लखनऊ में बिगड़े हालात, अंतिम संस्कार के लिए लग रही भीड़, लेना पड़ रहा टोकन

यूपी में कोरोना के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं एक दिन ने 8 हज़ार से ज्यादा मरीज बढ़ रहे हैं. और बुरी खबर ये है कि यूपी के 40-50 फीसदी मामले अकेले लखनऊ से आ रहे हैं. और इस बार मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है.

lucknow crematorium issues tokens for covid dead bodies

लखनऊ के हालात ऐसे हो गए हैं कि सारी व्यवस्थाएं फेल हो गई हैं. यहाँ तक कि शवदाह गृह में भी शवों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते संस्कार कराने आ रहे लोगों को टोकन लेना पड़ रहा है. और फिर भी 8 से 10 घंटे इंतज़ार करना पड़ रहा है. लखनऊ के बैकुंठ धाम विद्युत शवदाह गृह में कोरोना से मरने वाले लोगों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

सच्चाई के परे हैं सरकारी आंकड़े

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल से 8 अप्रैल तक 54 मौतें कोरोना से हुई हैं जबकि श्मशान घाट की तस्वीर देखें तो कुछ अलग ही हालात बयां हो रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के हिसाब से कहीं ज्यादा लाशों का श्मशान घाट पर रोजाना अंतिम संस्कार किया जा रहा है. हकीकत यह है कि वैकुंठ धाम में कोविड प्रोटोकॉल से रोज 30 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. वहीं गुल्लाला श्मशान घाट पर 20 से ज्यादा शव अंतिम संस्कार के लिए रोजाना आ रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोरोना के आंकड़ों में कुछ गड़बड़ है?

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कर्मचारी मुन्ना ने बयां किये हालात

यहां काम करने वाले कर्मचारी मुन्ना ने बताया कि यहां अधिकतर परिजन अपने मृत संबंधी का संस्कार कराने आते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनमें कोविड को लेकर दहशत होती है और वो अंदर नहीं आते, बस संस्कार के लिए शव सौंप देते हैं. उन्हें अगले दिन अस्थियां दे दी जाती हैं. वैसे यहां पर एक बार में परिवार के पांच लोगों के आने की गाइडलाइन है.

केजीएमयू अस्पताल से सबसे ज्यादा शव

उसने ये भी बताया कि केजीएमयू अस्पताल से सबसे ज्यादा शव आ रहे हैं, जिनका अंतिम संस्कार सुबह 3 से 4 बजे तक किया जा रहा है. मुन्ना ने आगे बताया कि हमलोग वहीं सो जाते हैं, घर नहीं जाते क्योंकि उन्हें डर है कि अगर उन्हें कोविड हुआ तो इससे उनका परिवार भी संक्रमित हो सकता है.