चुनाव आयोग नहीं ‘गुलाम’ आयोग कहिए : संपादकीय व्यंग्य

दोस्तों हिंदुस्तान के चुनाव आयोग पर आरोप लगा कि चुनाव आयोग ने देश की बीजेपी सरकार की चमचागीरी करने के चक्कर में अपना जमीर गिरवी रख दिया..हिंदुस्तान का चुनाव आयोग केंद्र की बीजेपी सरकार के पैरों की जूती बनकर बन गया..दोस्तों चुनाव आयोग अब चाहता है कि उनकी चाटुकारिता की..मतलब उनकी और केंद्र सरकार की मिलीभगत की..खबरें देश का मीडिया ना दिखाए..चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट  में कहा हुजूर भारत की अदालतों में जो चुनाव आयोग की लानत मलानत होती है..चुनाव आयोग के घटिया और एकतरफा कामों के लिए जो फटकार हिंदुस्तान के अलग अलग कोर्ट में लगाई जाती है वो हिंदुस्तान का मीडिया ना दिखाए..

चुनाव आयोग की बात आसान भाषा में समझिए तो ये है कि..कोर्ट माई बाप आप चाहे जितना गरिया लो आप चाहे जितना फटकार लो लेकिन देश के अखबारों को ना छापने दो..मीडिया को ना दिखाने दो..हमारी बहुत बेइज्जती होती है..देखिए दोस्तों हिंदुस्तान को बताया गया है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है..उसके ऊपर किसी का जोर नहीं चलता उसे अपने हिसाब से फैसले लेने का आधिकार है..लेकिन ये सिर्फ कहने की बाते हैं ये पूरा हिंदुस्तान जानता है कि चुनाव आयोग किसकी गुलामी करता है..

और यहां गुलामी का ईनाम भी मिलता है..हिंदुस्तान की कई वेबसइट्स में खबरें छपीं की चुनाव आयोग के पूर्व मुखिया को गोवा का गवर्नर बनाकर सरकार वफादारी का ईनाम भी देगी..इस खबर की पुष्टि अभी मेरे पास नहीं है लेकिन भारत की मीडिया में इसकी सुगबुगाहट है..लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने गुलामी की हर सीमा पार कर दी..देश को कोरोना के मुंह में झोंक दिया..रैलियां होती रहीं और चुनाव आयोग कान में तेल डाले सोया रहा..ईवीएम नेताओं के घर रखवाता रहा..असम में 90 वोटरों से 178 वोट डलवा दिए…

-----
       मेरी मत मानिए हिंदुस्तान में मैं तो खरी बात करने के लिए बदनाम हूं...प्रशांत किशोर से समझ लीजिए प्रशांत किशोर वही हैं जिन्होंने 2012 में गुजरात में मोदी को जिताया था..2014 में बीजेपी को हिंदुस्तान की सत्ता दिलाई थी..प्रशांत किशोर वही हैं जो हिंदुस्तान की पार्टियों को चुनाव लड़वाते हैं..उनका कैंपेन संभालते हैं उसके एवज में पैसे लेते हैं..उनका किसी एक पार्टी के लिए कोई मोह नहीं है..जहां पैसे मिलते हैं..जिसका काम मिलता है उसका कैंपने करते हैं..प्रशांत किशोर ने खुलेआम कहा है कि बंगाल चुनाव में हिंदुस्तान के चुनाव आयोग ने बीजेपी का पक्ष लिया..

   

भारत के चुनाव आयोग और केंद्र की बीजेपी सरकार के याराने को भारत की अदालतों ने इंडायरेक्टली कई बार खोला है.. इससे चुनाव आयोग को बड़ी दिक्कत होती है…मैं अपने हिंदुस्तान की अदालतों की आभारी हूं..अगर अदालतें ना होतीं तो देश अंधेर नगरी में तब्दील हो गया होता..जब चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं अपना ईमान गिरवी रख दें तो देश में लोकतंत्र का भगवान ही मालिक है..

