अपने किसानों (Kisaan) का डाटा नहीं रखती सरकार,हे राम ! संसद में इतनी नाटकबाजी: संपादकीय व्यंग्य

PRAGYA KA PANNA
PRAGYA KA PANNA

दोस्तों सरकार संसद में बिल्कुल बउवा बन गई..सरकार को पता ही नहीं कि कितने किसान (Kisaan) आंदोलन में शहीद हुए..सरकार कहती है उसको नहीं मालूम कि कितने किसान आदोलन में मरे..जब हमको मालूम ही नहीं है तो फिर मुआवजा कैसा..दोस्तों क्या सरकार का ये लॉजिक आपको समझ में आता है..मुझे तो नहीं आता है..जब आपको अपने सिंहासन से 50 किमी दूर बैठे अपने किसानों के बारे में नहीं मालूम तो आप छोड़ दीजिए..

हमारे लखनऊ का टैंपो ड्राइवर भी आपसे बेहतर सरकार चला लेगा..साहब लोग जिस किसान आंदोलन में किलें गड़वा रहे थे..जिस किसान आंदोलन के रास्ते की सड़कें खुदवा रहे थे..जिस किसान आंदोलन (Kisaan) में कटीले तार बिछवा रहे थे..उस किसान आंदोलन में कितने किसान मारे गए कितने शहीद हुए सरकार को कुछ नहीं पता..

सरकार को ये पता था कि किसान मवाली हैं..सरकार को ये मालूम था कि किसान आतंकी खालिस्तानी वगैरह हैं..लेकिन सरकार को ये नहीं मालूम कि कितने किसान (Kisaan) आंदोलन में शहीद हुए..सरकार को ये मालूम चल गया कि सात समंदर पार एक टूल किट बनाई गई है जिससे नरेंद्र मोदी जी की छवि खराब हो रही है.. लेकिन सरकार को ये नहीं मालूम कि उनके अपने सिंहासन से 50 किमी दूर कितने किसान आंदोलन करते हुए शहीद हो गए..

सरकार को ये पता चल गया कि किसान 2022 के चुनाव में बीजेपी की लुटिया डुबो देंगे इसलिए कानून वापस ले लिया लेकिन सरकार को ये नहीं मालूम कि कितने किसान शहीद हुए हैं..सरकार के पास एक एक वोट की गिनती है..एक एक वोट के लिए पन्ना प्रमुख और रजिस्टर प्रमुख बना डाले हैं..वोटों की गिनती इनके पास है लेकिन किसानों (Kisaan) की गिनती इनके पास नहीं है..कितने बड़े वाले बउवा हैं ये लोग..देखिए या तो सरकार जनता को और किसानों को बेवकूफ समझती है..या खुद को ओवर स्मार्ट..

मैं बोलती हूं तो हमारे देश के सूचना प्रसारण मंत्रालय तक को मिर्ची लग जाती है..मुझे अलग अलग रास्तों से कम बोलने के संदेश भिजवाने से अच्छा है..काम अच्छे करो मैं तारीफ करने लगूंगी..मेरा किसी से पर्सनल कुछ नहीं है..देखिए भाईयों सरकार को ये मालूम था किसान पिज्जा खा रहे हैं..सरकार को ये मालूम था कि किसान (Kisaan) आदोंलन में दारू पी रहे हैं..ये मालूम था कि किसान ऐसी में सो रहे हैं..ये मालूम था किसान मच्छर दानियों में सो रहे हैं..

भईया जब आप लोग किसानों (Kisaan) को बेडरूम तक की जानकारी रखते थे..तो जब किसानों की अर्थियां उठ रही थीं वो आपको नहीं मालूम चला..सरकार कितनी भोली है दोस्तों..सरकार कहती है हमारे पास किसानों के मरने का कोई डेटा नही हैं इसलिए आंदोलन में मारे गए किसानों को मुआवजा नहीं दे सकते है सॉरी..ये बात सरकार ने संसद में बताई है..समझ रहे हैं आप दोस्तों ऐसी सरकार चुनने से बेहतर था कि आप किसी भजिया तलने वाले को प्रधानमंत्री बना देते..वो अपने देश की कुछ जानकारी तो रख पाता..

अपको अपने देश के भीतर मालूम ही नहीं है कि कितने किसान आपके खिलाफ आंदोलन करते हुए मरे..किसान तो आपके दुश्मन थे…और जो राजा अपने दुश्मनों की जानकारी ना रख पाए वो कैसा राजा होगा..जब आपको अपने देश के किसानों (Kisaan) के बारे में नहीं मालूम है तो सीमाओं पर दुश्मनों के बारे में क्या खाक जानकारी होगी..इसीलिए चीन हमारे वीर सैनिकों की पीठ पर वार करके भाग जाता है..इसीलिए चीन कभी यहां गांव बसाता है कभी वहां टेंट लगाता है..देखिए दोस्तों किसान कानून किसके लिए लाया गया था..ये जग जानता है..

किसान कानून चुनाव में हार से बचने केलिए वापस किया गया है..सरकार ने अपना डिसीजन बदला है किसानों (Kisaan) के लिए अपना परसेप्शन नहीं..परसेप्शन वही है..जो पहले था..अगर परसेप्शन बदलता तो सरकार कहती कि किसान हमारे अपने हैं..हमें तो नहीं मालूम है क्योंकि हम निकम्मी सरकार हैं.आप हमें शहीद होने वाले किसानों की एक सूची दे दीजिए हम निकम्मे हैं लेकिन हमारे अधिकारी आज भी काम करते हैं..हम उनसे मिलवा लेंगे..

फिर जांच करा लेगें और जितने किसान (Kisaan) आंदोलन में शहीद हुए हैं उनको मुआवजा देंगे..लेकिन सरकार ने कहा हमारे पास किसानों के मरने का कोई डाटा नहीं है..इसलिए मुआवजे का तो सवाल ही नहीं उठता..तो भाई सरकार जी..जिनका डाटा आपके पास नहीं है वो मरे नहीं हैं क्या..उनका कोई अस्तित्व नहीं था क्या…हिंदू मुसलमान के मसले में तो आप कपड़े देखकर पता कर लेते हैं..यहां लाशें देखकर भी आंखें बंद कर रहे हैं नहीं चलेगा ये..अभी रोहिंगिया का ना नाम ले लीजिए दिखिए कैसे फुदकेंगे कितने किधर से आए सब बता देंगे.लेकिन किसानो की बात पर आई एम सॉरी बाबू..

सरकार से बेहतर पनवाड़ी की दुकान है..सरकार से ठीक डाटा तो पनवाड़ी रखता है..कितनी लौंग खत्म हुई..कितनी इलायची बची है..कत्था चूना कब तक चलेगा…पान का पत्ता कितना (Kisaan) सड़ा है उसे सब मालूम होता है..लेकिन सरकार को नहीं मालूम कि उनके अपने देश के भीतर..उनकी अपनी खोपड़ी पर बैठे किसनों के बीच 700 किसान मरे या नहीं मरे..

किसान (Kisaan) संगठन और विपक्ष कहता है कि आपको नहीं मालूम कोई बात नहीं हम डाटा देते हैं आप मुआवजा दीजिए..लेकिन सरकार ने मजबूरी में कानून वापस लिया है..दुश्मन से मजबूरी में संधि करनी पड़ जाए तो इसका मतबल ये नहीं है कि दुश्मनी दोस्ती में बदल गई..बदले की भावना सीने में सुलगती तो रहती ही है..दोस्तों इस मुद्दे पर आपको क्या सोचना है अपनी राय कमेंट में बताईये..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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