हाईकोर्ट ने योगी सरकार को लगाई फटकार, कहा- ‘मेरा कायदा, वरना कोई कायदा नहीं जैसा रवैया छोड़ दें

देश में कोरोना से बिगड़े हालात को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार के तौर तरीकों पर नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट ने कहा है कि सरकार माई-वे या नो-वे का रास्ता छोड़े और लोगों के सुझावों पर भी अमल करे.

योगी सरकार की कार्ययोजना ख़ारिज

महामारी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने अपनी कार्ययोजना पेश की थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया है. कोर्ट ने सरकार से तीन मई को सुबह 11 बजे अगली सुनवाई पर नई और लागू होने लायक योजना पेश करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कहा नागरिकों को ऑक्सीजन न दे पाना शर्मनाक है. कोरोना का भूत गली, सड़क पर दिन-रात मार्च कर रहा है. लोगों का जीवन भाग्य भरोसे है. डर से सड़कें, गलियां रेगिस्तान की तरह सुनसान पड़ी हैं. शहरी आबादी कोरोना की चपेट में है.

-----

हाईकोर्ट ने योगी सरकार को कड़े शब्दों में फटकारा कि जो लोग सत्ता में हैं, वे ‘मेरा कायदा मानो, वरना कोई कायदा नहीं जैसा रवैया छोड़ दें. आजादी के सात दशक बाद जब बड़े-बड़े उद्योग लग चुके हैं, हम अपने नागरिकों को ऑक्सीजन तक मुहैया नहीं करा पा रहे. ये शर्म की बात है.

-----

हाईकोर्ट ने दिए सुझाव

बड़े शहरों में हेल्थ बुलेटिन जारी करें ताकि मरीजों के परिजन का अस्पताल पर दबाव न बढ़े. पोर्टल पर भी अस्पतालों में बेड की स्थिति की जानकारी दी जाए. एंटीजन रिपोर्ट निगेटिव होने पर अस्पताल मरीज को भर्ती करने से मना न करे. संविदा पर स्टाफ नियुक्त किए जाएं. अस्पतालों में दवा, ऑक्सीजन की उपलब्धता बनी रहे. डॉक्टर, हेल्थ वर्कर को छह घंटे के रोटेशन पर तैनात किया जाए. ज्यादा कोविड सेंटर बनाए जाने पर विचार हो. कोरोना से वास्तविक मौत का आंकड़ा कोर्ट के नोडल अधिकारी को दिया जाए. एंबुलेंस की संख्या बढ़ाएं, इन एंबुलेंस में जीवन रक्षा के लिए आवश्यक उपकरण लगे होने चाहिए.

चुनाव आयोग को भी नोटिस

योगी सरकार ही नहीं हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस भेजते हुए पूछा है कि पंचायत चुनाव के दौरान सरकार की गाइडलाइंस का पालन क्यों नहीं किया गया, जिसकी वजह से चुनाव ड्यूटी कर रहे 135 लोगों की मौत की खबर है. क्यों न आयोग के खिलाफ आपराधिक केस चलाया जाए. इसके साथ ही कोर्ट ने बचे हुए चुनाव में गाइडलाइंस का पालन करने का निर्देश भी दिया है.