मौनी अमावस्या: जानें स्नान करने का शुभ मुहूर्त, भूलकर भी न करें ये काम, रहें सावधान

माघ मास की कृष्ण पक्ष की आने वाली अमावस्या को मौनी या फिर माघी अमावस्या कहा जाता है. हिंदू धर्म में स्नान, दान और ध्यान का बड़ा महत्व होता है. खासतौर पर माघ महीने में मौनी अमावस्या का. ये स्नान ज्यादा फलदायी होता है.

mauni amavasya 2020 avoid to do this
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कहा जाता है कि इस दिन मनु ऋषि का जन्म हुआ था और मनु शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है. इसलिए इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं. मौनी अमावस्या पर मौन रहकर स्नान और दान करने से इंसान के कई जन्मों के पाप मिट जाते हैं. मौनी अमावस्या का प्रारंभ 24 जनवरी देर रात 2 बजकर 18 मिनट से लेकर अगले दिन 25 जनवरी देर रात 3 बजकर 12 मिनट तक रहेगा.

माना जाता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत बन जाता है. इसलिये माघ स्नान के लिये माघी अमावस्या यानि मौनी अमावस्या को बहुत ही खास माना गया है.

इस बार मौनी अमावस्या पर शुभ संयोग बन रहा है. वैदिक शास्त्रों के मुताबिक शनि महाराज धनु राशि से निकलकर अपनी मकर राशि में प्रवेश करने वाले हैं जिससे गुरु और केतु से इनका साथ छूटेगा और सूर्य एवं बुध के साथ इनका संयोग बनेगा. इस पवित्र मौके पर नदियों में आस्था की डुबकी लगाने वाले का कल्याण होता है. इस अमावस्या पर कई खास बातों को ध्यान रखना भी बहुत जरूरी होता है.

  • मौनी अमावस्या के दिन पितरों को जल देने से उन्हें तृप्ति मिलती है.
  • मौनी अमावस्या पर तीर्थस्थलों पर पिंडदान करने का विशेष महत्व है.
  • जिन लोगों की पत्रिका में चंद्रमा कमजोर है, वो जातक गाय को दही और चावल खिलाएं जिससे उन्हें मानसिक शांति मिलेगी.
  • मौनी अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी की परिक्रमा करनी चाहिए. इससे मनचाही आर्थिक समृद्धि मिलती है.
  • ओंकार का जप करने और सूर्य भगवान को अर्घ्य देने से घर से दरिद्रता का नाश होता है.
  • गंगा स्नान के बाद तिल, तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, वस्त्र, अंजन, दर्पण, स्वर्ण और दूध देने वाली गौ आदि का दान किया जाता है.
  • इस दिन सुहागन स्त्री पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. सुहागन महिलाएं पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करती हैं. इससे शनि की कृपा भी प्राप्त होती है.
  • मौनी अमावस्या की शाम घर के उत्तर पूर्व में और भगवान विष्णु के सामने एक-एक दीपक जलाएं. ध्यान रखें कि दीपक का धागा लाल रंग का हो और दीपक में तिल जरूर डाल दें. माना जाता है कि ऐसा करने से घर में लक्ष्मीजी की कृपा बनी रहती है.
  • माना जाता है कि मौनी अमावस्या के दौरान बुरी आत्माओं का प्रभाव काफी ज्यादा बढ़ जाता है. ये आत्माएं इंसान की हंसती-खेलती जिंदगी को तबाह कर सकती हैं. मौनी अमावस्या पर कोशिश करें कि कब्रिस्तान या श्मशान घाट के नजदीक से होकर न गुजरना पड़े.
  • इस दिन सूर्योदय होने के बाद तक सोते रहना अशुभ माना जाता है. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है. स्नान और पूजा के बाद ही कुछ खाना चाहिए.
  • इस दिन घर में शांति का माहौल बनाए रखें. क्लेश, लड़ाई-झगड़ों में पड़ने से बचें. साथ ही किसी व्यक्ति का अपमान न करें और बोली में मिठास लाएं.
  • मौनी अमावस्या के दिन मांस-मछली या मदिरा पान का बिल्कुल सेवन नहीं करना चाहिए. इन चीजों के सेवन से बचें.

शास्त्रों के अनुसार होंठों से ईश्वर का जाप करने से जितना पुण्य मिलता है. उससे कई गुणा अधिक पुण्य मौन रहकर जाप करने से मिलता है. वैसे तो इस दिन दिनभर मौन रखने की बात कही गई है लेकिन अगर दान से पहले सवा घंटे तक मौन रख लिया जाए तो दान का फल 16 गुना अधिक मिलता है और मौन धारण कर व्रत का समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है.

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