टीवी पर तो पाकिस्तान दिखाते थे..ऑक्सीजन किस मुंह से मांगते हो : संपादकीय

कहते हैं वैक्सीन लगवा ली तो भी कोरोना हो जाएगा..वैक्सीन कोरोना रोकने की गारंटी थोड़े है..कहा एक बार कोरोना पॉजिटिव होकर ठीक हो गए हो तो दोबारा बीमार होने पर टेस्ट ना करवाना..हम पूछे काहे..तो बोले टेस्टिंग लैब पर बहुत दबाव है…दूसरी बार झेल लेना हमारे पास मत आना..झूठ नहीं कह रहे हैं..हम देश की मेन स्ट्रीम मीडिया नहीं हैं जो आपसे झूठ बोलेंगे..बहुत खोजकर और सोच समझकर बोलते हैं..और हमेशा सच बोलते हैं..

आप बताओ किसी देश में अगर अस्पतालों में बेड ना हों दवाई ना हों..ऑक्सीजन ना हो..श्मसान में जगह ना हो..चीख पुकार मची हो..तो उस देश की व्यवस्थाएं कैसी होंगी..वहां के राजा ने अपनी प्रजा के लिए क्या प्रबंध किये होंगे.. वहां की सरकारों की प्राथमिकताएं क्या होंगी..जिस देश का मीडिया रोज ये बताए कि पाकिस्तान भूखो मर रहा है..जिस देश का मीडिया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और उनकी बेगम की कोल कपोल कहानियां सुनाए..जिस देश का मीडिया आपको ये बताए कि पाकिस्तान दाने दाने को मोहताज है..कर्ज चुकाने का पैसा नहीं है..जिस देश का मीडिया पाकिस्तान के टिकटॉक वीडियोज पर आधे आधे घंटे के शो प्लान करे..अपने देश के बारे में अपने देश की नाकाम सरकारों के बारे में लोगों को ना बताए उसे छिपाए..उस देश की मीडिया को क्या कहेंगे..कोई बिका हुआ कहता है..कोई दलाल कहता है..कई बार मुझे भी ट्रोल होना पड़ा है..बुरा लगता है..लेकिन जब देश की मीडिया ने बबूल का पेड़ बोया है..तो फूल कहां से होगा..जब मंदिर मस्जिद ही मांगे हैं तो आस्पताल कहां से उग आएंगे..कभी हिंदुस्तान की सरकार से अस्पताल का स्कूल का दवाई का पढ़ाई का शिक्षा का सवाल किया होता तो आज जलते श्मसान नहीं दिखाने पड़ते..न्यूज चैनलों को अपने ही कर्मचारियों की मौतों पर आंसू नहीं बहाने पड़ते..

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दोस्तों मैं अपनी बात करती हूं..मैंने जब तक मास कॉम की पढ़ाई की उस दरमियान और जब नौकरी करनी शुरू की उस दरमियान तक भारत का सबसे बड़ा इश्यू अयोध्या के मंदिर मस्जिद को तौर पर ही देखा..पत्रकारिता की स्टूडेंड और फिर नौकरी के दरमियान मैंने इससे बड़ा इश्यू हिंदुस्तान में देखा ही नहीं..जब आप चाहते ही मंदिर मस्जिद थे तो आपको कौन सी सरकार अस्पताल देने आती..मेरे प्यारे भारत के लोगों..अपनों को खो चुके मेरे भाईयों..मेरी बहनों..मुझसे नफरत करने वालों मेरे दुश्मनों..मुझसे मोहब्त करने वाले मेरे भाईयों मांगना पड़ता है..मांगोगे तभी मिलेगा..हमने अगर कभी अस्पातल मांगे होते..अस्पतालों पर टीबी पर डिबेट हुई होंती तो शायद हिंदुस्ता की तस्वीर कुछ और होती..हमें ईरिक्शा पर लाशें लादकर ना ले जानी पड़तीं..

      सांस यानी ऑक्सीजन तो मूल भूत आवश्यकताओं में है..लेकिन कोरोना के एक साल तक हम ऑक्सीजन की सुविधा विकसित नहीं कर पाए हैं.. भारत में मरते मरीज को सांस लेने का अधिकार नहीं है...आप बताईये इतिहास में ऐसा कभी पहले हुआ था..देश मरता हो तो मर जाए..आप आपके नातेदार..रिश्तेदार तड़पकर मरते हों तो मर जाएं..लेकिन हिंदुस्तान में चुनाव स्थगित नहीं हो सकता है..ऑक्सीजन अस्पताल और दवाई जाएं चूल्हे भाड़ में लेकिन चुनाव नहीं रोके जा सकते..कोरोना की वजह से एक भी चुनाव या पॉलिटिकल इवेंट पूरे देश में कहीं रुका हो तो बताओ..इस देश में बेशर्मी से रैलियों का नंगा नाच किया गया है..
हिंदुस्तान के उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाई कोर्ट तक ने सरकार से कह दिया..कोरोना से लोगों की मौतें नहीं हो रही हैं..ये नरसंहार है..आप नरसंहार का मतलब जानते हैं..नरसंहार का मतलब है एक साथ लोगों को इकट्ठा करके जानबूझकर उनकी हत्या कर देना..सोचिए हाई कोर्ट को कहना पड़ गया कि ये नरसंहार है..फिर भी किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता..सरकारों को फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उनको मालूम हिंदुस्तान की जनता हिंदू मुसलमान में बंटी हुई है...हिंदुस्तान की जनता नेताओं की फैन है..और फैन कभी अपने हीरो से सवाल नहीं कर सकता..हिंदुस्तान की जनता से सवाल करने का हक छीन लिया गया है..

चलिए सवाल करने के लिए मैं ही बदनाम हूं तो मैं हिटलरशाही की एक कहानी और बता देती हूं..उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार का मामला है उत्तर प्रदेश वही जगह है जहां मेरा घर है.. मैं प्रज्ञा मिश्रा अपनी उत्तर प्रदेश की सरकार से कहती रह गई लॉकडाउन लगाओ..श्मसान पट गए हैं..अस्पतालों में बेड नहीं है..हाहाकार है..कुछ लोग लॉकडाउन लगवाने के लिए कोर्ट तक पहुंच गए..हमारे हाईकोर्ट तक ने कह दिया कि बीजेपी सरकार तुरंत लॉकडाउन लगाए..यूपी की बीजेपी सरकार ने कहा माईबाप लॉकडाउन लगा दिया तो गरीब आदमी भूखों मर जाएगा..डोन्ट वरी हमारी सरकार सब संभाल लेगी..सरकार के पास इतना समय था कि सुप्रीम कोर्ट से लॉकडाउन रुकवाने का स्टे ऑर्डर ले आई..अब लगभग 10 दिन बाद अब क्या हुआ..अब क्यो लगा दिया लॉकडाउन..

अब यूपी को संभाल नहीं पाओगे क्या..सैकड़ों लोगों की जिंदगियां बर्दाद करके अब क्यों लगा दिया लॉकडाउन..हिटलर शाही है बिल्कुल कोर्ट कहे सुप्रीम कोर्ट कहे किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता..ये जब चाहेंगे रैलियां करेंगे जब चाहेंगे लॉडाउन लगाएंगे जब जाहेंगे हटाएंगे..जब चाहेंगे लोगों की जिंदगी से खेलोगे..मैं पूछती हूं आप लोग तो गरीब की रोजी रोटी बचा रहे थे..अब क्यों लगा दिया लॉकडाउन..या फिर बुद्धिहीन लोगों के सहारे सरकार चल रही है..मुझे पूछने का अधिकार है..मुझे पूछने का हक है..मैं पूछूंगी..देश का मीडिया मौन रहे..मौतों का तांडव देखता रहे तो देखता रहे..मैं एक बाद बहुत क्लियरल कहती हूं..जब देश की जनता धर्म की अफीम चांटकर अंधभक्ती के नशे में झूमेगी तब तक कोरोना से ज्यादा सरकारें जान लेंगी..चलती हूं राम राम दुआ सलाम..जय हिंद..

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