फ्रंटलाइन वर्कर कौन होते हैं, राज्य पत्रकारों को क्यों बना रहे हैं फ्रंटलाइन वर्कर ? पढ़ें-

कोरोना महामारी को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मीडिया कर्मियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने पत्रकारों, जजों और सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया है.

सभी मीडिया कर्मियों का हो कोरोना वैक्सीनेशन

CM योगी ने टीम-9 के साथ समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश के सभी मीडिया कर्मियों का वरीयता पर कोरोना वैक्सीनेशन का निर्देश दिया है. वैक्सीनेशन के लिए टीमें खुद जाकर संस्थानों में कैंप लगाएंगी और टीकाकरण किया जाएगा. यूपी में पहले चरण में 9 हजार से अधिक सक्रिय केस वाले जिलों लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली और मेरठ में वैक्सीनेशन किया जा रहा है.

फ्रंटलाइन वर्कर किसे कहते हैं

फ्रंटलाइन वर्कर वो होते हैं जो खुद को ख़तरे में डालकर रोज़ दूसरों की ज़िंदगी बचा रहे हैं. लोगों को जागरूक कर रहे हैं. लोगों की परेशानियों को सरकार के सामने रख रहे हैं. जरूरतमंद लोगों को सेवायें प्रदान कर रहे हैं. समुदाय के बीच जा कर उनको टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित करना इसके फायदे बताना. फ्रंटलाइन वर्कर में मीडियाकर्मी, सोशल वर्कर्स, पुलिसकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता आते हैं.

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सरकारें क्यों बना रही हैं फ्रंटलाइन वर्कर

मीडिया देश का चौथा स्तम्भ है जिसके जरिये हर इंसान को अपने शहर से लेकर देश विदेश तक की जानकारी होती है. कोरोनाकाल में पत्रकार अपनी जान को जोखिम में डाल कर हालातों की सही जानकारी देने के लिए मैदान में उतरे हैं. तभी आज लोगों को पता चल पा रहा है कि कहाँ पर क्या कमी है और कौन लापरवाही कर रहा है. इसमें कई पत्रकार संक्रमित भी हुए और कई ने अपनी जान भी गवां दी है. इसको देखते हुए देश के कई राज्यों में मीडिया कर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने की मांग उठ चुकी हैं. ये भी कहा गया था कि कोरोन संक्रमण काल में पत्रकार भी जान जोखिम में डालकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं. जब लोग अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हैं, उस समय पत्रकारों ने पंचायत चुनाव हो या ट्रामा सेंटर से लेकर गांव-गांव जाकर अपना काम किया है. लोगों को जागरूक करने में इनकी अहम भूमिका भी है. उनको पहले वैक्सीन लगाईं जाए. कुछ सरकारों ने अपने यहाँ मीडिया कर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित भी कर दिया है इसलिए और सरकारें भी इस पर फैसला कर रही हैं.

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इन राज्यों में पहले से हो रहा वैक्सीनेशन

वैक्सीनेशन के लिए जिन्होंने कोविन पोर्टल या आरोग्य सेतु एप पर पंजीकरण करा लिया है, उनके लिए शुक्रवार शाम से स्लॉट ओपन कर दिया गया है. टीकाकरण प्रभारी डॉ अजय घई ने कहा था कि 45 पार वाले लोगों का टीकाकरण पहले की तरह चलता रहेगा. बतादें कि बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों ने अपने यहाँ मीडिया कर्मियों और उनके परिवार के लोगों के लिए वरीयता पर फ्री वैक्सीनेशन करने का ऐलान किया था.

मीडिया कर्मियों और उनके परिवार का हो फ्री टीकाकरण

CM योगी ने निर्देश दिए हैं कि पत्रकारों को वैक्सीनेशन के लिए अलग से सेंटर एलॉट कर उसको वैक्सीनेशन जोन बनाया जाएगा. अगर जरूरत पड़े तो मीडिया कर्मियों को उनके कार्यस्थलों पर कैंप लगाकर मीडिया कर्मियों के साथ उनके परिवार के 18 वर्ष के अधिक उम्र के लोगों का भी टीकाकरण करवाएं.

कोरोनावायरस की चपेट में आने के बाद जो लोग नेगेटिव हो गए हैं उन्हें 15 दिन टीके के लिए इंतजार करना पड़ेगा. जिनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव है लेकिन सीटी स्कैन में कोविड के लक्षण मिले हैं. उनका भी टीकाकरण 15 दिन बाद होगा.

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