आज से घर घर में गणेश उत्सव की धूम, जानें- स्थापना करने का शुभ मुहूर्त, इन बातों का रखें ध्यान

आज से देशभर में गणेशोत्सव का त्यौहार मनाया जाएगा. कोरोना के चलते इस बार इतनी चकाचौंध तो नहीं रहेगी लेकिन लोग अपने घरों और दुकानों में गणपति महाराज की पूजा अर्चना करेंगे.

ganesh chaturthi puja shubh muhurat murti sthapana time
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10 दिन चलने वाले इस त्यौहार पर गणपति जी की स्थापना की जाती है. गणपति को घर लाकर विराजमान करने से लेकर उनके विसर्जन को भी धूमधाम से करते हैं. गणेश पुराण के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था. इस तिथि को गणेश जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. हिंदू धर्म में भगवान गणेश को अत्यंत ही पूजनीय माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, गणेश जी का नाम किसी भी कार्य के लिए पहले पूज्य है. इसलिए इन्हें ‘प्रथमपूज्य’ भी कहते हैं.

अनन्त चतुर्दशी इस बार 1 सितंबर को है. इसी दिन गणपति विसर्जन धूमधाम से करते हैं. ज्योतिषाचार्य और धर्मशास्त्रों के जानकारों के अनुसार गणेश जी के प्रसन्न होने से घर में सुख, समृद्धि और शांति की स्थापना होती है. गणेश चतुर्थी से नए बिजनेस की शुरुआत, ज्वैलरी, प्रॉपर्टी और व्हीकल की खरीदारी शुभ होती है. वे गणों के स्वामी हैं, इस वजह से उनका एक नाम गणपति भी है. इसके अलावा हाथी जैसा सिर होने के कारण उन्हें गजानन भी कहते हैं.

पद्म पुराण के अनुसार गणेश जी का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था. इसलिए इसी समय गणेश स्थापना और पूजा करनी चाहिए. बतादें कि चतुर्थी तिथि 21 अगस्त की रात 11:02 बजे से आरंभ हो चुकी है. चतुर्थी तिथि 22 अगस्त की रात 7:56 बजे तक समाप्त होगी. इस बीच कई शुभ मुहूर्त हैं जब आप गणपति की स्थापना कर सकते हैं.

गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त-

पूर्वाह्न 11.07 से दोपहर 01.42 मिनट तक
दूसरा शाम 4.23 से 7. 22 मिनट तक
रात में 9.12 मिनट से 11. 23 मिनट तक
वर्जित चंद्रदर्शन का समय – 8:47 रात से 9:22 रात तक

इन बातों का रखें विशेष ध्यान-

घर, ऑफिस या अन्य सार्वजनिक जगह पर गणेश स्थापना के लिए मिट्टी की मूर्ति बनाई जानी चाहिए. घर या ऑफिस में स्थाई रूप से गणेश स्थापना करना चाह रहे हैं तो सोने, चांदी, स्फटिक या अन्य पवित्र धातु या रत्न से बनी गणेश मूर्ति ला सकते हैं. गणेश प्रतिमा कहीं से खंडित नहीं होनी चाहिए. इसमें गणेश जी के हाथों में अंकुश, पाश, लड्डू हो और हाथ वरमुद्रा में यानी आशीर्वाद देते हुए हो. कंधे पर नाग रूप में जनेऊ और वाहन के रूप में मूषक होना चाहिए.

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