इजराइल और फिलिस्तीन की लड़ाई कब शुरू हुई ? इसके पीछे किसका हाँथ है ? किसको हो रहा फायदा ? जानें पूरा इतिहास-

इजराइल और हमास के बीच जंग जैसे हालात बने हुए हैं और लगातार हवाई हमले हो रहे हैं. इजराइल ने आयरन डोम डिफेंस सिस्टम की वजह से अपनी ज्यादातर आबादी को इन हमलों से बचाए रखा है लेकिन हमास को इस हमले से बहुत नुक्सान हो रहा है.

वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और गोलन हाइट्स पर विवाद

दरअसल इजराइल के मिडिल ईस्ट के इस इलाके में ये संघर्ष कम से कम 100 साल से चला आ रहा है. यहां वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और गोलन हाइट्स जैसे इलाकों पर विवाद है. फिलिस्तीन इन इलाकों समेत पूर्वी यरुशलम पर दावा जताता है. वहीं, इजराइल यरुशलम से अपना दावा छोड़ने को राजी नहीं है.

आइये समझते हैं आखिर ये विवाद शुरू कहाँ से हुआ

जिसको आज हम सब इजराइल के नाम से जानते हैं दरअसल वो पहले फिलिस्तीन था. 1948 के युद्ध के बाद अंग्रेजों ने फिलिस्तीन को दो भागों में बाँट दिया था. आधा इजराइल और आधा फिलिस्तीन को गया. 14 मई 1948 में इजराइल की स्थापना कर दी गई. जिसमें 48% फिलिस्तीन को दे दिया और 44% इजराइल को दे दिया था. इतना ही नहीं अंग्रेजों ने यहाँ अपना भी सेटअप बना लिया जिसका नाम रखा UNO युनाइटेड नेशन आर्गेनाइजेशन. इसने अपने कब्जे में फिलिस्तीन में मौजूद 8% येरुसलम को रखा.

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येरुसलम को अपने कब्जे में रखा

येरुसलम को अपने कब्जे में रखने का मकसद ये था की येरुसलम में तीन पवित्र धर्म रहते हैं. ईसाईयों का मानना है की उनके ईसामसी का जन्म येरुसलम में हुआ था. दूसरे यहूदी जो इस समय इज़राइल में रहते हैं उनका कहना है की उनका मूल स्थान येरुसलम है. और तीसरा मुसलमानों की सबसे पवित्र अलेक्सा मस्जिद यहीं पर है. यही कारण है की UNO ने येरुसलम को अपने कब्जे में रखा था.

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अरब देशों ने जताया विरोध

ये विभाजन अरब देशों को सही नहीं लगा और विरोध शुरू हो गया फिलिस्तीन ने भी कहा की ऐसा नहीं हो सकता और फिलिस्तीन ने अरब देशों के साथ मिल कर इज़राइल पर युद्ध कर दिया लेकिन इज़राइल ने युद्ध में सबको हरा दिया. इस लड़ाई में आधा जेरुसलम शहर इजराइल के कब्जे में आ गया. फिर 7 लाख के करीब फिलिस्तीनी अरब रिफ्यूजी हो गए. पूरे एरिया पर इजराइल का कब्ज़ा हो गया. वेस्ट बैंक और गाज़ा में फिलिस्तीनियों को जगह मिली.

इज़राइल का मकसद ‘कब्ज़ा’

लेकिन ये लड़ाई यहाँ नहीं रुकी ये लड़ाई आज भी जारी है. इज़राइल का मकसद था की फिलिस्तीन को लड़ाई के लिए उकसाओ फिर ये लड़ाई करेंगे और इनको हरा कर उनकी ज़मीन कब्ज़ा लेंगे. शुरू ये यही चलता आया. 1956 में इज़राइल ने लड़ाई किया और फिलिस्तीन की ज़मीन कब्ज़ा ली फिर 1967 में लड़ाई की और फिलिस्तीन की जमीन पर कब्ज़ा कर लिया.

22% बचा फिलिस्तीन

इसी तरह 1973 और 1982 के युद्ध के बाद इज़राइल में फिलिस्तीन सिर्फ 22% ही बचे बाकी सबपर इज़राइल ने कब्ज़ा कर लिया. 2011 में फिलिस्तीन के दो भाग हो गए एक वेस्टर्न बैंक और दूसरी तरफ छोटा सा बचा हुआ है जिसको गाजा पट्टी कहते हैं. अब इज़राइल का ये मकसद है की फिलिस्तीन को गाज़ा पट्टी से भी हटा कर उसपर कब्ज़ा कर लिया जाए.

यहाँ एक बात और बतादें कि फिलिस्तीन का एरिया जो वेस्टर्न बैंक कहते हैं वो अरब देश से समर्थित है यहाँ के लोग शांत रहते हैं यहाँ सब डेमोक्रेटिक तरीके से होता है. लेकिन गाजा ने ईरान का समर्थन है. गाज़ा में एक संगठन है जिसका नाम है हमास. हमास कहता है कि हम चुप नहीं बैठेंगे और इज़राइल को जवाब देंगे. हमास के पास युद्ध करने के लिए सिर्फ रॉकेट ही हैं बाकी कोई हथियार नहीं हैं. हमास के पास जो रॉकेट हैं इसको कासम रॉकेट कहते हैं ये रॉकेट पब्लिक के लिए खतरा है. वहां तबाही मचा सकता है. हमास को ये रॉकेट ईरान से मिलते हैं.

फिलिस्तीन के पास नहीं हैं हथियार

अब आप सोच रहे होंगे की हमास लड़ता है लेकिन फिलिस्तीन का वेस्टर्न बैंक वाला एरिया क्यों नहीं लड़ता. तो हम आपको बता दें की फिलिस्तीन के पास लड़ने के लिए कोई हथियार ही नहीं है. उनके पास सिर्फ पत्थर और लाठी हैं. जिससे कोई युद्ध नहीं लड़ा जा सकता. वहीं इज़राइल के पास अपनी पूरी आर्मी है और बड़ी बड़ी मिसाइल और हथियार हैं.

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2007 में फिलिस्तीन में एक टेम्पररी सरकार बनी, जो अभी तक चल रही है. 2014 में हमास और इजराइल में फुल्टू जंग शुरू हो गयी. वेस्ट बैंक पर इजराइल का कब्ज़ा है. गाजा में फिलिस्तीनी रहते हैं. पर इजराइल की मिलिट्री ने वहां डेरा डाल रखा है. खाना-पीना मुश्किल कर दिया है. फिलिस्तीन में सक्रिय दो चरमपंथी संगठन इजराइल के निशाने पर रहते हैं. पहला- राजनीतिक रूप से ताकतवर हमास. दूसरा- फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद यानी PIJ. इनमें हमास सबसे प्रमुख है, जिसका गाजा पट्‌टी पर कब्जा है. ताजा विवाद में यही इजराइल पर रॉकेट से हमले कर रहा है. मौजूदा समय में फिलिस्तीन अब 12% ही बचे हैं.

इजराइल की इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक हमास के पास J-80, M-75, फज्र-5 सेकेंड जनरेशन M-75 रॉकेट हैं. इजराइल का मानना है कि हमास के पास 5 से 6 हजार रॉकेट हो सकते हैं. हमास के पास 40 हजार लड़ाके भी हैं. वहीं, PIK के पास 9 हजार लड़ाके और 8 हजार शॉर्ट रेंज रॉकेट हैं. इस बार हमास ने हमले के शुरुआती 5 मिनट में ही 137 रॉकेट दाग दिए. अब तक उसकी तरफ से करीब 3 हजार रॉकेट दागे जा चुके हैं.

इजराइल ने इन हमलों से बचने के लिए आयरन डोम बना रखा है. आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम है. इसे राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने मिलकर तैयार किया है. अमेरिका ने इसमें आर्थिक और तकनीकी मदद दी थी. आयरन डोम 2011 से एक्टिव हुए थे. जिसने अब तक इजराइल की बड़ी आबादी को हमास के रॉकेट हमलों से बचाकर रखा है. गाजा से आने वाले शॉर्ट रेंज रॉकेट्स को जमीन पर गिरने से पहले हवा में तबाह करना इनका मकसद था.

लेकिन हमास की तरफ से आए कई रॉकेट इजराइल की जमीन पर गिरने में कामयाब रहे. इससे कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है. इसमें अब तक 5 इजराइली लोगों की मौत हो चुकी है. साथ ही बीते दो दिन में इजराइल की एयरफोर्स ने हमास के ठिकानों पर 130 से ज्यादा हवाई हमले किए हैं. एयरफोर्स के जरिए फिलीस्तीन में भारी तबाही मचाई है. इस जंग में अब तक 6 इजराइली (एक भारतीय महिला भी) और 53 फिलीस्तीनी नागरिकों की मौत हुई है.

बतादें कि इजराइली आर्मी और एयरफोर्स के निशाने पर हमास के 500 से ज्यादा ठिकाने हैं. इजराइल के पास ज्यादातर फाइटर प्लेन F-सीरीज के हैं, जो अमेरिका में बने हैं. इजराइल के डिफेंस मिनिस्टर बेनी गैंट्स ने ऐलान कर दिया है कि हमारी सेना के गाजा पट्टी और फिलीस्तीन में हमले बंद नहीं होंगे. हम अब तब तक रुकने को तैयार नहीं हैं, जब तक दुश्मन को पूरी तरह शांत नहीं कर देते. इसके बाद ही अमन बहाली पर कोई बात होगी.

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