लखनऊ में लगे दंगाइयों के पोस्टर पर हाईकोर्ट का फैसला आज, भरने पड़ सकते हैं करोड़ों रुपये

CAA के विरोध में देश के कई जगहों पर दंगे हुए जिसमें काफी सरकारी और गैर सरकारी सम्पत्तियों का नुक्सान हुआ था और सैकड़ों लोगों को गंभीर चोटें आईं. कई मासूम लोगों की जान भी चली गई.

high court up violence case hoardings put up by up government
high court up violence case hoardings put up by up government

इन दंगाइयों को काबू में करने के लिए सभी राज्यों की सरकारों ने भरपूर प्रयास किया लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो फार्मूला अपनाया की जिससे खुद दंगाई ही कांप उठे. सभी को याद होगा की नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू होने के बाद 19 दिसंबर को लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन हुआ था. जिसमें सार्वजनिक संपत्ति का काफी नुकसान हुआ था.

उस समय दंगाइयों को जो भी दिख रहा था उसपर लाठी पत्थर चला रहे थे. कई पुलिस चौकियां फूंक दी. और कई कार, बस, मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया था. 4 से 5 दिन पूरे शहर में इंटरनेट बंद कर दिया गया था. ताकि कोई भड़काऊ मैसेज या वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर न करे.

उस दौरान लखनऊ के चार थाना क्षेत्रों में भयंकर हिंसा फैली थी. इनमें ठाकुरगंज, हजरतगंज, केसरबाग और हसनगंज का नाम शामिल है. उस समय सीएम योगी ने सख्त कदम उठाते हुए हिंसा में हुए नुक्सान की सारी भरपाई उपद्रवियों से करवाए जाने की बात कही थी. इसके बाद पुलिस ने फोटो-वीडियो के आधार पर 150 से अधिक लोगों को नोटिस भेजे थे.

कुछ दिन चली जांच के बाद मिले सबूतों के आधार पर प्रशासन ने 57 लोगों को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया था. अब गुरुवार 5 मार्च 2020 देर रात को योगी सरकार ने सभी 57 उपद्रवियों की फोटो के साथ होर्डिंग लगवा दी है. ये होर्डिंग उन इलाकों में लगवाए गए, जहां इन्होंने तोड़फोड़ की थी. जिसमें चार जगह हसनगंज, हजरतगंज, केसरबाग और ठाकुरगंज इलाके शामिल हैं.

57 लोगों की तस्वीरें, उनके नाम-पते सब सार्वजानिक किया गया है. डीएम अभिषेक प्रकाश ने शुक्रवार को बताया था कि चार थाना क्षेत्रों में एक करोड़ 88 लाख 62 हजार 537 रुपए की रिकवरी के तीन आदेश जारी किए जा चुके हैं. 57 लोगों से 88,62,537 रुपए वसूले जायेंगे. वहीं पुलिस द्वारा सबूत उपलब्ध करवाए जाने के बाद बाकियों से भी वसूली की जाएगी.

डीएम अभिषेक प्रकाश ने आगे बताया था कि सभी को नोटिस जारी होने की तारीख से 30 दिन का समय दिया गया है. अगर निर्धारित समय तक शुल्क नहीं जमा किया गया तो फिर संपत्ति कुर्क की जाएगी. उन्होंने बताया कि इस कार्यवाही से बाकियों को भी सबक मिलेगा कि किसी के बहकावे में न आएं. न किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचाएं.

हजरतगंज में 6437637 रुपये का नुक्सान हुआ है. जिसमें 28 दंगाइयों के नाम शामिल हैं. हसनगंज में 2176000 रुपये का नुक्सान हुआ है. जिसमें 13 दंगाइयों के नाम शामिल हैं. कैसरबाग में 175000 रुपये का नुक्सान हुआ है. जिसमें 06 दंगाइयों के नाम शामिल हैं. ठाकुरगंज में 73900 रुपये का नुक्सान हुआ है. जिसमें 10 दंगाइयों के नाम शामिल हैं.

इतना ही नहीं नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में लखनऊ के घंटाघर पार्क में बिना अनुमति हो रहे प्रदर्शन के दौरान उपद्रव करने वाले आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. इंस्पेक्टर ठाकुरगंज प्रमोद मिश्र ने बताया की बिल्लौचपुरा निवासी साहिल उर्फ मो. शादिक खान को गुरुवार दोपहर पकड़ा गया है. साहिल ने 9 फरवरी को घंटाघर पार्क पर सोशल मीडिया के जरिए भारी भीड़ जुटाई गई थी. रोके जाने पर प्रदर्शनकारी पुलिस से भी भिड़ गए थे. इस मामले में साहिल की तलाश की जा रही थी.

57 लोगों की तस्वीरें, उनके नाम-पते सब सार्वजानिक किये जाने के बाद शनिवार को हाईकोर्ट ने इसे संज्ञान में लिया और लखनऊ के डीएम और मंडलीय पुलिस कमिश्नर से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा था कि किस कानून के तहत उन्होंने सार्वजनिक स्थान पर फोटो चस्पा किए हैं. जिसपर कल रविवार को छुट्टी होने के बावजूद इस मामले पर सुनवाई हुई.

जिसमें महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह ने जनहित याचिका पर आपत्ति की और सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि लोक व निजी संपत्ति को प्रदर्शन के दौरान नुकसान पहुंचाने वालों को हतोत्साहित करने के लिए ये कार्रवाई की गई है. जिन लोगों के फोटो लगाए गए हैं वे कानून का उल्लंघन करने वाले लोग हैं. इनको पूरी जांच और प्रक्रिया अपनाने के बाद अदालत से नोटिस भी भेजा गया था. मगर कोई भी सामने नहीं आ रहा है, इसलिए सार्वजनिक स्थान पर इनके फोटो चस्पा किए गए हैं.

इसके बाद मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की स्पेशल बेंच ने सुनवाई पूरी होने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है. अब इस मामले पर फैसला आज सोमवार नौ मार्च को दिन में 2 बजे सुनाया जाएगा. अब अगर कोर्ट का फैसला सरकार के पक्ष में गया तो दंगाइयों को करोड़ों रुपये भरने पड़ सकते हैं. और अगर कोर्ट ने दंगाईयों पर रहम दिखाई तो होर्डिंग में छपे 57 लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *