इंडिया गेट पर बुझ गई बरसों से जल रही अमर जवान ज्योति : संपादकीय व्यंग्य (India Gate Amar Jawan Jyoti)

PRAGYA KA PANNA
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इंडिया गेट (India Gate Amar Jawan Jyoti) वो इमारत जिसे 1921 में अंग्रेजों ने बनवाया..इंडिया गेट वोट इमारत जिस पर पहले विश्वयुद्ध में शहीद होने वाले 84 हजार सैनिकों के नाम लिखे हैं..इंडिया गेट वो इमारत जिसके नीचे साल 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के सम्मान में अमर जवान ज्योति जलाई गई..

ये ज्योति इंडिया गेट के नीचे इंदिरा गांधी की सरकार में जलाई गई और 50 साल से जलने वाली अमर जवान ज्योति को मोदी सरकार में बुझाकर नेशनल वॉर मेमोरियल में शिफ्ट कर दिया गया है..इसी पर भारत में कंट्रोर्सी हो गई है..दोस्तों आज हम इसी को समझेंगे..कि क्या अमर जवान ज्योति को बुझाकर दूसरी जगह पर जलाने का फैसला ठीक है..चुनावों से ठीक पहले मोदी सरकार ने ऐसा क्यों किया.

दोस्तों 1971 का समय था..इंदिरा गांधी ने एक कड़ा फैसला लिया..पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाने जाने वाले बांग्लादेश को पाकिस्तान के चंगुल से आजाद करा लिया..भयंकर युद्ध हुआ..पाकिस्तानी सेना ने सरेंडर कर दिया..लेकिन इस युद्ध में भारत के 3 हजार 8 सौ तेतालिस जवान शहीद हो गए..

1972 में शहीद हुए जवानों की शहादत के सम्मान में नई दिल्ली में संसद से कुछ ही दूरी पर पड़ने वाले इंडिया गेट के नीचे..अमर जवान ज्योति (India Gate Amar Jawan Jyoti) जलाई गई..इंदिर गांधी ने इसका उद्घाटन किया..कहा गया ये अखंड ज्योति हमें हमारे शहीद वीर जवानों के हौसले वीरता और साहस की याद दिलाएगी..

अब साल है 2022 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी अमर जवान ज्योति (India Gate Amar Jawan Jyoti) को बुझाकर उसे शिफ्ट कर दिया है नेशनल वॉर मेमोरियल में जहां पर आजादी के बाद से अब तक शहीद होने वाले 26 हजार 4 सौ 66 सैनिकों के नाम लिखे हैं..अमर जवान ज्योति बनवाई इंदिर गांधी ने 1972 में..नेशनल वॉर मेमोरियल बनवाया 2019 में नरेंद्र मोदी ने..अमर जवान ज्योति का उद्घाट किया इंदिरा गांधी ने और नेशनल वॉर मेमोरियल का उद्घाटन किया नरेंद्र मोदी ने विवाद यहीं पर है..

मोदी सरकार का कहना है कि इंडिया गेट के नीचे जहां पर अमर जवान ज्योति जल रही है..वहां पर 71 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के नाम नहीं लिखे हैं..इसलिए अमर जवान ज्योति को शिफ्ट किया जा रहा है..उस जगह पर जहां पर उनके नाम लिखे हैं..ये शिफ्टिंग है ना कि बुझाया जा रहा है..कांग्रेस इसे इंदिर गांधी से जोड़कर देखती है..और मोदी सरकार सब कुछ अपने राष्ट्रवाद के हिसाब से चलाना चाहती है..

दोस्तों चुनाव से पहले अमर जवान ज्योति की शिफ्टिंग एक राजनीतिक शिफ्टिंग है..इसमें कोई दो राय नहीं है..क्योंकि विश्वगुरु बनने जा रहे भारत के पास इतनी पीएलजी गैस तो होगी कि एक एक्सट्रा ज्योति (India Gate Amar Jawan Jyoti) जलाई जा सकती..क्योंकि अमर जवान ज्योति को जलाने में हफ्ते में 15 एलपीजी सिलेंडर लगते हैं..50 साल से अमर जवान ज्योति को रक्षा मंत्रालय से रिटायर्ड चंदर सिंह बिष्ट जलाते थे..

अमर जवान ज्योति के बीच में सोने के अक्षरों से ‘अमर जवान’ लिखा हुआ..इसके ऊपर एक L1A1 सेल्‍फ लोडिंग राइफल रखी है और उसपर एक सैनिक का हेलमेट मुकुट की तरह रखा गया है..जो हमारे अंदर राष्ट्रभक्ति का भूचाल ला देता है..अमर जवान ज्योति वैसे तो चार कलशों में जलती है..लेकिन चारों कलश बड़े पर्व त्योहारों पर जलाए जाते हैं…

पूरे साल एक ही ज्योति को जलाया जाता है. अमर जवान ज्‍योति पर सेना, वायुसेना और नौसेना के सैनिक तैनात रहते हैं..1972 से 2006 तक इस ज्‍योति को जलाने के लिए LPG का इस्तेमाल किया जाता था…उसके बाद अब पाइप लाइन वाली पीएनजी इस्‍तेमाल की जानी लगी है..हर साल गणतंत्र दिवस परेड से पहले राष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुख अमर जवान ज्‍योति (India Gate Amar Jawan Jyoti) पर माल्‍यार्पण करते हैं..

अब ये सारी चीजें..मोदी सरकार में बने राष्‍ट्रीय युद्ध स्‍मारक में शिफ्ट कर दी जाएंगी..इंडिया गेट पर एक समय पर हजारों की भीड़ जमा हुआ करती थी..लेकिन अब यहां पर नेशनल विस्टा प्रोजेक्ट बन रहा है..दोस्तों अमर जवान ज्योति की शिफ्टिंग ठीक है..लेकिन इंडिया गेट की लौ को बुझा देना ठीक नहीं है..क्योंकि भवनाएं इमोशन और यादें..राजनीति से बहुत ऊपर हैं..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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