गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण आज, जानें इस दिन का महत्व, मुहूर्त और पूजा की विधि

गुरु पूर्णिमा पर आज सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. वर्षा की दृष्टि से ये योग शुभ माना जा रहा है. आज ही वर्षा के नक्षत्र पुनर्वसु में सूर्य का प्रवेश होगा. और आज चंद्रग्रहण भी है.

guru purnima lunar eclipse shubh muhurat
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अपने गुरुजनों के सम्मान में हिन्दू बौद्ध और जैन धर्म के अधिकांश लोग गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाते हैं. गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरणमासी यानी फुल मून वाले दिन मनाया जाता है. इस दौरान सभी शिष्य गुरुमंत्र देने वाले/ज्ञान देने वाले अपने गुरुओं की पूजा करते हैं. द्रिगपंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं. क्योंकि आज के दिन वेदव्यास का जन्म हुआ था. वेदव्यास ही महाभारत के रचयिता माने जाते हैं.

गुरु अपने ज्ञान और अनुभव के मिश्रण से अंधकार को दूर करने में सहायक होता है. इसलिए गुरु का सम्मान सर्वोपरि है. जो व्यक्ति गुरु का आदर सम्मान करता है और समय समय पर गुरु का मार्गदर्शन लेता रहता है उससे लक्ष्मी और सरस्वती दोनों देवियां प्रसन्न रहती हैं. लक्ष्मी जी को धन की देवी और मां सरस्वती को ज्ञान की देवी माना गया है. लक्ष्मी जी भी उसी के पास रहना पसंद करती हैं जिसको मां सरस्वती का आर्शीवाद प्राप्त होता है.क्योकि धन का सही प्रयोग, बिना सरस्वती के संभव नहीं है.

पूर्णिमा की तिथि 4 जुलाई को सुबह 11 बजकर 33 मिनट ले लग जाएगी जो 5 जुलाई की सुबह 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगी. इस दिन आषाढ़ पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण भी लगेगा. लेकिन इस चंद्र ग्रहण का असर भारत में नहीं होगा जिसके कारण सूतक मान्य नहीं होगा.

गुरु पूर्णिमा की सुबह सबसे पहले स्नान कर साफ कपड़े पहनकर अपने घर के पूजा स्थल पर लगी देवी-देवताओं को प्रणाम करते हुए उनकी विधिवत रूप से पूजा-अर्चना करनी चाहिए. इसके बाद पूजा स्थल पर रखें अपने गुरु की तस्वीर को माला फूल अर्पित कर उनका तिलक करना चाहिए. पूजा करने के बाद अपने गुरु के घर जाकर उनका पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए. उन्हें भोजन कराएं.

आज के दिन चंद्रग्रहण भी लगेगा लेकिन ये भारत में दिखाई भी नहीं देगा. इसका सूतक भी नहीं मान जाएगा. ये साल का तीसरा ग्रहण होगा और इसके बाद आखिरी चंद्रग्रहण 30 नंवबर को लगेगा. ज्योतिष के मुताबिक 30 जून को ही देव गुरु बृह‍स्‍पति धनु राशि में प्रवेश कर चुके हैं. इस राशि में राहू पहले से मौजूद हैं. ऐसे में चंद्र ग्रहण के दौरान बृहस्‍पति पर राहु की दृष्टि धनु राशि को सीधे प्रभावित करेगी. चंद्र ग्रहण का धनु राशि वालों पर अधिक प्रभाव होगा. ग्रहण के कारण धनु राशि वालों को मानसिक तनाव, माता को कष्ट, निर्णय लेने में परेशानी और पेट के निचले हिस्सों से संबंधित दिक्कत आ सकती है.

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