हिंदू राष्ट्र (Hindu Rashtra) के लिए खतरनाक ऐलान..सरकार चुप..समाज खामोश : संपादकीय व्यंग्य

PRAGYA KA PANNA
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टीवी पर रामायण महाभारत में हमने जिन ऋषि मुनियों को देखा..जिनके विशाल ह्रदय को देखा..क्या वो भ्रम था..अगर नहीं था तो..यति जैसों की इस उत्पाती धर्म संसद का विरोध करने के लिए कोई दधीचि क्यों नहीं खड़ा होता..सब की आंखों के सामने भारत में देवों की भूमि पर संत परंपरा गुंडागर्दी के पेशे में बदल रही है..और सब महाभारत की हस्तिनापुर की सभा की तरह सब मौन हैं..ध्रतराष्ट्र हिंदू वोटों (Hindu Rashtra) के मोह में मजबूर हैं..द्रोणाचार्य कृपाचार्य और पितामहा टाइप के लोग..चुनावी जुए में अपनी जुबान खो चुके हैं..

मैं जानती हूं फिर कहती हूं कि संत परंपरा को दंगाईयों का गुलाम बनने से रोकना चाहिए..देवों की धरती हरिद्वार में 3 दिन तक हिंदू धर्म को बचाने के लिए दंगाईयों की माफ करिएगा..संतों की धर्म संसद चली..इस धर्म संसद से हल ये निकला कि अगर भारत के मुसलमानों को मार दिया जाए..तो भारत हिंदू राष्ट्र (Hindu Rashtra) बनाया जा सकता है..क्या आपको इस लाइन मतलब मालूम है..सरकारें चुप हैं..साधु सन्यासी और संत चुप हैं..देश में दूसरे महाभारत की युद्ध भूमि धीरे धीरे सजाई जा रही है..

भारत में अगर आज की तारीख में संविधान का राज होता तो माईक पर जहर उगल रहा ये आदमी अब तक जेल में होता..जिस राज्य में घोर आपत्तिजनक..संविधान विरोधी..मानवता विरोधी..कनून विरोधी..मारकाट को बढ़ावा देने वाली..हिंसा (Hindu Rashtra) के लिए यूथ को भड़काने वाली..गैंग की मीटिंग चल रही थी..माफ कीजिगा धर्म संसद चल रही थी..वो हरिद्वार..उत्तराखंड में है..वहां बीजेपी की सरकार है..लेकिन क्या इन दंगाईयों पर कोई कार्रवाई हुई..नहीं हुई..बगल में है उत्तर प्रदेश यहां भी बीजेपी सरकार है..क्या इधर से कोई आवाज उठी..नहीं ..देश में भी बीजेपी की सरकार है..क्या देश की सरकार ने कोई हिदायत दी..कोई चेतावनी दी..कि बाबा लोगों बबाईन मैडम जी..कृपया मारकाट को प्रोत्साहित ना करें..

हिंदू धर्म (Hindu Rashtra) ने अब तक सब कुछ अपनाया है..सबको गले लगाया है..और धर्म के नाते ना सही कानून और संवैधानिक मजबूरियों के तरह भी आप दूसरे धर्म को लोगों को समाप्त करके देश को हिंदू राष्ट्र बनाने का अलग से गैंग तैयार नहीं कर सकते..मैं अपने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी से पूछती हूं..नरेंद्र मोदी जी आप तो हमारे प्रधानमंत्री हैं..क्या अगर ये धर्म संसद मुसलमानों की होती..तो क्या तब भी आप ऐसे ही मूकदर्शक बने रहते..गृह मंत्री आप बताईये..आप तो देश के गृह मंत्री हैं..क्या आपके रहते एक गैंग दूसरे धर्मे को मारने काटने की बातें..माईक से कर सकता है..क्या वो इसे लाइव प्रसारित कर सकते हैं..या संविधान ने इनको अलग से ऐसा करने की जगह दे दी है..

मैं आपने चैनल पर वो सब नहीं सुना सकती हूं..ना ही खुद अपने शब्दों में बता सकती हूं..क्योंकि मैं तुच्छ मानसिकता वाले दो कौड़ी के यति के बारे में बहुत कुछ नहीं बोलना चाहती..पावर में होने के बाद भी..इस आदमी से गाली खाकर बीजेपी की महिला नेतानियां मंत्रियां.. अगर कुछ नहीं बोलतीं तो मुझे क्या है..मैंने देश के समाज का ठेका थोड़ी ले रखा है..अपने ही धर्म (Hindu Rashtra) की पावर में बैठी महिलाओं को रखैल कहने वाले हिंदू धर्म को बचाने के लिए दूसरे धर्म के लोगों को खत्म करने का कानून अपनी संसद में पास कर रहा है..और सरकार तमाशा देख रही है..देश तमाशा देख रहा है..कानून अंधा हो चुका है तो मैंने यानी प्रज्ञा मिश्रा ने कोई समाज का ठेका थोड़े लिया है..लेकिन एक बात सोचिएगा..

अगर यही भारत के दूसरे धर्म के नागरिकों की संसद में हुआ होता तो क्या होता..इसका मतलब साफ है सब हमारे देश के अंधे कानून..और बहरी सरकारों की देख रेख में हो रहा है..लेकिन एक बात कहूंगी..जो हो रहा है गलत हो रहा है..ऐसा नहीं है कि कुछ कुकुरमुत्ते टाइप के दंगाई लोग ही भारत की हिंदू संस्कृति (Hindu Rashtra) और परंपरा के ठेके दार हैं..लेकिन जिनके कंधों पर हिंदू धर्म की जिम्मेदारी है वो कुछ नहीं बोल रहे हैं..मरने मारने की बातें करने वाले इन दंगाईयों से ज्यादा देश के असल मुनियों का मौन घातक है..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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