भूख से तड़प रही तीन बच्चियों ने PMO में किया फोन, तुरंत खाना लेकर दौड़ पड़े अधिकारी, पढ़ें-

सम्पूर्ण लॉकडाउन के दौरान एक ऐसा वाक्या सामने आ रहा है. जिसे सुनकर हर किसी को ख़ुशी होगी. दरअसल पीएम मोदी की तरफ से इस बार एक गरीब और भूख से तड़प रही तीन बच्चियों को खाना पहुँचाया गया है.

hungry girls called pmo officers came with food in bhagalpur patna
hungry girls called pmo officers came with food in bhagalpur patna

ये घटना पटना में भागलपुर के बड़ी खंजरपुर का है. यहाँ दूसरों के घरों में चूल्हा-चौका और बर्तन साफ करने वाली तीन अनाथ बच्चियां भूख से तड़प रही थीं और जब उन्हें पड़ोसियों ने भी खाना देने से इनकार कर दिया, ताे तीन दिन से भूखी इन बच्चियों ने काेविड-19 के लिए जारी केंद्र की हेल्प डेस्क काे इसकी जानकारी दी.

भूखी इन बच्चियों की सूचना मिलते ही केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और एक घंटे के अंदर बच्चियाें के घर पर खाना पहुंच गया. खाना देखते ही बच्चियों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए. उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई और उन्होंने पीएम मोदी को धन्यवाद कहा है. बतादें कि पीएम मोदी की तरफ से कभी रिक्शावाले की मदद तो कभी बिहार की जीविका दीदियों के काम की सरहाना तो कभी किसी छात्र की उपलब्धियों पर उन्हें बधाई भी देते हैं.

सरकार की तरफ से ऐसा करने से जनता में भी विश्वास हो जाता है कि अगर कोई साथ नहीं देगा तो सरकार हमारी जरूर मदद करेगी. सरकार हमारे हर दुःख में साथ खड़ी रहेगी.

जगदीशपुर के अंचलाधिकारी ने बताया कि तीनों बहनों ने अखबार में देखकर पीएमओ के हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया था. जानकारी मिलने के बाद पीएमओ से जिला प्रशासन को निर्देश मिले जिसके बाद आधे घंटे के अंदर भोजन तैयार कर तीनों बहनों को उपलब्ध कराया गया है. साथ ही बच्चियों को खाने के लिए सूखा राशन भी दिया गया है. और किसी भी आवशयकता के लिए उन्हें अपना मोबाइल नम्बर दिया है, ताकि वो बात कर सकें.

बच्चियों ने पीएमओ के हेल्पलाइन नंबर पर अपने दुःख को बताया कि वे लाेग दो दिनों से भूखी हैं. घर में अनाज का एक दाना नहीं है. जिनके घर बर्तन साफ कर गुजारा चलाते थे उन्होंने काम कराने से मना कर दिया है. इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि पिता सिनोद भगत और मां अनीता देवी का बहुत पहले निधन हो चुका है. तभी से दोनों दूसरों के कपड़े धोकर किसी तरह से अपना परिवार चलाते थे. पैसा कम होने की वजह से उनकी पढ़ाई भी छूट गई है. बच्चियों ने बताया एक-दो दिन लाेगाें ने मदद की फिर मदद करना बंद कर दिया.

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