विधायकों की मंडी इससे सस्ता विधायक कहीं नहीं मिलेगा..Maharashtra Crisis व्यंग्य एनालिसेस..

PRAGYA KA PANNA
PRAGYA KA PANNA

मैं प्रज्ञा मिश्रा आज एक बोलती हुई चिट्ठी अपने देशवासियों के लिए लिख रही हूं..एयरपोर्ट पर मुंह छिपाकर भागते ये शिवसेना के विधायक हैं..भारत वर्ष की सारी डकैतियां छिपाकर होती हैं..लेकिन ऊंट की चोरी निहुरे निहुरे नहीं की जा सकती इसलिए विधायक कैमरों के सामने भाग रहे हैं…विधायकों पर डाका डालने (MLA’s Market will not get cheaper MLA anywhere) वाला भारत में एक ही व्यक्ति है..इस धंधे का दूसरा व्यापारी मौजूदा समय में पूरे भारत वर्ष में मौजूद नहीं है..भारत में कुछ लोग उसे चाणक्य बुलाते हैं..कुछ लोग कुछ और कहते हैं..

भारत में विधायकों की डकैती..बैंक डकैती से बड़ी होती है..बैंक डकैती से पैसा मिलता है..और विधायकों की डकैती से राजपाठ मिलता है..जब राजपाठ मिल जाएगा तो पैसा तो मिल ही जाएगा..लोकतंत्र में विधायकों की डकैती (MLA’s Market will not get cheaper MLA anywhere) डालने के कुछ नियम कानून हैं..आप मुंह उठाकर विधायक नहीं खरीद सकते उसके लिए पहले विधायकों की चोरी करनी होती है या डाका डालना पड़ता है .. विधायकों की चोरी के लिए आपको 4 क्राइटेरिया पूरे करने होते हैं..

  • पहला- विधायक खरीदने के लिए आपके पास पैसा होना चहिए..
  • दूसरा- केंद्र में सरकार होनी चाहिए..
  • तीसरा- दिखाने के लिए थोड़ा डर होना चाहिए..
  • चौथा – देने के लिए पद होना चाहिए..

बस इतने से ही काम नहीं चलेगा..एक सबसे जरूरी बात जो रह गई है वो ये है कि जिस भी राज्य में आप विधायकों की डकैती डालने के लिए जाएं वहां चेक कर लें..गठबंधन की सरकार होनी अनिवार्य है..बिना गठबंधन की सरकार के डकैती असंभव है..इसको ऐसे समझिए कि दूसरे की दुकान से मुर्गी चुराने के लिए अपकी भी बगल में मुर्गी की दुकान होनी चाहिए..

अब सवाल ये उठता है कि विधायकों पर डाका या विधायकों की चोरी कब की जा सकती है..दोस्तों भारत में विधायक चोरी करने या लोकतंत्र में डाका डालने या विधायक लूटने या खरीदने का कोई सटीक मौसम नहीं होता.आप किसी भी मौसम में ये काम कर सकते हैं लेकिन हर मौसम में एक ही बाध्यता है कि विधायक खरीदने (MLA’s Market will not get cheaper MLA anywhere) के लिए आपका बटवा भारी होना चाहिए..दोस्तों महाराष्ट्र की सरकार गिरने वाली है..

किसके पास कितने विधायक हैं..क्यों कैसे और कब सरकारें गिरती हैं..इसके लिए मैंने अलग से एक वीडियो कर रखी है मेरे चैनल पर आप देख सकते हैं..तो दोस्तों लोकतंत्र में अगर विधायकों को अपनी सरकार से कुछ दिक्कत होती है..