-----

दोस्तों सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से साफ कहा है कि अदालतों में सुनवाई के दौरान दी जाने वाली टिप्पणी पर रिपोर्टिंग करने से मीडिया को नहीं रोका जा सकता है..दोस्तों चुनाव आयोग को मद्रास हाईकोर्ट की उस टिप्पणी से मिर्ची लगी है कि जिसमें हाईकोट ने कहा था कि कोरोना फैलाने का जिम्मेदार चुनाव आयोग है चुनाव आयोग के अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलाया जाना चाहिए..

हिंदुस्तान की नागरिक होने के नाते मैं हिंदुस्तान के हाईकोर्ट के साथ हूं..चुनाव आयोग ने अपने मालिकों को जिताने के लिए..उनकी चमचागीरी करने के चक्कर में रैलियों में कोरोना के प्रोटोकाल फालो नहीं कराए..रैलेयों की लोगों की संख्या सीमित नहीं की ये सौ फीसदी सच है..अब चुनाव आयोग चाहता है कि उसके खिलाफ उसके कुकर्मों के खिलाफ कोई मुंह ना खोले..


देश के सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया महत्त्वपूर्ण एवं शक्तिशाली प्रहरी है और उसे उच्च न्यायालयों में हुई चर्चाओं की रिपोर्टिंग से रोका नहीं जा सकता है..दोस्तों आप देख रहे हैं..ये लोग हिंदुस्तान के भीतर कैसी अंधेर चाहते हैं..अगर अपनी इज्जत की इतनी हो चिंता थी तो चुनाव आयोग ने क्यों अपने कर्तव्य नहीं निभाए..क्यों सरकार की जूती अपने सिर पर रखकर कोरोना का नंगा नाच देखता रहा..क्यों रैलियां नहीं रोकीं..क्यों कोरोना प्रोटोकॉल फॉलो नहीं कराए..क्यों रैलियों में दो गज दूरी फॉलो नहीं कराई गई..ये चाहते हैं कि इनके कुकर्मों पर इनकी मिलीभगत पर इनकी चाटुकारिता पर कोई आवाज ना उठाए..दोस्तों इस बारे में आपकी क्या राय है..कमेंट करके बताईये..चलते हैं राम राम दुआ सलाम..जय हिंद..

http://ultachasmauc.com/covid19indiaharshvardhanmodibangal/

-----

DISCLAMER- लेख में प्रस्तुत तथ्य/विचार लेखक के अपने हैं. किसी तथ्य के लिए ULTA CHASMA UC उत्तरदायी नहीं है. लेखक एक रिपोर्टर हैं. लेख में अपने समाजिक अनुभव से सीखे गए व्यहवार और लोक भाषा का इस्तेमाल किया है. लेखक का मक्सद किसी व्यक्ति समाज धर्म या सरकार की धवि को धूमिल करना नहीं है. लेख के माध्यम से समाज में सुधार और पारदर्शिता लाना है.

2 thoughts on “चुनाव आयोग नहीं ‘गुलाम’ आयोग कहिए : संपादकीय व्यंग्य

  • May 3, 2021 at 8:58 pm
    Permalink

    बहुत सुन्दर डूब मरो बेसर्मो । देश की एक साधारण सी बटीबिना डरे बिना थके खरी खोटी सुनाती है।फिर भी शर्म नही आती।

    Reply
  • May 4, 2021 at 8:08 am
    Permalink

    आप बहुत अच्छी पत्रकार हैं और बहुत ही ज्यादा अच्छे से अपना कर्तव्य का पालन करती हैं,कोई संदेह नही।
    पर आप अपने न्यूज़ में “भारत” देश के लिए भारत या इंडिया उपयोग करें,हिंदुस्तान का नहीं।
    आप भारत का संविधान खोलकर देख लीजिए आपको हिन्दुस्तान शब्द नहीं मिलेगा।हिंदुस्तान नाम से कोई देश ही नही है दुनिया में।आप इसके लिए रिसर्च करके लोगों को भी बता सकती हैं।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *