सेना में 4 साल की नौकरी RIGHT या WRONG आसान भाषा में पूरा विश्लेषण..

PRAGYA KA PANNA
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सेना में भर्ती होकर भारत माता की सेवा करने की चाहत रखने वाले देश के युवाओं को अब ना उगलते बन रहा है..ना निगलते बन रहा है..क्योंकि अब अग्निपथ भर्ती योजना (Agneepath Scheme) में सरकार सैनिकों को केवल 4 साल के लिए भर्ती करेगी..मतलब चार साल तक देश सेवा उसके बाद दूसरा धंधा खोज लेवा..हाई स्कूल या इंटर पास लड़का साढ़े 17 से 21 साल की उम्र में सेना में भर्ती होगा..4 साल बाद रिटायर हो जाएगा..जब वो करियर की दूसरी पारी खेलने लौटकर सिविलियन बनकर समाज में आएगा तो उसकी उम्र 25-26 साल की होगी..

इसके बाद जवान को कोई दूसरा करियर चुनना पड़ेगा..हो सकता है वो गार्ड बने..हो सकता है वो बिजनेस करे..हो सकता है वो खेती करे..या हो सकता है वो कुछ और करे..हो सकता है वो बेरोजगारों की संख्या का एक अंक बन जाए..सेना में भविष्य बनाने वाले बालकों के लिए 4 साल की शॉर्ट टर्म नौकरी एक धक्के जैसी है..

सबसे बड़ी बात ये है कि क्या 6 महीने में ट्रेनिंग करके..अग्निवीर इतना अनुभव ले लेगा की बॉर्डर पर तैनात होने जितना तजुर्बा हासिल कर सकेगा..जब तक वो सेना के तौर तरीके सीख पाएगा तब तक 4 साल हो जाएंगे..रिटायमेंट की बारी आ जाएगी..अग्निपथ स्कीम में जल थल वायु तीनों सेनाओं में सैनिकों की भर्ती होगी..

  • इनमें युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती कराया जाएगा
  • इस दौरान अग्निवीरों को अच्छा वेतन मिलेगा
  • चार साल की नौकरी के बाद सेवा निधि पैकेज मिलेगा
  • 17.5 साल से 21 साल के युवाओं को ही मौका मिलेगा
  • ट्रेनिंग 10 हफ्ते से 6 महीने तक होगी
  • 10/12वीं के छात्र आवेदन कर सकेंगे
  • 90 दिन में अग्निवीरों की पहली भर्ती होगी.
  • शहीद होने की स्थिति में परिजनों को 1 करोड़ रुपए मिलेंगे
  • बाकी बची नौकरी का भी वेतन दिया जाएगा.
  • डिसेबिलिटी की स्थिति में 44 लाख रुपए तक की राशि दी जाएगी
  • बाकी बची नौकरी का भी वेतन मिलेगा.
  • पूरे देश में मेरिट के आधार पर भर्तियां होंगी.

दोस्तों सवाल ये भी है कि इतना बड़ा फैसला लिया क्यों गया..इसके पीछे केवल ये तर्क दिया गया है कि देश की सेवा की भावना रखने वाले युवाओं को मौका मिलेगा..तीनों सेनाओं में युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी…मोटा मोटा मानकर ये चलिए कि बढ़ती बेरोजगारी को कम करने का एक प्लान है..और क्या इस अग्निवीर (Agneepath Scheme) वाली 4 की स्कीम के दम पर सरकार ने अगले डेढ़ साल में 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया है..अगर ये प्लान है तो ये बहुत दुखदाई है..4 साल बाद जब नौकरी चली जाएगी तब क्या होगा..

26 साल के नौजवान लड़का या लड़की..जो शादी के बंधन में बंधने वाले होंगे..तब जब वो बेरोजगार हो जाएंगे..तो क्या करेंगे..जो काबिल होगा वो तो दूसरा रास्ता खोज लेगा..जिसने केवल देश के लिए लड़ने के लिए बंदूक उठाई होगी वो बेरोजगार होगा..तो किस बैंक के बाहर दोनाली लेकर खड़ा होगा..सैनिक का स्वाभिमान लेकर किस फैक्ट्री के बाहर गार्ड वाली नीली वर्दी पहनकर खड़ा होगा..कह दीजिए कि मैं गलत कह रही हूं..

मैं अपनी कॉलोनी के रिटायर्ड बुजुर्ग सैनिक (Agneepath Scheme) अंकल लोगों की दिनचर्या जानती हूं..और जब हजारों की संख्या में जवानों को बंदूक रखाकर रिटायर किया जाएगा. तो नया पेशा चुनना इतना आसान नहीं होगा..या फिर एक तरीका ये हो सकता है कि अग्निवीर सीमा पर खड़े होकर दूसरे पेशों के एग्जाम की भी तैयारी करते रहें..लेकिन ये संभव नहीं है कश्मीर में मैंने तो अपनी आंखों से देखा है हमारे रिस्पेक्टेड बहादुर जवान अपनी ड्यूटी के दौरान पलक तक नहीं झपकाते..पानी भी पीते हैं तो आंखे चौकन्नी रहती हैं..4 साल वाला सैन्य सिस्टम लाकर सरकार अपनी लाज बचा सकती है लेकिन जवान के दिमाग में हमेशा रिटायर होकर कोई नौकरी खोजने का तनाव बना रहेगा.

आपने अब तक ये तो जान लिया कि अग्निपथ (Agneepath Scheme) वाली स्कीम में क्या है..लेकिन अब मैं आपको बताती हूं इस योजना के पीछे जो असल लाला बुद्धि लगाई है उसके बारे में..ये जानकर आपको पता चलेगा कि इस योजना को लाने के पीछे का मक्सद क्या हो सकता है..अग्निपथ पथ योजना का मेन काम है पैसे बचाना..जो सरकार कंपनियां बेच बेचकर पैसे कमा रही है वो सेना में पैसे क्यों नहीं बचाएगी..मौका मिलेगा तो जरूर बचाएगी..जहां लोगों के लिए नौकरी ख्वाब है..वहां 4 साल के लिए ही मिल जाएगी तो वहीं ठीक रहेगा..तो दोस्तों अग्नीपथ स्कीम से.

  • सेनाओं का सैलरी-पेंशन का खर्च बचेगा.
  • अभी 60% रक्षा बजट पेंशन-सैलरी में जाता है.
  • कहते हैं इससे सब वर्गों को सेनाओं में बराबरी का मौका मिलेगा.
  • अभी कई रेजीमेंट जातियों और समुदायों के नाम पर हैं.
  • इन रेजीमेंटों में बाहरी लोगों की भर्ती पर रोक है.
  • बिना रेजीमेंट भरे सेना को जवान मिल जाएंगे.
  • यानी सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी.
  • अभी सेना में करीब सवा लाख जवानों के पद खाली हैं.
  • सामान्य भर्ती से कमी पूरी करने में 6 से 7 साल लगेंगे.

जैसे तेल की शैम्पू की कंपनियां छोटा पाउच लॉन्च करती हैं..वैसे ही अग्निपथ सेना में पैसा बचाने वाला छोटा पाउच है..

अभी सेना में 10 साल के एक एसएससी पर 5 करोड़ 12 लाख रुपये खर्च करती है
14 साल के एसएससी के लिए 6 करोड़ 83 लाख रुपये खर्च होते हैं
रक्षा बजट का 60% पेंशन और सैलरी में खर्च होता है

अग्नीवीरों से कितना सरकारी खर्चा कम होगा वो भी देखिए

चार साल की सर्विस में एक अग्निवीर पर 80-85 लाख रुपये से ज्यादा खर्च नहीं आएगा
1 हजार जवानों पर 11 हजार करोड़ की बचत होगी
सौलरी और पेंशन का बोझ 30% तक कम हो जाएगा..
तो सरकार ने इस तरीके से क्रॉस कटिंग का रास्ता खोजा है ना कि पूरे भारत के बालकों सैनिक बनाने का अभियान चलाया है..

दोस्तों समय आने पर अपने देश के नागरिकों को भी युद्ध के लिए तैयार रखने के लिए दुनिया के 30 देशों में टूर ऑफ ड्यूटी के नियम हैं..जहां कुछ समय के लिए नागरिकों को सेना में काम करना पड़ता है..जैसे..

