प्रणब मुखर्जी के निधन पर 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक, PM मोदी ने कहा- हमेशा आपका मार्गदर्शन और आशीर्वाद मिला

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अब हमारे बीच नहीं रहे. 10 अगस्त को दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल (आर एंड आर) हॉस्पिटल में मस्तिष्क की सर्जरी के लिए भर्ती हुए थे.

former president pranab mukherjee passes away
former president pranab mukherjee passes away

10 अगस्त को ही ब्रेन से क्लॉटिंग हटाने के लिए इमरजेंसी में सर्जरी की गई थी. इसके बाद से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी. उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. प्रणब ने 10 तारीख को ही खुद के कोरोना पॉजिटिव होने की बात भी कही थी. 31 अगस्त को सुबह ही अस्पताल की तरफ से बताया गया था कि फेफड़ों में संक्रमण की वजह से वह सेप्टिक शॉक में थे.

सेप्टिक शॉक की स्थिति में रक्तचाप काम करना बंद कर देता है और शरीर के अंग पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त करने में विफल हो जाते हैं. मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में वर्ष 2012 से 2017 तक पद पर रहे. पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी के परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं. मुखर्जी के निधन की जानकारी उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी ने ट्वीट कर दी है.

पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर सरकार की ओर से सात दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है. पूरे भारत में 31 अगस्त से 6 सितंबर तक यह शोक मनाया जाएगा. गृह मंत्रालय ने कहा है कि इस दौरान देश भर में उन सभी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा जहां ध्वज लगा रहता है. उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को दोपहर 2 बजे नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित श्मशान घाट में होगा.

प्रणब मुखर्जी के निधन पर पीएम मोदी ने लिखा- भारत रत्न श्री प्रणब मुखर्जी के निधन पर भारत शोक व्यक्त करता है. उन्होंने हमारे राष्ट्र के विकास पथ पर एक अमिट छाप छोड़ी है. वे एक विद्वान स्कॉलर रहे. उन्हें समाज के हर वर्ग ने पसंद किया. मैं 2014 में दिल्ली में पहुंचा. पहले ही दिन से मुझे श्री प्रणब मुखर्जी का मार्गदर्शन, समर्थन और आशीर्वाद मिला. मैं हमेशा उसके साथ अपनी बातचीत को संजोकर रखूंगा. उनके परिवार, दोस्तों, प्रशंसकों और पूरे भारत में उनके समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं. ओम शांति।

भारतीय राजनीति में विरोधी भी प्रणब मुखर्जी का नाम सम्मान से लिया करते हैं. वे कितने काबिल थे, इसका अंदाजा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के एक बयान से लगा सकते हैं. तीन साल पहले मनमोहन ने कहा था- जब मैं प्रधानमंत्री बना, तब प्रणब मुखर्जी इस पद के लिए ज्यादा काबिल थे, लेकिन मैं कर ही क्या सकता था? कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी ने मुझे चुना था.

अपनी जीवनयात्रा पर लिखी पुस्तक ‘द कोलिशन ईयर्स – 1996-2012’ में उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि वो प्रधानमंत्री बनना चाहते थे. सभी राजनीतिक दलों में उनकी स्वीकार्यता थी. 2012 में वे देश के 13वें राष्ट्रपति बने थे.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *