लखीमपुर (Lakhimpur Kheri) कांड में दिल्ली वालों के चक्कर में योगी का कितना नुकसान हुआ ? स्वतंत्र देव को क्यों बोलना पड़ा : संपादकीय व्यंग्य

PRAGYA KA PANNA
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दोस्तों बहुत सारे लोग ये सवाल कर रहे हैं..कि प्रज्ञा जी आप ग्राउंड पर रहती हैं..आप बताईये क्या लखीमपुर कांड के बाद उत्तर प्रदेश में बीजेपी को नुकसान होगा..क्या ये नुकसान इतना बड़ा हो सकता है कि हार जीत जैसे फैक्टर को डिसाइड कर सकता है क्या..तो दोस्तों आज इसी पर बात करेंगे..दोस्तों लखीमपुर (Lakhimpur Kheri) कांड का नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ेगा..

जितने दिन तक मोदी जी किसानों पर जीप चढ़ाने के आरोपी मोनू के पिता जी मंत्री टेनी को मंत्री बनाए रहेंगे..उतने ज्यादा वोट योगी आदित्यनाथ की बीजेपी के कम होंगे..ये नुकसान बीजेपी को हो रहा है ये यूपी की बीजेपी के अध्यक्ष भी जानते हैं..योगी आदित्यनाथ के राइटहैंड हैं..स्वतंत्र देव सिंह को सुनिए..यूपी की बीजेपी का डर आपको समझ में आ जाएगा..

नेता होने का मतलब ये नहीं है कि कोई किसी पर फॉर्च्यूनर चढ़ा दे..लखीमपुर (Lakhimpur Kheri) कांड पर अब तक मोदी जी..शाह जी..नड्डा जी..फलाने जी ढिमकाने जी किसी के मुंह से थूक नहीं निकला है..लेकिन योगी आदित्यानाथ के राइट हैंड स्वतंत्र देव सिंह ने खोलकर कह दिया है कि नेता होने का मतलब ये नहीं है गुरू कि किसी पर भी गाड़ी चढ़ा दोगे..

दोस्तों लखीमपुर खीरी वाले कांड में बीजेपी को किसान वोटों का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है..तीन किसान कनूनों के कारण यूपी में योगी आदित्यनाथ की बीजेपी को इतना नुकसान नहीं उठाना पड़ता जितना लखीनपुर कांड से उठाना पड़ेगा..देखिए मैं तो जमीन पर घूमती हूं..इसलिए आपको बिल्कुल साफ बताती हूं..

किसान कानून से यूपी की बीजेपी को पश्चिमी यूपी में नुकसान हो रहा था..पश्चिचमी यूपी मतलब गन्ना वाला किसान मतलब.गन्ना बेल्ट वाला किसान..यानी बड़ा किसान..अवध बुंदेलखंड और पूर्वांचल के किसानों को इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा था लेकिन जब से ये खबर फैली है कि मंत्री के लड़के ने किसानों को कुचल दिया..

और मंत्री के लड़के को यूपी और दिल्ली की बीजेपी मिलकर बचा रही है..तब से बीजेपी के लिए आम किसानों में नाराजगी है..ये बात बिल्कुल सच है..किसानों का आपस में एक भावात्मक रिश्ता होता है..पैसे भले ना हों लेकिन भावनाएं बहुत मजबूत होती हैं..इसीलिए स्वतंत्र देव को मैनेज करने उतरना पड़ा है..

यूपी की बीजेपी को मालूम है..कि केंद्र वालों के चक्कर में उनका खेल खराब हो रहा है क्योंकि..चुनाव में योगी जी को उतरना है..मोदी जी को उतरने में अभी समय है..दोस्तों यूपी में इस बात की चर्चा बहुत ज्यादा है कि यूपी की योगी सरकार मंत्री के बेटे को गिरफ्तार पहले करना चाहती थी लेकिन यूपी की सरकार केंद्र के मंत्री के चक्कर में अपना नुकसान नहीं चाहती थी..लेकिन ना चाहते हुए भी केंद्र सरकार की बात माननी पड़ी..मंत्री के लड़के मोनू को इज्जत देनी पड़ी..और इस इज्जत का खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेगा..क्योंकि जितने दिन गिरफ्तारी में लेट किया है उतने दिन विपक्ष को ये साबित करने के लिए काफी थे कि सरकार किसान विरोधी है..

लखीमपुर (Lakhimpur Kheri) कांड में योगी सरकार ने मैनेजमेंट ठीक किया था..अगले ही दिन राकेश टिकैत से मामला सुलझवा दिया था..किसान शांत हो गए थे..लेकिन केंद्र के मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र मोह वाले नाटक ने यूपी की बीजेपी का नुकसान किया..मंत्री के लड़के गिरफ्तार में देरी हुई..यूपी की सरकार ने मंत्री के लड़के के लिए बहुत नरम दिल दिखाया..मंत्री जी तो दिल्ली के मंत्री हैं..

योगी जी उनका तो कुछ कर नहीं सकते लेकिन सूत्र ये बताते हैं कि यूपी की सरकार मंत्री के लड़के को पकड़ना चाहती थी लेकिन दिल्ली की तरफ से रहमदिली का इशारा था..खैर इस रहमदिली के चक्कर में किसानों के ठंडे होते आंदोलन को फिर से हवा मिल गई है..4 किसानों की मौत ने किसानों के मन में बीजेपी के लिए नफरत का रंग और गाढ़ा कर दिया है..

मंत्री के लड़के पर किसानों पर गाड़ी चढ़ाने के आरोप लगे..जिस तरह के राक्षसी..प्रवृति वाले वीडियो देखने को मिले..उसने किसान कौम को योगी सरकार से एक कदम और दूर कर दिया..ये मैसेज बहुत तेज फैलने लगा कि बीजेपी अमीरों की पार्टी है..बीजेपी अमीरों को अपने नेताओं को बचाती है..

बीजेपी पावर का गलत इस्तेमाल कर रही है..ये मैसेज आम किसानों में गया है…तो लखीमपुर (Lakhimpur Kheri) कांड से यूपी की बीजपी का ज्यादा नुकसान होगा..क्योंकि बीजेपी ने बैठे बिठाए अपने वोटों में खुद आग लगाई है..मोदी जी के मंत्री ने योगी जी का बहुत बड़ा नुकसान कर दिया है..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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