  • रूस में एक साल
  • फ्रांस में एक महीने
  • ब्राजील में 9-12 महीने
  • ग्रीस में एक साल
  • कतर में चार से 12 महीने
  • ताइवान में चार महीने
  • तुर्की में 6-12 महीने
  • स्वीडन में नौ से 11 महीने
  • अल्जीरिया में एक साल
  • बोलिविया में एक साल
  • कोलंबिया में एक से दो साल
  • एस्टोनिया में आठ से 11 महीने
  • कज़ाख़िस्तान में एक साल
  • किर्गिज़स्तान में एक साल
  • लिथुआनिया में नौ महीने
  • ग्वाटेमाला में एक से दो साल
  • मालदोवा में एक साल
  • मंगोलिया में एक साल
  • मोरक्को में एक साल
  • पैराग्वे में एक साल आर्मी, दो साल नेवी
  • तूनिसीया में एक साल
  • उज़्बेकिस्तान में एक साल सेना में काम करना पड़ता है..

अगर हमारे देश ने इन देशों की नकल की है तो ये देखना पड़ेगा कि इन देशों में टाइम ड्यूरेशन इनता है कि जवानों के आने वाले करियर पर इसका बहुत विशेष असर नहीं पड़ता है..इन देशों में नौकरी युवाओं (Agneepath Scheme) के लिए सपना नहीं होता है..भारत की तरह यहां बेरोजगारी का आलाम नहीं है..भारत में निसंदेह बेरोजगारी को ध्यान में रखकर 4 साल सेना में भर्ती का निर्णय लिया गया है..लेकिन 4 साल बाद का निर्णय नहीं लिया गया है..तमाम डिफेंस एक्सपर्ट भी सरकार की अग्निपथ स्कीम को सही नहीं मान रहे हैं..

भारत के डिफेंस एक्सपर्ट पीके सहगल का कहना है कि ये स्कीम सही नहीं है. एक बेहतर जवान को आर्मी में तैयार होने में 7 से 8 साल लग जाते हैं, ऐसे में जो अग्निवीर (Agneepath Scheme) होंगे उनको सिर्फ 6 महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी तो वो कैसे बेहतर सैनिक बन पाएंगे. जो युवा ज्वाइन करेंगे, चार साल बाद उन्हें निराशा हाथ लग सकती है. जब कोई आर्मी या दूसरी फोर्स से रिटायर होता है तो सिविल में आकर उन्हें बेहतर नौकरी नहीं मिलती है. इन अग्निवीरों को बड़ी आसानी से रेडिकलाइज किया जा सकता है और आसानी से इनको दूसरे कामों में लगाया जा सकता है.

सहगल के अलावा इंडिया आर्मी के पूर्व डीजीएमओ रिटार्ड लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया ने इस स्कीम को सशस्त्रबलों के लिए खतरे की घंटी बताया है. उन्होंने कहा कि बिना पायलेट प्रोजेक्ट सीधे भर्ती वाली इस स्कीम से समाज के सैन्यकरण का खतरा है.ये अच्छा आडिया नहीं है…

दोस्तों हमारे देश में 4 साल की ड्यूटी टूर ऑफ ड्यूटी नहीं है..बतौर सैनिक भर्ती करके सैनिक की जिम्मेदारियां देकर काम लिया जाएगा..सेना टी20 मैच नहीं है..सैनिक बनाना मैगी बनाने जितना आसान नहीं है..भारतीय सेना का जो इतिहास ..परंपरा और अनुशासन का रहा है..वो क्या इस चार साल की भर्ती से आ पाएगा.और 4 साल बाद युवा किधर जाएगा.. क्योंकि सरकार ने साफ कहा है कि जवानों को असम राइफल्स में वरियता दी जाएगी..हर साल 40 से 45 हजार जवान भर्ती किए जाने हैं.आगे जाकर इतने ही जवान (Agneepath Scheme) रिटायर भी होंगे..असम राइफल्स को हर साल 40 से 45 हजार जवानों की जरूरत पड़ेगी ऐसा संभव नहीं है..सरकार ने पूरा प्लान अभी तक नहीं बनाया है..

सरकार का कहना है हम आगे का प्लान बना रहे हैं..ऐसा नहीं है कि समस्या ही समस्या है कोई समाधान नहीं है..सरकार अगर ऐसा कर दे कि राज्यों की पुलिस भर्ती पीएसी..सीबीआई..एलआईयू..होमगार्ड..फलानी ढिमकानी जितनी भी शसस्त्र जवानों वाले पद हैं उन पर देश से सिविलियन्स को लिया ही नहीं जाए..आईपीएस नारकोटिक्स कस्टम.हर जगह केवल अग्निवीरों को वरियता दी जाए तो प्रॉब्लम सुलझ सकती है.

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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