LALU PRASAD YADAV लालू प्रसाद यादव LIFE STORY

लालू प्रसाद यादव

लालू प्रसाद यादव (LALU PRASAD YADAV) और जगन्नाथ मिश्रा..दोनों चारा घोटाले के आरोपी थे..दोनों मुख्यमंत्री रहे थे..चारा घोटाले की शुरुआत जगन्नाथ मिश्रा के मुख्यमंत्री काल से शुरु हुई..लालू के काल तक चली..लालू को जेल हुई और जगन्नाथ मिश्रा को बेल मिल गई..सीबीआई को जन्नाथ के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला..बहस छिड़ गई कि लालू को पिछड़ा होने की सजा मिली है..लेकिन अदालत का निर्णय तो अदालत का होता है..आज लालू प्रसाद यादव के जीवन मे बारे में बात होगी..लालू फिर से जेल के बाहर आ चुके हैं मुलायम और दूसरे नेताओं से मिल रहे हैं..

राजनीति का एक ऐसा नाम जिसको सत्ता का जादूगर कहते हैं..जिसे गरीबों का मसीहा भी कहा जाता है..जिनकी सूरत भोली सी और जिसके अन्दर अपने दुश्मनों को धूल चटाने का जज्बा था…जिसके सामने उसके विरोधी भी अपनी जुबान नहीं खोलते थे…वो कोई और नहीं लालू प्रसाद यादव (LALU PRASAD YADAV) हैं..

लालू प्रसाद यादव (LALU PRASAD YADAV) की कहानी की शुरुआत होती है..बिहार जिले के फुलवरिया गांव से…जहां एक दूध बेचने वाले कुंदन राय के घर आजादी के बाद उनके दूसरे बेटे ने जन्म लिया जिसका नाम था..लालू प्रसाद यादव…लालू प्रसाद यादव बचपन में अपनी मां के साथ लोगों के घर जाकर दूध बांटते थे…उनके गांव में पढाई के लिए स्कूल नहीं थे तो लालू आगे की पढ़ाई के लिए अपने बड़े भाई के पास शहर चले गए..लालू प्रसाद के भाई बिहार के वेटरनरी कालेज में चपरासी की नौकरी करते थे..वो कॅालेज के सर्वेंट कार्वटर में रहते थे..और लालू भी उनके साथ ही रहने लगे… जब 1970 में लालू का ग्रेजुएशन तो पूरा हो गया लेकिन लालू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष पद का चुनाव हार गए..जिसके बाद उन्होने एक फैसला लिया और अपने ही भाई के कॉलेज में डेली बेस पर चपरासी की नौकरी कर ली..

लालू ने तीन साल बाद फिर से पढ़ाई का रुख किया और पटना यूनिवर्सिटी में लॅा की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया..और एक छात्र होने के साथ अब लालू छात्रसंघ का चुनाव लड़ सकते थे..औऱ फिर 1973 में लालू प्रसाद यादव (LALU PRASAD YADAV) पटना यूनिवर्सिटी में स्टूडेंड यूनियन के प्रसिडेंट बन गए..और फिर अगले साल जय प्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति आंदोलन की घोषण कर दी है..और लालू प्रसाद यादव इस आंदोलन में शामिल हो गए..छात्र राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले लालू प्रसाद यादव को जेपी की पंसद बनने ज्यादा वक्त नहीं लगा..और इसी के चलते वो आपातकाल के बाद पुलिस की निगाह में आ गए थे..और जब लालू आंडरग्राउंड हो गए तो पुलिस उन्हें ढूंढते हुए उनके ससुराल तक जा पहुंची थी..

एक बार तो जब लालू को पुलिस पकड़ने के लिए पहुंची तो लालू पुलिस की ही जीप पर चढ़े और अपना ही कुर्ता फाड़ कर जोर-जोर से चीखने लगे..और उनके शरीर पर पड़ी लाठियों की मार देखकर जनता हैरान रह गई..लालू के संघर्षों को सलाम किया..जब आपातकाल खत्म हुआ तो 1977 में लोकसभा चुनाव हुआ..लालू प्रसाद यादव (LALU PRASAD YADAV) को छपरा से टिकट मिला..उस समय कांग्रेस के खिलाफ हवा थी..और बाजी लालू के हाथ आ गयी…लालू प्रसाद यादव उस वक्त मात्र साल 29 साल की उम्र के भारत के सबसे युवा सांसद थे..

