क्या महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) को मारा गया ? अखाड़े क्या होते हैं समझिए : Analysis By Pragya

PRAGYA KA PANNA
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अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष संत महंत नरेंद्र गिरी जी (Mahant Narendra Giri) की जर जमीन धन संपदा को लेकर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है..अरबों की संपत्ति थी उनके पास प्रयागराज से लेकर नोएडा तक बहुत जमीन थी..उसी की बेचा बाची को लेकर अपने ही शिष्यों से तनातनी टेंशनबाजी चल रही थी..मतलब मोह माया का चक्कर था..आत्मिक शांति यहां भी नहीं थी..उनकी मौत कैसे हुई पुलिस जांच रही है..उनके पास से एक सुसाइड लेटर मिला है..जिसमें उनके शिष्यों पर आरोप हैं..उनके अपने कमरे में नायलॉन की रस्सी में उनका शव झूलता हुआ मिला..आचार्य नरेंद्र गिरी जी का रौला उत्तर प्रदेश में ऐसा था कि वर्तमान से लेकर पूर्व तक सभी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री उनके आगे सिर झुकाते थे..फिर भी फंदे पर लटकने की क्या जरूरत पड़ गई..हैरत की बात है..लेकिन कब क्या कैसे हुआ ये तो ऊपर वाला ही जानता है..लेकिन लोग नरेंद्र गिरी के बारे में जानना चाहते हैं..अखाड़ा क्या होता है..अखाड़ा परिषद क्या होता है..वो अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष कैसे बने..बाघंबरी मठ क्या है..आजआपको एक एक करके आसान भाषा में इन सब के बारे में आपको समझाएंगे..जिससे आपको ज्ञान और जानकारी दोनों मिल जाएंगे..दो दोस्तों सबसे पहले बात कर लेते हैं कि

नरेंद्र गिरी थे कौन और ये नरेंद्र गिरी बन कैसे गए..

नरेंद्र गिरी तो बाद का नाम है..दरअसल नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) को लोग पहले बुद्धु नाम से जानते थे..प्रयागराज के फूलपुर के पास छतौना गांव में बुद्धु यानी नरेंद्र गिरी का जन्म हुआ..पिता भानु प्रताप सिंह ज्यादातर घर पर रहते नहीं थे..तो पाला पोसा नाना नानी ने..नाना नानी के गांव का नाम था..गिर्दकोट जो फूलपुर में आता है..बुद्धु को साधु महात्मा बचपन से ही बहुत अच्चे लगते थे..तो जब जब साधु महात्मा गांव आते वो उनके साथ ही भाग जाते..जैसे तैसे घर वालों ने हाई स्कूल तक पढ़ाया और बैंक ऑफ बड़ौदा में छोटी सी नौकरी दिला दी..लेकिन बैंक की नौकरी छोड़कर नरेंद्र सिंह यानी नरेंद्र गिरी भाग गए और फिर जब एक बार लौटे तो आचार्य नरेंद्र गिरि महाराज बनकर लौटे..कहते हैं योगी बनने के बाद अपना घर त्यागना पड़ता है..इसीलिए फिर कभी नरेंद्र गिरी अपने घर लौटकर नहीं गए..

13 अखाड़ों की काउंसिल है अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद.
और नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष थे..तो ये अखाडा़ परिषद क्या है और अखाड़ा परिषद बनती कैसे है..तो दोस्तों हमारे देश के हिंदू समाज में आदि गुरु शंकराचार्य ने सनातन धर्म की स्थापना की थी..बद्रीनाथ, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी और द्वारिका पीठ की भी स्थापना की गई और उसी काल में युवा साधुओं के लिए मठ और अखाड़ों की स्थापना हुई. अखाड़ा मतलब अलग अलग साधु संतों का दल..अलग अलग दलों के नाम अलग अलग अखाड़े से हैं..देश में कुल 13 अखाड़े हैं. ये सभी 13 अखाड़े शैव वैरागी और उदासीन तीन मतों में बंटे हुए हैं.

शैव संन्यासी संप्रदाय यानी शिव को मानने वाले संप्रदाय के पास 7 अखाड़े हैं..
पहला है श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी इनके पास महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा की जिम्मेदारी है..
दूसरा है श्री पंच अटल अखाड़ा यहां सिर्फ ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों को दीक्षा दी जाती है..
तीसरा है श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी
चौथा है तपोनिधि आनंद अखाड़ा पंचायती
पांचवा है श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा
छठा है श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा
सातवां है श्री पंचदशनाम पंच अग्नि अखाड़ा

अब वैरागी संप्रदाय के भी तीन अखाड़े हैं..ये लोग भगवान विष्णु को मानते हैं..
श्री दिगंबर अनी अखाड़ा
श्री निर्वानी अनी अखाड़ा
श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा

यानी अब तक 7 अखाड़े आपको बताए शैव संप्रदाय के जो शिव को मानते हैं..तीन अखाड़े आपको बताए वैरागी संप्रदाय के जो विष्णु को मानते हैं..अब तीन अखाड़े और हैं उदासीन संप्रदाय के पास ये सिख साधुओं का संप्रदाय है..ये सनातन धर्म को मानते हैं..
श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा
श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन
श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा

तो ये हो गए 13 अखाडे़..इन अखाड़ों में किसी में बच्चों को दीक्षा जी जाती है किसी में महिलाएं वर्जित हैं..किसी में महिला साध्वियों को दीक्षा दी जाती है..किसी में पहलवानी की दीक्षा भी जाती है..सबके अपने अपने अलग अलग नियम कानून हैं…महंत नरेंद्र गिरी जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने फांसी लगा ली है..वो इन सब 13 अखाड़ों के मुखिया थे…अध्य़क्ष थे..मतलब पूरे भारत वर्ष के साधु संतों के अध्यक्ष थे..भारत की सरकारों और यूपी की सरकारों में उनकी अच्छी पकड़ थी..महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) का फांसी लगाकर मरना ये बहुत ही अटपटा लगता है..आपको क्या लगता है..ये जानकारी आपको कैसी लगी कमेंट बॉक्स में जरूर बताईये..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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