सरकार से एंडेम्निटी चाहती हैं वैक्सीन कंपनियां, एंडेम्निटी क्या है ? आम जनता को क्या होगा नुक्सान ? पढ़ें रिसर्च रिपोर्ट-

भारत में तेजी से टीकाकरण करने के लिए भारत सरकार ने वैश्विक दवा कंपनी फ़ाइज़र और मॉडेर्ना से वैक्सीन के निर्यात पर डील हुई है. लेकिन फ़ाइज़र और मॉडेर्ना ने वैक्सीन के निर्यात के लिए एंडेम्निटी indemnity की शर्त रखी है. एंडेम्निटी indemnity क्या होता है ? इससे इन दवा कंपनियों को क्या फायदा हो सकता है ?

सरकार से एंडेम्निटी चाहती हैं वैक्सीन कंपनियां, एंडेम्निटी क्या है ? आम जनता को क्या होगा नुक्सान ? पढ़ें रिसर्च रिपोर्ट-
सरकार से एंडेम्निटी चाहती हैं वैक्सीन कंपनियां, एंडेम्निटी क्या है ? आम जनता को क्या होगा नुक्सान ? पढ़ें रिसर्च रिपोर्ट-

सरकार ने रखा है टारगेट

दरअसल भारत सरकार ने इस साल दिसंबर तक देश के सभी वयस्क लोगों मतलब करीब 80 करोड़ की आबादी को टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा है लेकिन इस अभियान में वैक्सीन की कमी हो रही है. 80 करोड़ की आबादी को कवर करने के लिए रोजाना करीब 80 लाख लोगों को वैक्सीन लगनी चाहिए लेकिन देश में वैक्सीन की भारी कमी से ऐसा नहीं हो पा रहा है.

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टारगेट को पूरा करने के लिए विदेशी कंपनियों को दिया इमरजेंसी अप्रूवल

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भारत सरकार ने अपने टारगेट को पूरा करने के लिए स्वदेशी के साथ विदेशी कंपनियों से भी वैक्सीन निर्यात के लिए बात हो गई है. हालांकि अभी दोनों ही कंपनियों की वैक्सीन भारत नहीं पहुंची है. फाइज़र जुलाई से अक्टूबर के बीच भारत को वैक्सीन निर्यात कर सकती है. लेकिन उससे पहले दोनों कंपनियों ने वैक्सीन निर्यात से पहले एंडेम्निटी indemnity की शर्त रख दी है.

दवा कंपनियों ने माँगा एंडेम्निटी

ऐसी चर्चा भी हो रही है कि भारत सरकार वैश्विक दवा कंपनी फ़ाइज़र और मॉडेर्ना को वैक्सीन के निर्यात के लिए एंडेम्निटी indemnity दे सकती है. एंडेम्निटी indemnity में ऐसा क्या होता है जो कंपनियां इसके पीछे पड़ी हैं. क्या इससे आम जनता को कुछ नुक्सान हो सकता है ? या इससे सरकार को कोई फायदा हो सकता है ? आइये जानते हैं एंडेम्निटी होती क्या है-

एंडेम्निटी indemnity क्या है ?

एंडेम्निटी indemnity का मतलब होता है हानि से सुरक्षा. मतलब अगर किसी भी कंपनी को अपने किसी प्रॉडक्ट के लिए एंडेम्निटी indemnity मिली हुई है तो उस प्रोडक्ट से कोई भी हानि होने पर कम्पनी पर मुक़दमा दायर नहीं किया जा सकता. थोड़ा और आसानी से समझें तो अगर फ़ाइज़र (पहला पक्ष) की भारत में (दूसरा पक्ष) वैक्सीन लगाने से किसी भारतीय नागरिक (तीसरा पक्ष) को किसी भी तरह का दुष्प्रभाव होता है तो तीसरा पक्ष यानी आम जनता फ़ाइज़र पर कोई मुक़दमा नहीं कर सकेंगे. एंडेम्निटी indemnity का मतलब साफ़ है कि फिर फ़ाइज़र की वैक्सीन को भारत में क़ानूनी सुरक्षा प्राप्त हो जाएगी.

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सरकार ने अभी नहीं दी है एंडेम्निटी indemnity

हालांकि नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने कहा कि ऐसे फैसले ‘देश और लोगों के हित में लिए’ जाते हैं. विदेशी वैक्सीन निर्माताओं को उम्मीद है कि उन्हें ‘हर्जाने से क्षतिपूर्ति से क़ानूनी संरक्षण’ दिया जाना चाहिए. वैक्सीन निर्माताओं की दलील है कि दुनिया भर में उन्हें ये क़ानूनी संरक्षण दिया जा रहा है. उधर केंद्र सरकार ने बताया है कि किसी विदेशी या भारतीय वैक्सीन निर्माता को ‘हर्जाने से क्षतिपूर्ति से क़ानूनी संरक्षण’ देने पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है.

एंडेम्निटी indemnity मिलने के बाद कौन करेगा नुकसान की भरपाई ?

लेकिन अब यहाँ सवाल ये उठता है कि एंडेम्निटी indemnity मिलने के बाद जिसका नुकसान हुआ तो उसकी भरपाई कौन करेगा ? अब तक ये कहा जा रहा था कि नुकसान की भरपाई करने की ज़िम्मेदारी भारत सरकार की होगी. लेकिन ये भी अनुबंध के सार्वजनिक होने पर ही स्पष्ट हो सकेगा. स्वस्थ भारत ट्रस्ट से जुड़े डॉक्टर मनीष कुमार दावा करते हैं कि भारत सरकार ने वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति दी है. ऐसे में ये एक तरह का ट्रायल ही है.

आम जनता के पास कोई रास्ता नहीं

डॉ. मनीष बताते हैं कि आम जनता के पास सरकार के निर्णय को मानने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है. सरकार पर भी जनता को वैक्सीन लगवाने का दबाव है. और अगर सरकार वैक्सीन कंपनियों को एंडेम्निटी indemnity नहीं देगी तो हो सकता है कि वैक्सीन कंपनियां वैक्सीन देने से ही मना कर दें. वहीं सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने भी अपनी वैक्सीन कोवीशील्ड के लिए सरकार से एंडेम्निटी indemnity मांगी है. सीरम इंस्टीट्यूट ने तर्क दिया है कि सभी वैक्सीन निर्माताओं, भले ही वो देसी हों या विदेशी, सभी को बराबर सुरक्षा मिलनी चाहिए.

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