1980 के लोकसभा चुनाव में लालू प्रसाद हार गए..लालू प्रसाद यादव (LALU PRASAD YADAV) ने उसी साल विधानसभा चुनावों में सोनपुर के लिए लोकदल पार्टी के टिकट पर विधायकी का पर्चा भर दिया और विधायक बन गए..और 1985 में लालू ने फिर से विधानसभा चुनाव जीत लिया..औऱ फरवरी 1988 में अचानक कर्पूरी ठाकुर का देहांत हो गया..औऱ विपक्ष का नेता लालू प्रसाद यादव को बना दिया गया..1990 में जनता दल पार्टी ने एक बार दोबारा अपनी वापसी की और सीपीआई के साथ सरकार बनाने लायक सीटें जुटा लीं..और उसके बाद सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हुआ कि अब सीएम किसको बनाया जाए..बाजी मारी लालू प्रसाद यादव ने..लालू प्रसाद यादव मार्च 1990 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने..

साल 1996 में पश्चिम सिंहभूम में एनिमल हसबैंडरी विभाग के दफ्तर पर एक रेड पड़ी..भूसे के बदले बिहार सरकार से अपनी मर्जी के बिल पास करवाने की बात सामने आई…जिसे चारा घोटाला कहा गया और इसका इल्जाम आया जगन्नाथ मिश्रा और लालू प्रसाद यादव (LALU PRASAD YADAV) पर…साल 1997 में लालू को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ गया..लेकिन जेल जाने के बाद भी लालू प्रसाद यादव का जादू खत्म नहीं हुआ..लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर से सबको चौंकाते हुए अपनी जगह अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सीएम बनाया..

इसी साल लालू ने जनता दल पार्टी तोड़कर अपनी अलग पार्टी बना ली राष्ट्रीय जनता दल..चारा घोटाले का शिकंजा लालू पर कस रहा था..इसके बाद भी लालू (LALU PRASAD YADAV) की पार्टी ने विधानसभा चुनाव जीता..2005 के विधानसभा चुनाव में नतीजे किसी के पक्ष में नहीं गए..लालू के साथी नीतीश कुमार अपनी अलग पार्टी बनाकर लड़े थे..और बीजेपी के साथ मिलकर अपनी सरकार बनाई..2005 से लेकर अब तक नीतीश कुमार..अलग अलग कारणों से बिहार के सीएम हैं..2005 में लालू ने दिल्ली का रुख कर लिया..

लालू के पास 22 विधायक थे और इसके दम पर ही लालू यूपीए में रेलमंत्री बन गए..रेलमंत्री के तौर पर लालू (LALU PRASAD YADAV) ने अपनी एक नई इमेज बनी प्रॉफिट वाली इमेज..रेलवे ने आज तक के इतिहास में इतना प्रॉफिट नहीं देखा था..लालू की देशी भाषा सभी को बहुत ही अच्छी लगती थी..बिहार के लोग जब बिहार के अपने मुख्यमंत्री को अपने सामने दूध निकालते..झाड़ू लगाते..दातून करते..देखते थे..उनको अपने साथ जोड़ते थे..

रेलमंत्री रहते हुए लालू सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के काफी करीब होते गए..लेकिन चारा घोटाले ने उनका पीछा नहीं छोड़ा..और अक्टूबर 2013 में लालू को 5 साल की सजा सुना दी गई.. लालू बेल पर बाहर थे..लेकिन जैसे ही मोदी सरकार आई लालू को जेल में डाल दिया गया..आरोपी लालू और जगन्नाथ मिश्रा दोनों थे लेकिन सजा सिर्फ लालू प्रसाद यादव (LALU PRASAD YADAV) को हुई..

2015 के बिहार चुनाव में लालू के बेटों ने पार्टी को संभाला..लालू (LALU PRASAD YADAV) की पार्टी बिहार की नंबर वन पार्टी बनी..नीतीश कुमार को लालू की पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनानी बड़ी..इस बार लालू ने 2005 वाली गलती नहीं कि और नीतिश को मुख्यमंत्री बन जाने दिया..लालू के बेटे तेजस्वी यादव को डिप्टी सीएम बनाया गया..बाद में लालू प्रसाद यादव को जेल में डाल दिया गया…बहुत मुश्किल से 4 साल बाद लालू को जमानत मिली..चारा घोटाले के देवघर कोषागार से 89 लाख से अधिक की अवैध निकासी के संबंध में जब से ये फैसला आया कि जगन्नाथ मिश्रा को बेल औऱ लालू को जेल… तब से इस इस बात पर बिहार में राजनीतिक बहस छिड़ी थी कि आखिर बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों में से एक दोषी और दूसरे को कैसे बरी कर दिया गया? जबकि इस घोटाले के एक अन्य मामले में तीन साल पूर्व दोनों को एक साथ दोषी करार दिया गया था..लालू प्रसाद यादव जेल से निकलने के बाद भी सक्रिय हैं..

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