कुंभ में महिला नागा साधु कैसे स्नान करती हैं, तस्वीरें देखिए..

  कुंभ में शाही स्नान पर आपने नागा साधु बहुत देखे हैं. बहुत बार आपने नागाओं का जिक्र सुना होगा. लेकिन नागाओं में महिला नागा साधु भी होती हैं. महिला नागा साधु कैसे स्नान करने के लिए पहुंचती हैं. संगम नगरी में गंगा के तट पर ली गई तस्वीरें देखिए.. कुंभ में नागा साधुओं के साथ ही महिला नागा साधु भी स्नान के लिए आती हैं. महिला नागाओं के शरीर पर एक गेरूआ वस्त्र होता है. महिला नागा साधु कहने के लिए नागा होती हैं. लेकिन उनके शरीर पर पूरे कपड़े होते हैं. कपड़ों के अलावा महिला नागा साधु धर्म कर्म के सभी काम वैसे ही करती हैं जैसे नागा साधु. महिला नागा साधु भी अपने बाल पुरुष नागा साधु की तरह की गुलेटकर रखती हैं, वो भी जटाएं बनाने के लिए स्वतंत्र हैं. हर अखाड़े में महिला नागा हैं लेकिन जूना अखाड़े में महिला नागाओं की संख्या ज्यादा है.   महिला नागा साधु जटाएं रखती हैं जटाओं को संवारने की जरूर नहीं होती है. बालों में तेल पानी लगाने में समय खर्च नहीं करना पड़ता. सारा समय भगवान का ध्यान लगाने में गुजर जाता है.   महिला नागा अपने गुट में स्नान करने के लिए आती हैं. महिला नागा जिस अखाड़े से जुड़ी होती हैं उनको तय समय यानी नागाओं और महिला नागाओं को 40 मिनट में ही स्नान करके घाट खाली करना होता है. एक अखाड़े में कम से कम 10 हजार साधु और भक्त जरूर होते हैं. यानी 40 मिनट में 10 हजार कुल लोगों को स्नान करना होता है. अगर आप महिला नागाओं के दर्शन चाहते हैं शाही स्नान वाले दिन सुबह 7 बजे संगम तट पर शाह स्नान वाले घाट पर पहुंच जाइये. कुंभ में महिला नागा हमेशा जूना अखाड़ा के ठीक पीछे पीछे स्नान के लिए आती हैं. महिला नागाओं को नागाओं का संरक्षण रहता है. कुंभ में महिला नागा सेक्टर 16 में बसाई गई अस्थाई सिटी में रहती हैं. महिला नागा जूना अखाड़े के अधीन रहती हैं. जूना अखाडे़ के महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी हैं.     पुरुष नागाओं की तरह महिला नागा भी अपने शरीर पर भस्म लगाकर स्नान करने जाती हैं. महिला नागा गुट में स्नान करने जाती हैं. जिस रास्ता से जाती हैं उस रास्ते से नहीं लौटतीं. महिला नागाओं में हर उम्र की महिला नागा साधु होती हैं.   महिला नागा कुंभ के बाद देश भर के अलग अलग हिस्सों में बने मंदिरों में साध्वी या पुजारी बनकर रहती हैं. विदेश से आई लड़कियां भी शाही स्नान पर महिला नागा साधु के वेश में स्नान करन के लिए आती हैं. जिस अखाड़े से दीक्षा है महिला नागा उसी अखाडे़ में स्नान करने आती हैं. महिला नागाओं की संख्या पुरुष नागाओं की संख्या में बहुत कम है. महिला नागा पुरुष नागा साधुओं के साथ ही स्नान करती हैं. महिला नागाओं की अखाड़ों में अलग अलग पदवियां होती हैं. शाही स्नान के दिन ही महिला नागाओं की फौज ज्यादा देखने को मिलती है आम तौर पर महिला नागा साध्वियों के भेष में रहती हैं.   महिला नागा 17 श्रंगार के साथ स्नान करने के लिए पहुंचती हैं. शाही स्नान वाली पूरी रात महिला नागा स्नान की तैयारी करती हैं. पूजा करती हैं और भस्म-भभूत लगाकर खुद को तैयार करती हैं. महिला नागा सिर में बालों में गेंदे के फूलों की माला लगाकर स्नान करने आती हैं. जिन भक्तों पर महिला नागा अपने बालों  में लगे फूल फेंकती हैं वो अपने आप को सौभाग्य शाली मानते हैं. महिला नागा स्नान के बाद किसी भक्त से बात नहीं करती सीधे अपने अखाड़े पहुंचती हैं. जरूरी नहीं है कि महिला नागा सन्यासी ही हों. महिला नागा गृहस्थ भी होती हैं.   महिला नागाओं के साथ उनके भक्त भी शाही स्नान करने आते हैं.

 

 

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