कोयले (Koyla) के लिए भी मुसलमान दोषी हैं क्या ? या बिजली विभाग भी बेचने की प्लानिंग है?

PRAGYA KA PANNA
PRAGYA KA PANNA

कोयले (Koyla) की कोई कमी नहीं है..तो 13 दिन में 30 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन केवल यूपी यूपी में क्यों गिर गया..मंत्री प्रहलाद जोशी जी कोयले की कोई कमी नहीं है तो सारा कोयला कोयला पक्चर का शाहुरुखखान खा गया है क्या..आपकी पार्टी के एजेंडे.और शाहरुख के आगे लगे खान को मिलाकर देखा जाए तो शाहरुख खान सरकारी कोयला खा भी सकता है..मैं मुफ्त में आपको ये आईडिया दे रही हूं..लेकिन प्लीज इंप्लीमेंट मत कीजिएगा..कोई अपना नया आईडिया इजाद कीजिएगा..मुस्लिमानों ने तंदूर सुलगाकर देश का कोयला खत्म कर दिया है..ये आईडिया भी फ्लॉप हो जाएगा..क्योंकि मेरठ के रिपोर्टर नरेंद्र प्रताप ने इस आईडिया को भी सार्वजनिक कर दिया है..

कोयले (Koyla) से सीधा बिजली पर आती हूं..देखिए दोस्तों उत्तर प्रदेश को सरकार बिजली पर किए जा रहे अपने एहसान याद दिलाने लगी है..ये सब क्यों है वो आगे बताऊंगी लेकिन व्यूह रचना कैसे हो रही है इसको समझिएगा..यूपी की सरकार कह रही है कि हम 17 रूपए में बिजली खरीद कर 7-8 रूपए में आपको दे रहे हैं..बिजली विभाग बहुत घाटे में है..कितना घाटे में वो भी आगे बताऊंगी..लेकिन यूपी के ऊर्जा मंत्री श्री कांत शर्मा का कहना है कि इसको बेकार का मुद्दा ना बनाया जाए..हम पिछली सरकारो से 10 हजार मेगावाट ज्यादा बिजली आपूर्ति कर रहे हैं…

उत्तर प्रदेश का बिजली विभाग इनती दयनीय हालत में पहुंच चुका है कि कर्मचारियों को सैलरी देने तक के पैसे नहीं हैं..ये मैं नहीं यूपी के ऊर्जा मंत्री का ही कहना है..कि जो हाल कार्पोरेशन का है उसमें सैलरी बढ़ाने की बात मत करिए..सैलरी दे रहे हैं यही बड़ी बात है..याद रखिएगा कि इसी रमजान और दिवाली की बिजली पर यूपी में सरकार बनी थी..और उसी सरकार में बिजली का क्या हाल है..मैं सवाल नहीं पूछ रही हूं बता रही हूं..उत्तर प्रदेश का पावर कॉर्पोरेशन 90 हजार रुपए के घाटे में चल रहा है…कितने 90 हजार करोड़..

केंद्र की सरकार कोयले पर कहती है कोयले (Koyla) की कोई दिक्कत नहीं है…अगर कोयले की कोई दिक्कत नहीं है तो मेरे उत्तर प्रदेश की टांडा और ऊंचाहार की बिजली बनाने वाली यूनिट बंद क्यों हैं..देश भर में 10सियों यूनिट ठप क्यों हो गई हैं..केवल यूपी में ही..30 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन बंद क्यों हो गया है..श्रीकांत शर्मा जी आप केंद्र सरकार से या प्राइवेट कंपनियों से महंगी बिजली खरीदकर कोई एहसान नहीं कर रहे हैं..डबल इंजन डबल इंजन कहकर ही आपने यूपी में सरकार बनाई थी.

जब डबल इंजन है तो केंद्र से आपको महंगी बिजली क्यों मिल रही है..जब दोनों बाल्टियों में आपका ही पानी है तो इधर से निकालिए उधर डालिए उधर से निकालिए इधर डालिये यूपी पर कोई एहसान थोड़े है..आप महंगी की बात करते हैं..जो दूसरी पार्टियां यूपी में सरकार बनाना चाहती हैं..वो बिजली फ्री देने की बात कर रही हैं..और दिल्ली में बहुत सफलता पूर्वक दे भी रही हैं..लेकिन एक बार भी एहसान नहीं जतातीं कि हम महंगी खरीद रहे हैं…उनके नेताओं की मम्मियां घर पर बिजली नहीं बनाती होंगी वो भी कहीं से खरीदते होंगे..तो एहसान बिल्कुल मत दिखाईए कि महंगी बिजली खरीदने के बाद सैलरी दे रहे हैं यही बड़ी बात है..

कोयला (Koyla) और बिजली पर जिस तरीके का माहौल बनाया जा रहा है उसका साफ मतलब है या तो बिजली के दाम बढ़ने वाले हैं या फिर कोयले की खाने या सरकारी बिजली कंपनियां मित्र मंडली के हाथ जाने वाली हैं…यूपी सहित 5 राज्यों में चुनाव नहीं होता तो बिजली के दाम अब तक बढ़ चुके होते लेकिन चुनाव की मजबूरी है इसलिए दाम तो सपने में भी नहीं बढ़ा सकते चाहे 10 लाख रूपए यूनिट में बिजली क्यों ना खरीद लाएं…देश में कोयला कोयला का शोर मचाकर बेचिंग कार्यक्रम अंजाम दिया जा सकता है इसमें कोई बड़ी बात नहीं है..

सावरकर गांधी जी से पूछकर अंग्रेजों के सामने गिड़गिड़ाए थे..या स्वत: अंतरआत्मा की आवाज पर गिड़गिड़ाए थे..ये मुद्दा मैं गोदी मीडिया के लिए ही छोड़े देती हूं..क्योंकि आम आदमी की आप से जुड़े मुद्दों की आवाज उठाने वाला कोई तो होना चाहिए..सावरकर आपको बिजली देने आएंगे नहीं..उन्होंने अपनी रिहाई के लिए ही गिड़गिड़ा लिया वो ही बहुत है..आपकी बिजली के लिए थोड़े गिड़गिड़ाने आएंगे..खैर…

देश में जब सब बिक ही रहा है तो देर सबेस बिजली का भी नंबर आ सकता है..उसकी भूमिका बनने लगी है..कोयला (Koyla) खत्म हो गया है..कहा जा रहा है विदेशों से कोयला बहुत महंगा मिल रहा है..जितनी मांग है उतनी बिजली बना नहीं पा रहे हैं..

दोस्तों अगर किसी कंपनी या उपक्रम को बेचना होता है तो उसका पहला उसूल है कि उस उपक्रम को घाटे में दिखाओ..ऐसा बताओ कि ये उपक्रम अब सरकार पर बोझ है..देश हित में अब इसे बेचना ही ठीक रहेगा..बेचा क्यों और किसे जाता है ये आपको बताने की जरूर नहीं है..

तो किसी भी चीज को बेचने से पहले माहौल बनाना जरूरी होत है..फिर जब माहौल बन जाता है तो कंपनी उद्योगपतियों को सरका दी जाती है..जैसे एयर इंडिया सरका दी गई..जैसे दर्जनों दूसरे उपक्रम मॉनिटाइज किए जा रहे हैं..मतलब गिरवी रखे जा रहे हैं..दोस्तों इस वीडियो में इतना ही..गारंटी देती हूं..बिना डर के इतना खुलकर कोई नहीं..समझाएगा..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *