अयोध्या मामले में हिंदू पक्ष की दलीलें पूरी, रोजाना हो रही है सुनवाई, हो सकता है बड़ा फैसला

देश के सबसे संवेदनशील और सबसे चर्चित मामला अयोध्या केस की सुप्रीम कोर्ट में प्रतिदिन सुनवाई चल रही है. शुक्रवार को हिंदू पक्ष की दलीलें पूरी हो चुकी हैं. अब सोमवार को मुस्लिम पक्ष अपनी दलीलें रखेगा.

hindu parties arguments complete in ayodhya case

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अब तक इस केस में 16 दिनों की सुनवाई हो चुकी है. अब तक जिस तरह से सुनवाई हुई है, उससे नवंबर तक इसका फैसला आने की उम्मीद काफी बढ़ गई है. अब सोमवार से आगे की सुनवाई में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन अपना पक्ष रखेंगे. धवन ने सुप्रीम कोर्ट में एक बार कहा था कि वो अपना पक्ष रखने के लिए 20 दिनों का समय लेंगे. अगर ऐसा होता है तो भी सुप्रीम कोर्ट के पास फैसला सुनाने के लिए एक महीने से ज्यादा का समय बच जाएगा.

दरअसल इस केस की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ कर रही है. ये पीठ साल 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर 14 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. वहीं सबसे बड़ी बात ये है कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं. ऐसे में इस बात की चर्चा की जा रही है कि उनके सेवानिवृत होने से पहले फैसला आ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट में आमतौर पर लगातार सुनवाई के लिए तीन दिन ही निर्धारित हैं, लेकिन अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय सोमवार से शुक्रवार तक, पांच दिन सुनवाई कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट का प्रयास है कि नवंबर तक इस केस में फैसला सुना दिया जाए.

30 सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर फैसला दिया था कि विवादित ज़मीन को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए. जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए. सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए, जबकि बाकी का एक तिहाई लैंड सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाए. इसी के बाद से ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था.

बतादें कि 2.77 एकड़ में फैली राम ज्नमभूमि-बाबरी मस्जिद की जमीन के मालिकाना हक के लिए बीते 70 सालों से कानूनी लड़ाई जारी है.