निर्भया: क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई कल, आख़िरी बार माँ से मिला दुष्कर्मी मुकेश

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 जनवरी को निर्भया के चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी कर दिया था. 22 जनवरी की तारीख फांसी के लिए तय कर दी गई है. और फांसी का समय भी सुबह सात बजे का रखा गया है. चारो दोषियों को फांसी दिल्‍ली के तिहाड़ जेल में दी जाएगी.

hanging of nirbhaya case countdown starts
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लेकिन 2 दिन बाद 9 जनवरी को फांसी देने के फैसले में नया मोड़ आया. क्युकी दोषी विनय कुमार शर्मा और मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर कर दी है. अब सवाल ये उठ रहा है की क्या अब फांसी रुक जाएगी ? तो बिलकुल सही है अब जबतक सुप्रीम कोर्ट दोनों की क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई नहीं करेगा तबतक डेथ वारंट पर रोक लगी रहेगी.

फांसी की तारीख और समय सुनकर निर्भया के दोषियों की हालत खराब हो गई है. चारों के बर्ताव में बदलाव आया है. चारों में से तीन हिंसक होते जा रहे हैं. मगर चौथा बिल्कुल शांत बैठा रहता है. ऐसे में दोषी मुकेश सिंह को शनिवार को जेल में अपनी मां की याद आई, जिससे भावुक होकर उसने मां से मिलने की इच्छा जताई थी. इच्छा व्यक्त करने पर मुकेश को जेल में मां से मिलने की इजाजत दी गई.

मां से मिलते ही मुकेश भावूक हो गया और फूट-फूटकर रोने लगा. परिवारवालों ने उसे ये समझाया कि सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पेटिशन डाला गया है और ऐसे में जल्द सब ठीक हो जाएगा. साथ ही उन्होंने दया याचिका के बारे में भी बताया.

सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन पर 14 जनवरी को सुनवाई होगी. और उसी दिन पता चल जाएगा कि निर्भया के दोषियों को 22 जनवरी को फांसी दी जाएगी या फिर अभी दोषियों को कुछ दिन की और मोहलत मिलेगी. याचिका में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई है.

क्यूरेटिव पिटीशन क्या है-

क्यूरेटिव पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में लगाई जाती है. इसमें कोर्ट ने जो सज़ा तय की है उसमें कमी के लिए रिक्वेस्ट की जाती है. यानी फांसी की सज़ा उम्रकैद में बदल सकती है. ये विकल्प इसलिये होता है ताकि न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग न हो सके. क्यूरेटिव पिटीशन दोषी के पास मौजूद अंतिम मौका होता है. क्यूरेटिव पिटीशन किसी भी मामले में कोर्ट में सुनवाई का अंतिम चरण होता है. इसमें फैसला आने के बाद दोषी किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता नहीं ले सकता है.

क्या हैं क्यूरेटिव पिटीशन के नियम-

क्यूरेटिव पिटीशन दायर करते समय याचिकाकर्ता को ये बताना जरूरी होता है कि आखिर वो किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दे रहा है. क्यूरेटिव पिटीशन किसी वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा सर्टिफाइड होना जरूरी होता है. क्यूरेटिव पिटीशन को कोर्ट के तीन सबसे सीनियर जजों के पास भेजा जाता है, उनका फैसला अंतिम होता है. क्यूरेटिव पिटीशन पर फैसला आने के बाद अपील के सारे रास्ते खत्म हो जाते हैं.

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