भारत बंद: आज श्रमिक और किसान संगठनों की हड़ताल, सड़क पर उतरेंगे 25 करोड़ लोग, काम-काज ठप

आज बुधवार 8 जनवरी को श्रमिक और किसान संगठनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. करीब 25 करोड़ लोगों के हड़ताल पर रहने की संभावना है. इस हड़ताल से बैंकिंग, परिवहन और अन्य जरूरी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.

labor organizations calls bharat bandh 2020
labor organizations calls bharat bandh 2020

केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन में आगरा के संगठन भी शामिल होंगे. और कार्य का बहिष्कार करेंगे. इसके साथ ही श्रमिकों को 21 हजार रुपये न्यूनतम वेतन, ठेका प्रथा बंद करने समेत 16 सूत्रीय मांगों के लिए राष्ट्रपति के नाम उप श्रमायुक्त को ज्ञापन देंगे. अखिल भारतीय किसान सभा ने भी हड़ताल का समर्थन करते हुए कलक्ट्रेट में ज्ञापन दे दिया है.

ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगों में बेरोजगारी, न्यूनतम मजदूरी तय करना और सामाजिक सुरक्षा तय करना शामिल हैं. यूनियनें सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी 21 हज़ार रुपये प्रति महीने तय करने की मांग कर रही हैं. ट्रेड यूनियनें नए इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड बिल को ‘मालिकों के पक्ष में और मजदूरों के ख़िलाफ़’ बता रही हैं.

भारतीय ट्रेड यूनियनों की फ़ेडरेशन सीटू के महासचिव तपन सेन ने केंद्र सरकार पर श्रमिक विरोधी होने का आरोप लगाया. और कहा कि सरकार श्रमिकों को बंधुआ मज़दूर बनाना चाहती है, ये उद्योगपतियों की सरकार है. सरकार कामयाब क्या होगी. फ़ैक्ट्रियां भी तो चलानी हैं. वहीं, अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के सी.एच वेंकटचलम ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि “केंद्र सरकार पूंजीपतियों के साथ है जिनका मक़सद बेईमानी करना है.

आज सभी बैंकों में हड़ताल रहेगी. रिजर्व बैंक में भी कामकाज प्रभावित रहेगा. हालांकि एटीएम सुविधा पर कोई असर नहीं पड़ेगा. 10 ट्रेड यूनियंस की तरफ से भारत बंद का ऐलान किया गया है. 6 बैंक यूनियंस ने भी हड़ताल का समर्थन किया है. मगर हड़ताल का प्राइवेट बैंक पर कोई असर नहीं होगा. 8-9 जनवरी को कैश की किल्लत हो सकती है. ट्रेड यूनियंस की तरफ से संयुक्त बयान में कहा गया है कि इस हड़ताल में करीब 25 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं.

इसके अलावा, 60 स्टूडेंट यूनियन, यूनिवर्सिटीज के अधिकारियों ने भी हड़ताल का हिस्सा बनने का ऐलान किया है. ये शिक्षा संस्थानों में फीस बढ़ोतरी और शिक्षा के कमर्शलाइजेशन का विरोध करेंगे.

2 जनवरी को ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधि लेबर मिनिस्टर से मिले लेकिन बात नहीं बन पाई थी. ट्रेड यूनियनों ने बताया था कि केंद्रीय मंत्री गंगवार ने यूनियन प्रतिनिधियों से कहा था कि सरकार श्रमिकों की भलाई के लिए सभी कदम उठा रही है और लेबर कोड से जुड़ा क़ानून भी इसका हिस्सा है. लेकिन, इसके बाद 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि गंगवार ने उनकी ’14 सूत्रीय मांगों में से किसी के समाधान का भरोसा नहीं दिया है.

बैंकिंग के अलावा परिवहन और अन्य मुख्य सेवाओं पर भी हड़ताल का असर हो सकता है. बंद के दौरान किसान खेती और किसानी का कोई काम नहीं करेंगे. सब्जी, दूध, अंडा, मछली जैसा अपना कृषि उत्पाद नहीं बेचेंगे. न ही कोई सामान खरीदेंगे. कृषि उपज मंडियों को भी बंद रखा जाएगा. जगह-जगह रास्ता रोको आंदोलन और धरना प्रदर्शन और रैली निकाली जाएगी.

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