कश्मीर में बर्फ गिरने के साथ ही आतंक की सफाई तेज

कश्मीर में बर्फबारी से पहले तेज हुआ ऑरेशन ऑल आउट

 

Ulta Chasma Uc – कश्मीर में होने वाली बर्फबारी आतंकियों के काल की वजह साबित होने वाली है. जैसे जैसे बर्फ गिरेगी  वैसे-वैसे आतंकियों की जिंदगी पर मौत का शिकंजा कसता जाएगा. आसमान से गिरती हुई बर्फ  आतंकियों को जंगलों में छिपने नहीं देगी. एक तरफ बर्फ आतंकियों पर काल बनकर मंडरा रही है  दूसरी तरफ सेना की संगीने अतंकिओं की मौत का पता पूछते हुए घूम रही हैं.
सर्दी में गांवों में बस जाते हैं आतंकी

 

ये सर्दी आतंक को उखाड़ फेंकेगी, इस बार का जाड़ा आतंकियों के लिए काल साबित होगा, इस दिसंबर  दफन हो जाएगा कश्मीर घाटी का आतंक, मौत का कफन साबित होगी बर्फ की सफेद चादर, आतंकियों  की मौत आएगी, गांव की तरफ खींच लाएगी, देश के दुश्मनों को बर्फ भगाएगी, मौत अपने पास  बुलाएगी
बर्फबारी से बंद हो जाते हैं घुसपैठ के रास्ते

 

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बर्फबारी के समय खुले जंगलों में रहना आतंकियों के लिए मुमकिन नहीं हो होता है. मजबूर होकर  आतंकी रिहायशी इलाकों में आकर छुपने की कोशिश करेंगे. जहां उनके सामने खुफिया एजेंसियों के  सटीक इनपुट मौत बनकर खड़े होंगे. ये दिन बहुत दूर नहीं है बल्कि काउंटडाउन शुरू हो चुका है. पिछले  एक महीने में जितने आतंकी मारे गए उसकी गवाही आंकड़े देते हैं. ठंड की अकड़ आतंकियों को मौत  के जाल में जकड़ रही है.
सर्दी  में सेना आतंकियों को आसानी से निशाना बनाती है

 

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पिछले एक साल से सेना इसी सर्दी का इंतजार कर रही थी. इस सर्दी के लिए सेना ने पुख्ता तैयारी की  हैं. पूरा जाल बिछ चुका है. पिछले एक साल में सेना ने कश्मीर में अपना इंटेलिजेंस इतना मजबूत  किया है कि घाटी में पत्ता भी हिलता है तो सेना को पता चल जाता है. इनपुट इतने सटीक हैं कि  सिर्फ उसी घर को सुरक्षाबल घेर रहे हैं, यहां आतंकी पनाह लेते हैं.  बारामुला, कुपवाड़ा, टंगधार, उड़ी,  और शोपियां के ऊपरी इलाकों में बर्फ गिरना शुरू हो गई है..
बर्फबारी में आतंकी ठिकाने काम नहीं आते

 

अतंकियों के जंगली ठिकाने बर्फबारी के बीच रहने के काबिल नहीं बचते. इससे बचने के लिए आतंकी  रिहायशी इलाकों में पहुंच रहे हैं, जो उनकी मौत का कारण बन रहे हैं. जम्मू कश्मीर पुलिस की मदद  से खुफिया एजेंसियों को आतंकियों के छिपे होने के सटीक इनपुट मिले रहे हैं. सुरक्षाबल रात को  आतंकियों को घेर कर सुबह तड़के कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे आतंकियों को बचाने के लिए उनके पत्थरबाज गद्दार दोस्त भी ना इकट्ठा हो पाएं.
कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मत और लश्कर के टॉप कमांडर ढेर

 

पिछले दो साल में कश्मीर में कई बड़े आतंकी कमांडर मारे जा चुके हैं. ऐसे में कश्मीर में सक्रिय  आतंकी बिना आकाओं के ही लड़ रहे हैं. और अब इस लड़ाई में कश्मीर की बर्फ सेना का साथ दे रही  है. बर्फ ने आतंकियों के लड़ने की प्लानिंग कमजोर कर दी है. बर्फ और सेना का पुख्ता इंटेलीजेंस  आतंकियों पर मौत साबित हो रहा है. बुरहान वानी, सज्जाद पाडर, सब्जार भट्ट, जीनत उल इस्लाम  जैसे आतंकी मारे जा चुके हैं..जो आतंकियों को लीड करते थे.
केवल एक महीने में मारे गए 39 आतंकवादी

 

इस महीने की 29 तारीख तक कश्मीर में 39 आतंकवादियों का सुरक्षा बलों ने सफाया कर दिया है.  इनमें नावीद जट्ट जैसे टॉप आतंकवादी कमांड भी शामिल हैं. ये पिछले दो साल में किसी एक महीने में  मारे जाने वाले आतंकवादियों की सबसे बड़ी तादाद है. आतंकवादियों के ज़ुल्मों से परेशान कश्मीरी  अवाम अब टॉप आतंकवादी कमांडर्स के बारे में भी सुरक्षा बलों को सूचना देने में नहीं हिचक रहे हैं. नवंबर , दिसंबर, जनवरी, फरवरी, मार्च ये 5 महीने आतंकियों का पंचनामा कर देंगे.
सीमा पर घुसपैठ फैंसिंग तोड़कर और पहाड़ों से होती है

