंह यादव ने बसपा के करीब 85 विधायक तोड़ लिए थे और भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई थी तब भी तुम जैसे पत्रकारों ने यही कहा था कि बसपा तो खत्म हो गई लेकिन 2007 मे बसपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता मे आई थी।

    और एक बात मैडम सपा के प्रचार और गुणगाण से फुरसत मिल गई हो तो 2 शब्द अखिलेश की भाभी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मैनपुरी के लिए भी बोल दीजिये जो कि भाजपा मे शामिल हो चुकी हैं।

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    • June 17, 2021 at 12:15 am
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      सभी तरह के विचारों का स्वागत है आपने समय निकालकर अपनी राय रखी उसके लिए धन्यवाद..उस टॉपिक पर समय आने पर लिखा जाएगा

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  • June 17, 2021 at 12:15 am
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    Ab mera desh coreptionmukt ho gaya
    Modi ne kaha vah sab kuchh ho gaya

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    • June 17, 2021 at 12:17 am
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      आपकी राय के लिए धन्यवाद

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