पाकिस्तान को ‘जिनेवा संधि’ के तहत भारतीय कमांडर अभिनंदन को छोड़ना ही पड़ेगा, ये हैं नियम-

भारतीय सेना का एक मिग-21 विमान बुधवार को गुलाम कश्मीर में क्रैश हो गया था. इस विमान के पायलट और भारतीय वायु सेना के विंग कंमाडर को पाकिस्तान ने गिरफ्तार कर लिया है. उस कंमाडर का नाम अभिनंदन वर्तमान है.

Indian Pilot Arrested BY Pakistan Under Geneva Convention Rules
Indian Pilot Arrested BY Pakistan Under Geneva Convention Rules

बुधवार को पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भारतीय सीमा में घुस आये थे उन्ही का जवाब देने के दौरान भारतीय वायुसेना का एक मिग-21 बिसोन विमान क्रैश होकर पड़ोसी देश की सीमा के अंदर जा गिरा. विमान में बैठे भारतीय वायुसेना का विंग कंमाडर घायल हो गया. पायलट अभिनंदन की जो शुरुआती वीडियो पाकिस्तान से आए हैं, उनमें वो ज़ख़्मी दिख रहे हैं. उनके चेहरे पर रक्‍त फैला हुआ है. एक वीडियो में अभिनंदन को कुछ लोग पीटते हुए दिख रहे हैं. एक अन्य वीडियो में अभिनंदन की आंखों पर पट्टी है.

हालांकि पाकिस्तान भारतीय पायलट का कुछ नहीं कर पाएगा क्योंकि युद्धबंदियों पर जिनेवा संधि के नियम लागू होते हैं. पाकिस्तान को भारतीय पायलट के साथ मानवीय व्यवहार करना होगा. भारत ने पाकिस्तान के इस कृत्य पर सख़्त लहजे में कहा है कि पाकिस्‍तान ने अंतरराष्‍ट्रीय कानून का सरासर उल्‍लंघन किया है. इस कानून के तहत ही भारत ने अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर अपनी गुहार लगाई है और अपनी शिकायत दर्ज की है.

आइये जानते हैं क्या है जिनेवा संधि:- युद्ध में बनाये गए बंदियों के लिए भी बाकायादे एक अंतरराष्‍ट्रीय कानून है. पहली बार 1864 दुनिया के कुछ मुल्‍कों ने युद्ध में बनाये गए बंदियों के अधिकारों को लेकर एक करार किया था. इस संधि को मानवता के लिए जरूरी कदम बताया गया था. इसे जेनेवा संघि (Geneva Convention) कहते हैं. इसके बाद 1906 और 1929 में क्रमश: दूसरी और तीसरी संघि हुई थी. दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद 1949 में 194 देशों ने जेनेवा संधि पर हस्‍ताक्षर किए थे. युद्ध के दौरान जेनेवा संधि देशों के लिए एक आचार सहिंता की तरह कार्य करती है.

जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को किसी भी तरह से डराया-धमकाया या उनका अपमान नहीं किया जा सकता है. उन्हें लेकर जनता में उत्सुकता भी पैदा नहीं की जा सकती है. पकड़े जाने पर युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने का प्रावधान किया गया है. युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जा सकता है या युद्ध के बाद उन्हें लौटा दिया जाता है. इसी को देखते हुए वायुसेना के पूर्व अधिकारियों ने विंग कमांडर की सकुशल वापसी की उम्मीद जताई है.