 

कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ दो तरोकों से होती है पहला तरीका है सीजफायर करके घुसपैठियों  को सीमा पार कराना और दूसरा तरीका है. पहाड़ी इलाकों में बने छोटे छोटे दर्रों से सेना की निगाह से  बचकर चरवाहे बनकर. या फिर किसी और तरीके से भारत की सीमा में दाखिल होना. सेना की सख्ती  के बाद पाकिस्तान की सीजफायर करके अचानक गोलीबारी करके आतंकियों को भारत की सीमा  में  भेजने की चाल पूरी तरह धराशई हो चुकी है.
हाफिज सईद घुसपैठ कराने की फिराक में
हाफिज के पास कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ कराने का एक ही रास्ता बचता है वो है पहाड़ों  से घुसपैठ कराना. और पहाड़ी रास्तों से घुसपैठ बर्फबारी में असंभव जैसी हो जाती है. क्योंकि आतंकी  छोटे-छोटे दर्रों से होकर भारत की सीमा में दाखिल होते हैं. बर्फबारी में उन दर्रों पर बर्फ जम जाती है.  रास्ता खतरनाक हो जाता है. एक चूक अतंकियों को मौत के मुंह में ले जाती है. और बर्फ खिसकने का  डर अलग रहता है. ना चरवाहों की आंड़ मिल पाती है ना धोखेबाजी चल पाती है. बर्फ से बच गए तो  सेना की गोली सीधा स्वागत करती है.
हिमालय की बर्फ आतंकियों से भारत की रक्षा करती है

 

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जैसे जैसे हिमालय की चोटियां बर्फ की चादर से ढकने लगती हैं. हाफिज का हाथ-पांव फूलने लगते हैं.  और भारतीय सेना ने इस बर्फबारी को आतंकियों की मौत की सेल लगाई है. चुन-चुन कर आतंकियों की  अर्थियां सजाई जा रही हैं. सरहद पार से आतंकियों की आपूर्ति ठप हो चुकी है. जितने घाटी में बचे हैं  उनका हाल चूहों जैसा हो रहा है. जिनको सेना एक के बाद एक बिल से बहर निकाल कर मार रही है.
इससे पहले के महीनों में मरने वाले आतंकवादियों की तादात ठंड में आधी होती थी. कश्मीर घाटी में  काम कर रही सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में आतंकवादियों के छिपने की जगह के  बारे में आने वाली खुफिया सूचनाओं में भारी इज़ाफ़ा हुआ है.
पिछले पांच साल की तुलना में 2018 में सबसे ज्यादा आतंकी ढेर

 

सेना ने 5 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा रिकॉर्ड आतंकियों को 2018 में मारा. लश्कर के टॉप कमांडर नावीद के एनकाउंटर के साथ ही आतंकियों के मारे जाने की संख्या 230 पहुंच गई. अब तक मारे गए आतंकियों में ज्यादातर आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा और जैश के थे. दक्षिणी कश्मीर में सबसे ज्यादा 129 आतंकी मारे गए
जैसे जैसे घाटी में आतंकियों की कब्र खुद रही हैं, वैसे-वैसे पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं की दिलों की धड़कन बढ़ती जा रही हैं. हालात ये हैं घाटी में पाकिस्तानी बंदूक थामने में आतंकियों के हाथ कांपने लगे हैं. अब तक लश्कर और हिजबुल के 5 कमांडर मारे गए, आतंकी संगठनों में कमांडर भर्ती होने से डर रहे हैं
बुरहान वानी को कंधा देने वाला कोई आतंकी जिंदा नहीं बचेगा

 

घाटी में वो तमाम आतंकी सेना के निशाने पर थे जो बुरहान वानी के जनाजे को कंधे देने गए थे. जिन जिन आतंकियों ने बुरहान वाली को अपना आदर्श माना उनका वही हाल हुआ जो बुरहान जैसे गद्दारों का हुआ था.
ये टॉप आतंकी कमांडर मारे गए
अबू मातेन और अबू हमास को मारा गया
नवंबर में नावीद जट्ट को मारा गया नावीद लश्कर का टॉप कमांडर था..
1 अप्रैल को शोपियां मे समीर समीर टाइगर को ढेर किया गया
मई, जून और जुलाई में सद्दाम पद्दार को मारा गया
अबू कासिम और अबू माविया जैसे बड़े आतंकी कमांडरों को मारा गया
अक्टूबर में 27 आतंकवादियों को मारा गया
मन्नान वानी, मेहराजुद्दीन बंगरू और सबजर अहमद को ढेर किया गया
नवंबर में आज़ाद दादा, अब्बास भट्ट
उमर मजीद और मुश्ताक मीर को ढेर किया गया
51 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया
5 आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण किया
कश्मीर में सेना का इंटेलिजेंस मजबूत हुआ

 

सेना के मुताबिक कश्मीर खास कर दक्षिणी कश्मीर में हिज़बुल और लश्कर आतंकी संगठन की लीडरशिप लगभग खत्म हो चुकी है. पिछले कुछ महीनों से आतंक विरोधी अभियानों में तेजी लाई गई है और सफलताएं भी मिली हैं. ये सब मुमकिन हो रहा है सुरक्षाबलों को मिली रही ख़ुफ़िया जानकारी से. ख़ुफ़िया विभाग ने पिछले कुछ महीनों से अपना नेटवर्क बेहद मज़बूत किया है.
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