वो उस पार्टी में नहीं रह सकते हैं..जिस पार्टी से वो चुनकर आए हैं..तो विधानसभा के भीतर भी ऐलान कर सकते हैं..वो आम तौर पर भी पार्टी छोड़ने का ऐलान कर सकते हैं..जिनका ईमान गिरवी हो जाता है..जो चंद पैसों के लिए बिक जाते हैं..जो लोकतंत्र की सारी मर्यादाएं तार तार करके खरीद लिए जाते हैं..वो ऐसे ही मुंह छिपाकर होटल (MLA’s Market will not get cheaper MLA anywhere) होटल भागते हैं..वो अपना मोबाइल बंद करके रहते है..महाराष्ट्र की सरकार गिरने वाली है क्योंकि उद्धव ठाकरे के विधायक भाग गए हैं..पहले भागकर गुजरात गए..फिर गुवाहाटी के होटल रेडिशन ब्लू में रख दिये गए हैं..50 कमरे महाराष्ट्र से लूटकर लाए गए विधायकों के लिए बुक हैं..

जिस पार्टी की अब महाराष्ट्र में सरकार बनेगी वहीं विधायक लूट का सरगना होगा..उसे पहचानने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए..सच पूछिए तो विधायकों के असली मजे तब होते हैं जब विधानसभा (MLA’s Market will not get cheaper MLA anywhere) के चुनाव के बाद किसी को पूरा बहुमत न मिले.. दो -दो ,चार -चार विधायकों के इधर से उधर होने पर सरकार बनने और बिगड़ने की जब स्थिति आती है तब विधायकों की पाँचों उंगलियाँ घी में हो जाती हैं। पार्टियों के नेता उनको मस्त जहाजों में बिठाकर होटलों और रिसॉर्टों में घुमाते हैं.. दामादों की तरह खातिरदारी करते हैं..कीमती हीरे जवाहरातों की तरह उनकी निगरानी की जाती है और वो कहीं भाग न जाएं, इसके लिए बाकायदा उन्हें खूँटे से बाँधकर रखा जाता है..

ये जानकारी तो नहीं मिली कि जिस कमरे में विधायक को रखा जाता है उसका दरवाजा बाहर से चाबी लगाकर बंद होता है या नहीं लेकिन विधायकों के मोबाइल रखवा लिए जाते हैं और उन्हें बाहर की दुनिया से संपर्क करने की इजाजत नहीं होती है..दोस्तों इस तरह तो जानवरों की भी स्मगलरिंग नहीं की जाती है..विधायकों (MLA’s Market will not get cheaper MLA anywhere) की स्मगलिंग थोड़ी आसान होनी चाहिए..बिक्री के नियमों में थोड़ी छूट होनी चाहिए..विधायकों की खुले बाजार में बिक्री होनी चाहिए..

शहरों की बुध बाजार में किसी चौराहे पर हर बुध को विधायक बिकने के लिए आने चाहिए..इससे जहाजों में लेकर भागने का और होटलो में छिपाने का नेताओं का खर्चा बच जाएगा..और विधायकों को भी बोली में ठीक रकम मिल जाएगी..और खरीददारों को इतनी ज्यादा मशक्त भी नहीं करनी पड़ेगी..

देखिए ऐसा नहीं है कि मैं एक ही तरफ से सोचती हूं दूसरी तरफ भी तकलीफें हैं..अगर विधायकों को खुला छोड़ दिया तो वो किसी और के हाथों बिक जाएंगे..विधायकों को मालूम है कि उनको जहाज से गुवाहाटी की सैर कराने नहीं लाया गया है..बल्कि इस लिए लाया गया है कि बिका हुआ माल कहीं ज्यादा पैसे में दूसरे के हाथ ना बिक जाए..

विधायक का कोई फिक्स रेट ना होने से इनकी खरीद में बड़ी दिक्कत होती है..विधायक (MLA’s Market will not get cheaper MLA anywhere) का ईमान ना होने की वजह से वो कहीं भी कितनी बार भी बिक सकता है..सरकार इतने सारे प्रयोग कर रही है तो एक कानून विधायक खरीद के लिए बनाए जिससे क्रेता और विक्रेता दोनों के लिए आसानी हो सके..उम्मीद है मेरी बात कानून बनाने वाले हमारे महान नेताओं तक पहुंचेगी..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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